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परीक्षा में अब सत्रांक भी देंगे, डिवीजन बताने के बजाय ग्रेडिंग से होगी मार्किंग

बांसवाड़ा। प्रारंभिक शिक्षा विभाग के आदेशों के विरोधाभास से जिले में शिक्षक घनचक्कर बन रहे हैं। दसवीं-बारहवीं...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:40 AM IST

बांसवाड़ा। प्रारंभिक शिक्षा विभाग के आदेशों के विरोधाभास से जिले में शिक्षक घनचक्कर बन रहे हैं। दसवीं-बारहवीं बोर्ड परीक्षा की तर्ज बताकर पांचवीं की परीक्षा में किए जा रहे प्रयोग से दोहरे मापदंडों का इस्तेमाल हो रहा है, जो शिक्षकों के समझ से भी परे जा रहा है।

विभाग भी इसे जिलास्तर पर बोर्ड परीक्षा नहीं, प्राथमिक शिक्षा अधिगम स्तर मूल्यांकन की संज्ञा दे रहा है, जबकि इस सत्र में सेशनल के 100 अंकों का आधार मानकर 20 अंकों यानी 20 फीसदी अंक की प्रणाली बोर्ड की तर्ज पर ऑनलाइन इंद्राज करने के निर्देश दिए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह भी है कि पढ़ने-लिखने, बोलने, समझने के बिंदुओं के साथ विभिन्न विषयों में कमजोर, बेहतर और आैसत प्रदर्शन पर तीनों स्थिति देखते हुए सत्रांक अंक देने हैं, जबकि रिजल्ट में डिवीजन नहीं आएगा। कॉपियां जांचने के बाद भी अंकों के आधार पर ग्रेडिंग प्रणाली का ही इस्तेमाल होगा। ऐसे में दोहरे सिस्टम की माथापच्ची से शिक्षक भी पशोपेश में है।

पांचवीं बोर्ड के लिए नए नियम

यूं समझंे व्यवस्था और बदलाव को

पहली से पांचवीं तक बच्चों का आकलन ग्रेडिंग के आधार पर करने का नियम है। वर्ष में चार चरणों में सतत आंकलन कर बिना अंक दिए ग्रेडिंग में ए ग्रेड उसे देय है, जिसमें बालक अपनी मर्जी से पढ़कर प्रश्न के उत्तर दे सके। बी ग्रेड तब दी जाती है, जब वह शिक्षक या साथी की मदद से प्रश्न के उत्तर दे पाए, वहीं सी ग्रेड उसके लिए है जो कुछ भी उत्तर नहीं दे पाए। 5वीं बोर्ड करने से आंकलन, मासिक चेक लिस्ट और कक्षा कक्षीय गतिविधियों के आधार पर देय ग्रेड के आधार पर सत्रांक भेजने का प्रावधान किया गया है।

बंद होना चाहिए दोहरा आंकलन

दोहरी व्यवस्था पर शिक्षक विरोध में हैं। 5वीं को बोर्ड परीक्षा करने से बच्चों में भी भय है। इससे सीसीई का उद्देश्य समाप्त हो रहा है। विभाग को दोहरी आंकलन व्यवस्था बंद करनी चाहिए। - गमीरचंद पाटीदार, जिलाध्यक्ष शिक्षक संघ (राष्ट्रीय)

जिले के आधे स्कूलों में बिजली नहीं है। पेपर लेस कामकाज के नाम पर शिक्षकों से सरकार अघोषित रूप से निशुल्क काम लेगी, उचित नहीं है। - अनिल व्यास प्रदेश संयुक्त मंत्री शिक्षक संघ सियाराम

कोई विरोधाभास नहीं है। ग्रेडिंग फार्मूला स्पष्ट है। बच्चों काे परीक्षा देने का सही मायने में अनुभव देने के लिए नई व्यवस्था की है। - शिवजी गौड़, उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा

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