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गेर मेला हमारी संस्कृति की पहचान, इससे बढ़ता है प्रेम और भाईचारा: निर्मलदास
मोकलसर एवं मायलावास ग्राम पंचायत के संयुक्त तत्वावधान में हरवर्ष आयोजित होने वाला रंगपंचमी का मेला हर्ष एवं उल्लास के साथ संपन्न हुआ। सतरंगी रंगों में रंगा मोकलसर के रंगपंचमी मेला ग्राम्य संस्कृति की लोक कला से सरोबार हुआ। मेले में मोकलसर, रमणिया, मायलावास, लुदराड़ा, बालू, फूलण, राखी, खंडप, डाबली, काठाड़ी, भागवा, तेलवाड़ा, धीरा, मांगी, सैला, जिनपुर, कुंडल सहित पड़ोसी जिले जालोर से बड़ी संख्या में मेलार्थियों ने भाग लिया। सूर्य उदय होते ही मेला मैदान में लोगों का जुड़ना शुरू हो गया था जो दोपहर होते ही पूरा मेला मैदान खचाखच रूप से भर गया। मेले में छोटे छोटे बच्चों सहित बड़े लोगो ने झूलों में झूल कर आनंद लिया। महिलाओं ने हाट बाजार से जमकर खरीददारी की। मेले में आए भक्त भाविकों ने पहाड़ी की तलहटी पर स्थित चामुंडा माता एवं खेतलाजी के मंदिर में मिश्री एवं नारियल का भोग लगा कर अपने घर परिवार के खुशहाली की कामना की। मेले कमेटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारत साधु समाज के महामंत्री महंत निर्मलदास महाराज, कार्यक्रम की अध्यक्षता ठाकुर वीरेंद्र सिंह बालावत मोकलसर, विशिष्ट अतिथि के रूप में ओमाराम मेघवाल पूर्व प्रधान सिवाना, मुकनसिंह राजपुरोहित सचिव जिला कांग्रेस कमेटी बाड़मेर ने शिरकत की। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कर रहे भारत साधु समाज के महामंत्री निर्मलदास महाराज ने मेलार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि मेले हमारे कला और संस्कृति की पहचान है इससे मेलजोल बढ़ता है। भौतिकवाद में मेले ही ग्राम्य संस्कृति को जीवित रखने का मुख्य आधार है। मेले से लोगों का आपसी प्रेम भाईचारा बढ़ता है।
मेले में गेर दलों द्वारा दिए गेर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति के आधार पर मेला कमेटी के द्वारा बालाजी गेर मंडल सेवाली को 11 हजार नकद पुरुस्कार दिया गया। वही संग वादक में हरिराम भील सोफड़ा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। एकल नृत्य में प्रथम स्थान सोमताराम भील मोकलसर और द्वितीय स्थान चतराराम देवासी ने प्राप्त किया। ढोल वादक में अमृतलाल एवं मुकेश कुमार दमामी एवं भजन गायक उत्तम भारती, पुखराज देवासी, रमेशदास वैष्णव, पूंजा भारती को अतिथियो ने पारितोषिक देकर सम्मानित किया गया। मेले में मोकलसर चौकी प्रभारी गोविंदराम भील के निर्देशन में जाप्ते ने व्यवस्था बनाए रखने सहयोग किया ।
मायलावास के लिखमाराम महाराज मंदिर से हरवर्ष की तरह सोनी बाई डीसा के सानिध्य में प्रात:काल में गाजे बाजे के साथ वरघोड़ा निकाला गया। वरगोड़ा गोगाजी चौराहा, रेलवे फाटक होते हुए पहाड़ी की तलहटी पर स्थित चामुंडा माता मंदिर पहुंचा। लाभार्थियों की ओर से मंदिर शिखर पर ध्वजा चढ़ाई गई।
मायलावास. रंगपंचमी के मेले में गेर नृत्य करते कलाकार व ग्रामीण।