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3 साल की मासूम को भैंसों ने कुचला,मौत मां बोली-काश उसे अकेला नहीं छोड़ा होता

भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा/गनोड़ा होली की खुमारी अभी उतरी ही नहीं थी कि गनोड़ा में एक परिवार के साथ दर्दनाक घटना...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 07:30 AM IST
भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा/गनोड़ा

होली की खुमारी अभी उतरी ही नहीं थी कि गनोड़ा में एक परिवार के साथ दर्दनाक घटना हो गई। इस परिवार की तीन साल की मासूम जो घर के आगे खेल रही थी, उसे भैंसों ने कुचल कर मार डाला।

शुक्रवार को जो बच्ची हिमानी परिजनों और गांव के छोटे दोस्तों के साथ रंग गुलाल उड़ाकर खुशियां मना रही थी उसे क्या पता था कि यह होली उसकी आखिरी होली होगी। यह घटना गनोड़ा के बुनकर बस्ती के एक श्रमिक परिवार के साथ घटी। गांव में रहने वाले भगवती की 3 साल की बेटी हिमानी शनिवार शाम को 7 बजे अपने ही घर के बाहर खेल रही थी। गांव के पशु चर कर वापस लौट रहे थे। इस बीच हिमानी के पास आते ही दो भैंस आपस में लड़ पड़ी।

अचानक हुए घटनाक्रम से सन्न हिमानी कुछ कर पाती, उससे पहले ही भैंसों ने उसे उठाकर जमीन पर पटक दिया। हिमानी सिर के बल जमीन पर गिरी। इससे उसके सिर में गंभीर चोट लगी। इसके बाद भैंसे उसे कुचलती हुई निकल गई। हिमानी की चीख सुनकर लोग मौके पर पहुंचे, उस समय हिमानी खून से लथपथ पड़ी थी। ग्रामीण तत्काल उसे गनोड़ा सीएचसी ले गए लेकिन जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

हमेशा रहते थे साथ पहली बार अकेला छोड़ा

जब यह हादसा हुआ तो उस दौरान घर पर हिमानी की मां अकेली थी और परिवार के लिए शाम का भोजन बना रही थी। ग्रामीणों ने बताया कि बच्ची का पिता भगवती मजदूरी करता है। वहीं थोड़ी बहुत आय खेती बाड़ी से हो जाता है। हादसे के दौरान पिता खेत में गया था और दादा- दादी होली पर आसपास घरों में मिलने गए हुए थे। हिमानी का भाई अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था। हिमानी पास के एक निजी स्कूल में दो तीन पढ़ने भी जाती थी। मां उसे साथ ही लेकर जाती थी। उसकी मां ने बताया कि छोटी होने के कारण हर समय कोई न कोई उसके साथ ही रहते थे। आज ही उसे अकेला छोड़ा था। अब यह मलाल जिंदगी भर रहेगा कि काश उसे अकेला नहीं छोड़ा होता तो आज हिमानी हमारे बीच होती।

तीन वर्षीय हिमानी

िसर के बल गिरने और कुचलने से घायल हिमानी की जांच करते चिकित्सक।

इधर, बांसवाड़ा में भी हो चुके हैं आवारा पशुओं के कारण कई हादसे, फिर भी कोई सुनता नहीं

पशुओं की लड़ाई हो या कुत्तों का आतंक इनके कारण आमजन के प्रभावित होने की यह कोई पहली घटना नहीं है। गनोड़ा क्षेत्र में पिछले दिनों कई मासूम आवारा कुत्तों के काटने के कारण घायल हो चुके हैं। वहीं इस बार भैंसों की लड़ाई में हिमानी की मौत हो गई। ऐसे हादसे गांवों में ही नहीं शहर में भी हो रहे हैं। करीब दो माह पूर्व बांसवाड़ा शहर के हीराबाग कॉलोनी में भी एक महिला आवारा पशुओं की लड़ाई में चोटिल हो चुकी है। जिसे एमजी अस्पताल में इलाज कराया। उस घटना के बाद कॉलोनी के लोगों ने पार्षद के घर पहुंचकर नाराजगी जताई और समस्या के निराकरण के लिए गुहार लगाई। इन घटनाओं में कई लोगों के घायल होने और मौत हो जाने के बाद भी प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से कोई सख्त कदम नहीं उठाया जा रहा कि लोगों को हमेशा हमेशा के लिए राहत मिले। सब्जी मंडी क्षेत्र में तो आए दिन आवारा पशु लोगों को चोटिल कर रहे हैं।

समाधान : ऐसे खत्म हो सकती है समस्या

आमतौर पर आवारा पशुओं की समस्या का मूल कारण उनके मालिक है। शहर की अधिकतर कॉलोनियों रातीतलाई, मोहन कॉलोनी, बाहुबली कॉलोनी, शारदा कॉलोनी, कर्मिशियल कॉलोनी, शिव कॉलोनी, हाउसिंग बोर्ड, खांदू कॉलोनी में दूध दुहने के बाद मालिक उसे बाहर खुले में छोड़ देता है ताकि दिनभर वह इधर-उधर भटक कर चर सके। शाम को फिर से उन्हें घर लेजाकर दुहते हैं। यह लोग केवल अपनी कमाई के लिए इनका उपयोग करते हैं। शहर में जो भी हादसे हो रहे हैं। उसके लिए यह लोग ही जिम्मेदार है। नगर परिषद और प्रशासन को गलियों, चौराहों और कॉलोनियों में भटक रहे पशुओं को पकड़ कर गोशाला में रखे। पशु को छुड़ाने के लिए जब इनका मालिक आए तो उससे अच्छा-खासा जुर्माना वसूला जाए। इसके बाद भी अगर वह ऐसा करता है तो पशु को जब्तकर गोशाला में ही रखा जाए। आमजन को आवारा पशुओं की सूचना देने के लिए नगर परिषद एक कॉल सेंटर बनाए ताकि सूचना के आधार पर कार्रवाई की जा सके। ऐसा होने पर ही आमजन की जान ही हिफाजत हो सकेगी। नहीं तो गनोड़ा जैसा हादसा बांसवाड़ा में भी होना तय है।