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वन विभाग के अधिकारियों की बड़ी लापरवाही

बेड़ा जवाई नदी पुलिए के पास स्थित सोलावा अरहठ कृषि फार्म के निकट एक कच्ची नाडी में मगरमच्छ की सूचना मिलने पर...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 02:20 AM IST
बेड़ा जवाई नदी पुलिए के पास स्थित सोलावा अरहठ कृषि फार्म के निकट एक कच्ची नाडी में मगरमच्छ की सूचना मिलने पर शिवगंज के वन्य जीव प्रेमियों के एक दल ने बेड़ा स्थित नाडी पहुंचकर अपने स्तर पर करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मगरमच्छ को बाहर निकालकर समीप के जवाई बंाध में छोड़ दिया। गौरतलब है कि बारिश के दिनों में जवाई बांध को लबालब करने वाली बेड़ा जवाई नदी पुलिए के पास स्थित सोलावा अरहठ कृषि फार्म के निकट एक कच्ची नाडी बनी हुई है। यह नाडी करीब 25-30 फीट गहरी है। बारिश के दिनों में यह नाडी पूरी तरह से लबालब रहती है। अब जवाई नदी में पानी नहीं होने के कारण स्थित नाडी में भी पानी तल छूने लगा है। बारिश के दिनों में इस नाडी में पानी के साथ-साथ एक मगरमच्छ आ गया था। पहले तो पानी होने के कारण उसे परेशानी नहीं होती थी। लेकिन अब नाडी मे पानी सूखने के कारण मगरमच्छ नाडी में ही छटपटा रहा था। यह देख कृषि फार्म के मालिक भीखसिंह राणावत ने कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत करवाया था। लेकिन वन विभाग के अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे थे। इसी को लेकर दैनिक भास्कर ने 27 फरवरी के अंक में नाडी में सूखा पानी,बेचैन हो रहा मगरमच्छ ,सूचना के बाद भी नहीं पहुंचे अधिकारी के शीर्षक से खबर को प्रकाशित किया था। जिस पर सरपंच महावीरसिंह चौहान ने तत्परता दिखाते हुए इसकी जानकारी विकास अधिकारी बाली को दी। विकास अधिकारी ने वन विभाग के कर्मचारियों को जल्द ही मगरमच्छ को नाडी से निकालने के लिए निर्देशित किया, जिस वन विभाग के कर्मचारियों ने नाडी पर पहुंचकर एक लकड़ी का पट्टा लगाकर कार्य की इतिश्री कर ली। तथा बताया कि यह मगरमच्छ पट्टे के सहारे बाहर निकल जाएगा। इधर भास्कर में प्रकाशित खबर को देखकर गुरूवार को शिवगंज के वन्यजीव प्रेमी दिलीप कुमार मारू, मकसूद खा, तौफिक, चिकी, सूरज सहित दल ने बेड़ा स्थित नाडी पहुंचकर मौका मुआयना कर अपने स्तर पर करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मगरमच्छ को नाडी से बाहर निकालकर वाहन में डालकर समीप के जवाई बांध में छोड़ दिया। इस मौके पर सरपंच महावीरसिंह चौहान, कांस्टेबल भंवरलाल, पुष्पेंद्रसिंह राणावत वरावल, वार्ड पंच परबतसिंह, भीखसिंह राणावत, नगाराम देवासी आदि मौजुद थे।

काफी कमजोर हो गया था मगरमच्छ

वन्यजीव प्रेमियों ने बताया कि नाडी में पानी तल सूख जाने के कारण मगरमच्छ के खाने-पीने के लिए कोई सहारा नहीं था। जिससे भूख के कारण मगरमच्छ की हालत काफी कमजोर हो चुकी थी। अगर समय रहते नाडी से मगरमच्छ को नहीं निकाला होता तो शायद भूख प्यास से मगरमच्छ दम तोड़ देता।

ग्रामीणों की सूचना के तीन दिन बाद भी नाडी से मगरमच्छ निकालने नहीं पहुंचे वनकर्मी, वन्य जीवप्रेमी ने निकाल जवाई बांध में छोड़ा

नाडी में पानी सूखने से छटपटा रहा था मगरमच्छ, शिवगंज से बेड़ा पहुंचे वन्यजीव प्रेमी, डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद नाडी से निकाला

बेड़ा. बेड़ा स्थित नाडी से निकाले गए मगरमच्छ को जवाई बांध में छोड़ा गया।