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युवक की हत्या की शव फंदे पर लटकाया, पुलिस की पहली जांच में केस झूठा माना, दूसरी जांच में हत्या होने का खुलासा

मांडीगढ गांव का मामला, पिता व दो भाई निकले हत्या के आरोपी भास्कर संवाददाता | पाली सादड़ी थाना क्षेत्र के...

Danik Bhaskar | Sep 13, 2018, 02:15 AM IST
मांडीगढ गांव का मामला, पिता व दो भाई निकले हत्या के आरोपी

भास्कर संवाददाता | पाली

सादड़ी थाना क्षेत्र के मांडीगढ़ गांव में चंपालाल जाट की मौत से पर्दा उठाते हुए पुलिस ने खुलासा किया है कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या का केस है। बाली वृत के एएसपी अताउर्रहमान की जांच में बताया गया है कि चंपालाल की हत्या के पीछे पारिवारिक झगड़ा ही प्रमुख कारण था। इसके चलते गत 1 अप्रैल की रात को चंपालाल की हत्या कर आत्महत्या का रुप देने के लिए शव को फंदे पर लटकाया गया था। जांच अधिकारी की जांच के बाद सादड़ी पुलिस ने मृतक के पिता पेमाराम जाट व उसके भाई चुन्नीलाल तथा हस्तीमल को हत्या कर शव को फंदे पर लटकाने के जुर्म में मंगलवार रात को गिरफ्तार कर लिया।

प|ी ने किसी और को आरोपी बनाया, पुलिस ने तो केस ही झूठा माना

मांडीगढ़ गांव की जतनो देवी ने 3 अप्रैल, 2018 को सादड़ी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके पति चुन्नीलाल जाट की गत 1 अप्रैल की रात को हत्या कर आत्महत्या का रुप देने के लिए शव को खेत पर फंदे पर लटका दिया। केस में हत्या के लिए दूदाराम जाट, सोहन भील व भीमाराम को आरोपी बनाया गया, जिसमें कहा गया था कि दूदाराम ने उसके परिवार को समाज से बहिष्कृत किया था और विरोध करने पर उसके पति के साथ मारपीट की। मामले की जांच बाली एसएचओ कैलाशदान चारण ने की और जांच में खुलासा किया कि चंपालाल की हत्या नहीं हुई है। बल्कि चंपालाल ने आत्महत्या की है।



जिसमें दूदाराम समेत तीनों आरोपियों की कोई भूमिका नहीं है। चारण ने हत्या के मामले में अदम वकू में एफआर नतीजा दिया।

दूसरी जांच में दो चश्मदीद से हत्या से उठा पर्दा

बाली एसएचओ की जांच रिपोर्ट से असंतुष्ट मृतक की प|ी व अन्य परिजनों ने एसपी से लेकर प्रधानमंत्री तक परिवाद पेश किए, जिसके बाद तत्कालीन एसपी दीपक भार्गव ने बाली वृत के एएसपी को दुबारा जांच सौंपी। एएसपी अताउर रहमान के नेतृत्व में रीडर एएसआई सूरजभान सिंह की टीम ने वैज्ञानिक व साइबर तकनीक से जांच की तो पता चला कि घटना वाली रात को मृतक चंपालाल का अपनी प|ी से झगड़ा हुआ था। झगड़े में परिवार के लोगों ने मृतक का विरोध किया, जिसके बाद शराब के नशे में वह अपने कृषि फार्म पर जान बचाकर गया था। वहां खेती करने के लिए काश्तकार कन्हैयालाल व उसका बेटा कैलाश भील मौजूद थे, जिनसे मृतक ने जान बचाने की गुहार की थी। पुलिस का दावा है कि उस रात को ही पेमाराम ने अपने दोनों पुत्र चुन्नीलाल व हस्तीमल की मदद से चंपालाल की हत्या कर शव को फंदे पर लटका दिया, जिसे वहां सो रहे दोनों काश्तकार ने देखा था। उन दोनों गवाहों के बयान के बाद पुलिस ने हत्या के आरोप में तीनों को गिरफ्तार कर लिया।