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रामकथा जैसे धार्मिक कार्यक्रम अब मंदिर परिसर में ही होंगे

एक वर्ष पहले
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देवस्थान मंत्री श्री विश्वेन्द्र सिंह ने गुरुवार को विधानसभा में कहा कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए मंदिर परिसर में ही धार्मिक कार्य आयोजित किए जाएंगे। सिंह ने कहा कि बाड़मेर के जसोल में मंदिर के बाहर डोम गिरने की घटना के बाद सुरक्षा की दृष्टि से विभागीय स्तर पर यह निर्णय लिया गया कि किसी भी मंदिर में धार्मिक कार्यों के लिए जिला प्रशासन की अनुमति जरूरी होगी। उन्होंने कहा कि मंदिर के बाहर टैंट लगाकर कार्यक्रम के आयोजन करने से किसी दुर्घटना की आशंका रहती है, ऎसे में कोई भी धार्मिक कार्य मंदिर परिसर में ही आयोजित किए जाएंगे।

इससे पहले विधायक राजेंद्र राठौड़ के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में सिंह ने बताया कि देवस्थान विभाग के अधीन मंदिरों में किसी भी तरह के आयोजन बाबत विभागीय मंदिर की भूमि, भवन के उपयोग बाबत समस्त सहायक आयुक्तों के मार्गदर्शन के लिए एक 5 दिसम्बर, 2019 को परिपत्र जारी किया गया था। उन्होंने बताया कि इस बाबत 16 दिसम्बर, 2019 पुनः समस्त सहायक आयुक्तों को लिखा
गया था।

देवस्थान मंत्री ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में प्रत्यक्ष प्रभार श्रेणी के कुल 365 मंदिर विभाग की देख रेख में संचालित है तथा इन पर वित्तीय वर्ष 2019-20 में 29 फरवरी 2020 तक अड़सठ लाख सत्तावन हजार नौ सौ चवालीस रुपए की राशि पूजा अर्चना व प्रसाद के लिए व्यय की गई है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा प्रबंधित एवं नियंत्रित राजकीय मंदिरों की उत्तरप्रदेश, दिल्ली, उत्तराखण्ड, गुजरात, महाराष्ट्र में स्थित किरायेदारों में पैंतीस लाख इक्यावन हजार आठ सौ सात रुपए बकाया है।

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