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40 वर्षों से जसोल में आेरण भूमि में रहने वाले 600 परिवारों को आज तक नहीं मिले पट्‌टे

वक्त के साथ बढ़ती आबादी के चलते गांव में रहने के लिए जगह नहीं बची तो लोगों ने धीरे-धीरे आेरण-गोचर भूमि में रहना शुरू...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 03:35 AM IST
वक्त के साथ बढ़ती आबादी के चलते गांव में रहने के लिए जगह नहीं बची तो लोगों ने धीरे-धीरे आेरण-गोचर भूमि में रहना शुरू कर दिया। वहीं कच्चे झोंपे अब पक्की इमारतों में बदल गए है, लेकिन 40 वर्षों से जसोल गांव की ओरण भूमि में रहने वाले 600 परिवारों को आज भी सरकारी योजनाओं का लाभ तो पट्‌टे नहीं मिलने का मलाल है। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर ग्राम पंचायत प्रशासन तो जनप्रतिनिधियों के मार्फत तक सरकार तक बात पहुंचाई, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। इस पर ग्राम पंचायत ने वस्तुस्थिति को देखते हुए ओरण भूमि को आबादी में रूपांतरित करने व इसकी एवज में अन्य जमीन ओरण के नाम करने का प्रस्ताव बनाकर भिजवाया, लेकिन सरकार की ओर से इस पर प्रत्युतर नहीं मिलना है। ऐसे में ग्रामीण पट्टे के लिए आवेदन नहीं कर सकते है और इसके अभाव में प्रधानमंत्री आवास योजना सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ, ऋण इत्यादि सुविधाओं से महरूम रहना पड़ रहा है। रूपांतरण की फाइल राजस्व मंत्रालय में ही अटकी हुई है, वहीं स्थानीय विधायक राज्य सरकार में बतौर राजस्व राज्य मंत्री कामकाज कर रहे है, लेकिन अफसोस कि वे उपखंड की दूसरी सबसे बड़ी ग्राम पंचायत की मुख्य समस्या के समाधान में रूचि नहीं दिखा रहे है।

बालोतरा. जसोल गांव की ओरण भूमि पर बने मकान।

यह है बसावट

जसोल के वार्ड 1 व 2 की पूरी बसावट ओरण भूमि पर है वहीं वार्ड 3 का आधा हिस्सा ओरण व आधा आबादी में अवस्थिति है। वहीं ओरण भूमि में दो सरकारी विद्यालय, सार्वजनिक टांका, डिस्कॉम कार्यालय, चिकित्सालय भी बने हुए है। वार्ड 1, 2 व 3 ओरण भूमि में होने से यहां से निर्वाचित वार्ड पंच से रहवासी सड़क, पानी, बिजली इत्यादि मूलभूत सुविधाओं के विस्तार की मांग कर रहे हैं, लेकिन ओरण भूमि होने से ग्राम पंचायत भी विकास से कतरा रही है। ऐसे में लंबे समय से क्षेत्र विकास से भी अछूता है।

आबादी में रूपांतरण की जरूरत

ओरण भूमि में से 301.02 बीघा भूमि को आबादी में रूपांतरित करने के लिए 25 अगस्त 2015 को ग्राम पंचायत ने राज्य सरकार को प्रस्ताव भिजवाया। नियमानुसार ओरण को आबादी भूमि में रूपांतरित करवाने की क्षतिपूर्ति में दूसरी भूमि ओरण के नाम देनी पड़ती है इसके लिए ग्राम पंचायत ने खसरा संख्या 526 व 348 की 271.15 बीघा भूमि देना प्रस्तावित किया है।

मापदंड पूरे पर स्वीकृति नहीं

ग्राम पंचायत जसोल का अधिकांश क्षेत्र नगर परिषद बालोतरा परिधीय ग्राम (पैराफैरी बेल्ट) है, आबादी भूमि के रूपांतरण के लिए नगर परिषद अनापत्ति प्रमाण-पत्र सहित क्षतिपूर्ति भूमि के खसरा नंबर अंकित कर प्रस्ताव भिजवाया गया है। ऐसे नियमानुसार ग्राम पंचायत की ओर से हर मापदंड पूरे कर लिए है अब महज राज्य सरकार की स्वीकृति का इंतजार है।

आबादी में रूपांतरण होने से मिलेगी सुविधा

वर्तमान में करीब 200 बीघा ओरण भूमि पर लोगों का रहवास है। न्यायालय के आदेशानुसार ओरण-गोचर भूमि में कोई सरकारी भवन का निर्माण या रहवास नहीं कर सकते। जमीन के अभाव में ग्राम पंचायत मुख्य बस स्टेंड, सार्वजनिक निर्माण विभाग सहित अन्य कार्य भी नहीं करवा सकती। ऐसे में इस भूमि को आबादी में रूपांतरण होने से राहत मिलेगी।

हो सकता है आबादी में रूपांतरण

नियमानुसार ओरण-गोचर भूमि को सरकारी कार्यालय निर्माण या आबादी विस्तार के काम में नहीं ले सकते हैं, लेकिन आबादी में विस्तार या जमीन की निहायत जरूरत होने पर ओरण भूमि की जरूरत जितनी अन्य गैर सरकारी जमीन को ओरण के नाम दर्ज करवाना पड़ता है। इसके लिए ग्राम पंचायत जसोल की ओर से दो खसरों की भूमि को ओरण के नाम दर्ज करवाने का प्रस्ताव भिजवा दिया है। इसी तरह का मामला होने पर वर्ष 2007-08 में ग्राम पंचायत कालूड़ी में ओरण की 45 बीघा भूमि को आबादी में रूपांतरित कर गैर सरकारी भूमि को ओरण के नाम दर्ज किया गया था।