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गेर नृतकों ने बिखेरी लोक संस्कृति की छटा, सड़लानाडा में फूलडोल महोत्सव
ग्राम पंचायत लालाणा के श्री सुभद्रा माताजी व मामाजी महाराज का धाम सड़लानाडा पर गादीपति एवं श्री निम्बेश्वर हाथीबंध महादेव मठ खारवा-जेठन्तरी के मठाधिपति महंत भुवनेश्वरपुरी महाराज के सानिध्य में आयोजित फूलडोल महोत्सव में क्षेत्र के गेर नर्तकों ने लोक नृत्य गेर का मनमोहक प्रदर्शन कर ऐसा समां बांधा की मानो सतरंगी इन्द्रधनुष जमीन पर उतर आया हो। फूलडोल महोत्सव के दौरान पारलू, ऊमरलाई, खाखरलाई, मेली, जेठन्तरी, टेडा व मांगला सहित कई गांवों की गेर दलों के कलाकारों ने ढोल की ढमक, थाली की टंकोर, घुंघरूओं की रूणझूण, डांडियों की खनक व फाल्गुनी लोक गीतों की मदमस्त स्वरलहरियों के साथ आंगी-बांगी, डांडिया आदि गेर नर्तकों ने मनभावन प्रस्तुति देकर लोक संस्कृति की अमिट छाप छोडी़।
वहीं सड़लानाडा धाम परिसर में आयोजित धर्मसभा में झूंपा मठ समदडी़ के अष्टकौशल महंत मृत्युंजयपुरी महाराज, कुडी़ मठ के महंत तगभारती महाराज, पाली 72 फीट बालाजी मंदिर के ओमदास महाराज, सूरसागर जोधपुर के परमानन्द महाराज, बीजारणी महादेव के भगवानगिरी महाराज व आकडी़या महादेव जेठंतरी के सोमगिरी महाराज सहित बडी़ संख्या में पहुंचे संत-महात्माओं ने धार्मिक प्रवचन दिए। संतों ने महिलाओं से कहा कि बच्चों में संस्कारों की पहली सीढी़ मां होती है। बच्चे भगवान का रूप होते है, जैसा व्यवहार घर में देखते है, वैसा ही वे अपने जहन में उतारते है। गादीपति एवं मठाधिपति महंत भुवनेश्वरपुरी महाराज ने आगंतुक संत-महात्माओं व गेर दलों का माल्यार्पण कर स्वागत-अभिनन्दन किया। इस दौरान मंदिर पर फूलडोल महोत्सव मनाया गया।
फाग महोत्सव में भजनों पर झूम उठे श्रद्धालु
स्थानीय नदी किनारे संत श्रीहरिदास सर्कल पर पुरानी चोंच मंदिर में महामंडलेश्वर राघवदास महाराज सान्निध्य में शनिवार को सुबह 9 से 11 बजे तक फाग महोत्सव का आयोजन किया गया। स्थानीय कलाकार श्याम पित्ती, नंदलाल, रामू माली, राणाराम माली, वसुंधरा गोयल, राजू ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुतियां दी। साथ ही फूलों से ठाकुरजी संग होली खेली। इस दौरान मांगीलाल माली, भंवरदास संत, बाबूलाल माली, घनश्याम लोहिया, सहित श्रद्धालु मौजूद रहे।
बालोतरा. गेर नृत्य की प्रस्तुति देते कलाकार।