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प्रशासन के दखल पर हुई वार्ता, सिंटेक्स प्रबंधन ने कहा-सहमति बन गई, मजदूर नेताओं को बाहरी समर्थन मिला, कहा-आंदोलन तो चलेगा

भास्कर संवाददाता| बांसवाड़ा वेतन वृद्धि से लेकर लंबित मांगों को लेकर सिंटेक्स मिल प्रबंधन और मजदूरों की बैठक...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 03:15 AM IST

भास्कर संवाददाता| बांसवाड़ा

वेतन वृद्धि से लेकर लंबित मांगों को लेकर सिंटेक्स मिल प्रबंधन और मजदूरों की बैठक गुरुवार शाम को प्रशासन की मध्यस्थता में हुई। मुख्य मांग वेतन वृद्धि के बाद एक-एककर चर्चा की गई।

मिल प्रबंधन की ओर से दिए आश्वासनों पर मजदूरों ने असहमति जताई और आंदोलन को जारी रखने का निर्णय लिया। अब सभी मजदूर मकोड़िया पुल पर शुक्रवार सुबह एकत्रित होकर आंदोलन की आगे की रणनीति चर्चा करेंगे। हालांकि बैठक के समाप्त होने के बाद प्रेसिडेंट श्यामसुंदर सजल ने बताया कि वार्ता में कई बिंदुओं पर सहमति बनी हैं, जिससे हड़ताल समाप्त होने के आसार है।

सजल ने वार्ता को सकारात्मक बताया। साथ ही कहा कि कुछ अौर मांगे हैं तो उन्हें भी बैठकर हल कर लिया जाएगा। लेकिन, वार्ता में निकले निर्णय पर मजदूरों के असहमत होने से मिल मालिकों के साथ जिला और पुलिस प्रशासन के लिए राहत नहीं मिल पाई है। मजदूरोंं के प्रतिनिधिमंडल में शामिल मनोहर खड़िया ने बताया कि फिलहाल कोई सहमति नहीं बनने के कारण आंदोलन तो जारी रहेगा। आगे आंदोलन को किस दिशा में ले जाना है, इसके लिए शुक्रवार को सुबह 10 बैठक के बाद ही निर्णय होगा। इस बीच, गुरुवार को सिन्टेक्स मिल के हड़ताल पर चल रहे कार्मिकों के समर्थन में अब छात्र संगठन और संस्थान भी समर्थन में आ गए हैं।

गुरुवार सुबह 10 बजे पहले से तय बैठक के अनुसार श्रमिक और संगठनों के पदाधिकारी मकोड़िया पुल के पास खुले मैदान में एकत्रित हुए। इसमें वक्ताओं ने कहा कि यह समस्या न केवल बांसवाड़ा की है, बल्कि यह समस्या पूरे प्रदेश में बनी हुई है। मिल मालिकों द्वारा कम वेतन पर मजदूरों का शोषण किया जा रहा है, जबकि मिल का संचालन और इन्हीं मजदूरों द्वारा किया जाता है। एसटीएससी छात्र संघ के जिलाध्यक्ष प्रकाश बामनिया ने कहा कि उन्होंने भी मिल में काम किया है, जहां सिर्फ शोषण ही होता हैं। बामनिया ने सिंटेक्स मिल के श्रमिकों की मांगों का समर्थन किया। मनोहर खड़िया ने बैठक में कहा कि कॉलेज के कई छात्र आज मिलों में काम कर रहे हैं, उनकी हितों की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।

मकोड़िया पुल पर आयोजित बैठक में मौजूद श्रमिकों के साथ समर्थक संगठनों के सदस्यों ने की सभा।

मकाेड़िया पुल पर ही वार्ता करने पर अड़े रहे

बैठक के दौरान प्रशासन की ओर तहसीलदार और कोतवाल पहुंचे। मिल प्रबंधन के साथ वार्ता के लिए कलेक्ट्रेट सभागार में आने का न्यौता दिया, लेकिन यहां सभी सभास्थल पर ही वार्ता कराने की मांग पर अड़ गए। आखिर में सीआई को वार्तास्थल का निर्णय सभा के समाप्त होने के बाद करने को कहा। दोपहर 2 बजे आपसी सहमति से वार्ता एसडीओ कार्यालय में करने का निर्णय लिया। दोपहर में पहले प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम डॉ. भंवरलाल और डीएसपी वीराराम के साथ मांगों को विस्तार से समझाया और शाम को प्रशासन की ओर से मिल प्रबंधन को बुलाया गया।

श्रमिकों पर दर्ज किए प्रकरण हटाए जाएं

बैठक के दौरान बांसिया भील संस्थान के अध्यक्ष दिनेश चरपोटा ने कहा कि श्रमिक अपनी वाजिब मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन मिल मालिक उन पर ही केस कर कार्रवाई करा रहे हैं। चरपोटा ने केस को वापस लेने के साथ उनके जब्त किए वाहनों को भी छुड़ाने की मांग रखी। आदिवासी किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष पूर्व राज्यमंत्री दलीचंद मईड़ा ने कहा कि किसान का बेटा होने के नाते खेती और मजदूरी का काम किया है। हमारा गरीब मजदूर भाई तकलीफों में नहीं रहे, इसके लिए हमेशा उनके लिए लड़ाई जारी रहेगी।

वेतन वृद्धि-286 से 295 रुपए किया

मिल प्रबंधन के प्रेसिडेंट श्यामसुंदर सजल, वाइस प्रेसिडेंट दीपक मेनारिया, जनरल मैनेजर जगदीश मोड़ के सामने वार्ता शुरू हुई। मुख्य मांग दैनिक वेतन वृद्धि को लेकर मिल प्रबंधन ने बताया कि मजदूरी 286 से बढ़ाकर 295 रुपए करने की सूचना नोटिस बोर्ड पर लगा दी गई है। यह वृद्धि जनवरी से मिलने लगेगी। इसके साथ ही अन्य मांगों पर भी प्रबंधन ने अपना पक्ष रखा और कहा कि श्रमिक काम पर लौटते हैं तो उन पर किसी भी प्रकार की दुर्भावनापूर्वक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

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