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अब एक इनवाइस पर 50 हजार तक के माल परिवहन पर ई-वे बिल जरूरी नहीं

भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा फरवरी में माल परिवहन पर ई-वे बिल की अनिवार्यता एकबारगी स्थगित होने के बाद राज्य में...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 04:20 AM IST
भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा

फरवरी में माल परिवहन पर ई-वे बिल की अनिवार्यता एकबारगी स्थगित होने के बाद राज्य में यह 1 अप्रैल से लागू हो जाएगा। इसकी पूरी तैयारी हो चुकी है। पहले दिक्कत सर्वर की रही थी। बैंगलुरु से सर्वर नई दिल्ली स्थानान्तरित होकर अपडेड करने के बाद अब वह सफलता से काम कर गया तो व्यवस्था स्थायी हो जाएगी।

इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे प्रयासों के बीच राजस्थान के भीतर दो महीने में इंट्रास्टेट भी लागू ई-वे बिल लागू होने के आसार हैं। इसे लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी गई है। खास बात यह है कि इस बार ई-वे बिल लागू करने से पहले कुछ रियायत की घोषणा हुई है। वाणिज्यक कर अधिकारियों के मुताबिक इसमें 50 हजार रुपए से ऊपर के माल के इंडिविजुअल बिल यानी इनवॉइस पर ही यह लागू होगा। अगर खेप में 20-20 हजार का माल अलग-अलग हैं, तो जोड़ने पर वह एक लाख का भले ही हो जाए, लेकिन उस पर ई-वे की अनिवार्यता नहीं रहेगी, बशर्ते आइटम एक ही नहीं हो। ट्रांसपोर्टर को भी इसकी जरूरत नहीं रहेगी। इसके अलावा रेलवे, रोडवेज और पब्लिक ट्रांसपोर्ट से माल बुक करवाने पर ई-वे बिल नहीं देना होगा। बाद में डिलेवरी लेते समय ई-वे बिल प्रस्तुत करना होगा। इसके बगैर पब्लिक ट्रांसपोर्टर माल नहीं देंगे।

पहला दौर सफलतापूर्वक चलने के बाद इंट्रास्टेट यानी राज्य के भीतर माल परिवहन पर ई-वे बिल लागू किया जाएगा। इसके तहत अलग-अलग राज्यों में तीन फेज में काम होगा। कर्नाटक में ई-सुगम पर यह व्यवस्था लागू है, उसी मॉडल पर कुछ राज्यों में 15 मई तक इसे लागू किया जाएगा। उसके बाद राजस्थान में 1 जून से इसे लागू करने की संभावना है।

जो व्यवसायी एक से दूसरे राज्य के बीच सामान भेजते-बुलाते हैं, उन्हें 1 अप्रैल से माल ढुलाई के दौरान इंटर स्टेट ई-वे बिल लगेगा। यह देशभर में लागू हो रहा है। प्रदेश में माल परिवहन के लिए अभी इंट्रा स्टेट ई-वे बिल जरूरी नहीं है।

31 मार्च का कोई बिल है तो ई-वे बिल

जरूरी नहीं रहेगा।

यह है ई-वे बिल

जीएसटी लागू होने के बाद 50 हजार रुपए या ज्यादा के माल को एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक परमिट साथ रखना अनिवार्य करना निर्धारित किया गया। इसी इलेक्ट्रॉनिक बिल को ही ई-वे बिल कहते हैं, जो जीएसटीएन नेटवर्क के अंतर्गत आता है। ट्रांसपोर्टरों को ई-वे बिल “ई वे बिल डॉट एनआईसी डॉट इन” पर बनाना होगा। जीएसटीइन से वे पंजीकृत किए जा रहे हैं। जो ट्रांसपोर्टर जीएसटी के तहत पंजीकृत नहीं है, उन्हें बिल बनाने के लिए पैन या आधार देकर ई-वे बिल प्रणाली के तहत खुद का नामांकन करेंगे।


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