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प्रतीकात्मक रूप से खेली गई पत्थरों की राड़, 10 साल पहले शुरू हुआ था अभियान

होली का त्योहार रंग-बिरंगे रंगों से खेला जाता है, लेकिन जिले के भीलूड़ा गांव में होली के त्योहार के साथ बरसों से चली...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 02:45 AM IST
होली का त्योहार रंग-बिरंगे रंगों से खेला जाता है, लेकिन जिले के भीलूड़ा गांव में होली के त्योहार के साथ बरसों से चली आ रही पत्थरों की राड़ खेलने की परंपरा का इस साल भी निर्वहन किया गया।

पत्थरों की राड़ में जहां हर साल सैकड़ों लोग शामिल होते थे, इस बार संख्या कुछ घट गई, लेकिन वहां जुटे लोगों ने एक-दूसरे पर पत्थर बरसाए।

चीत्कार लगाई और फिर पत्थरों के हमले में जहां हर साल 50 से ज्यादा लोग घायल होते थे, वहीं इस बार की पत्थरों की होली में सिर्फ 8 लोग घायल हुए। यही इसका एक सकारात्मक पहलू है।

रघुनाथजी मंदिर के पास स्थित मैदान पर राड़ के लिए निर्धारित समय 5 बजे से पहले ही कुछ लोग इस परंपरा के तहत प्रतीकात्मक रूप में करने आमने-सामने हाथों से ही पत्थर फेंकने लगे। इसे देखकर कुछ युवा गोफन लहराते हुए मैदान में आ गए।

मैदान के दोनों ओर खेलने वालों को रोककर रखने के लिए तैनात गांव के बड़ लोगों ने उन्हें रोकने का प्रयास भी किया, लेकिन उनके जोश के कारण वह मैदान में आने में सफल हुए। इस कारण करीब आधे घंटे के लिए राड़ खेली गई।

भीलूड़ा में पत्थरों की राड़ पर लोगों की रोक का असर हर साल 50 से ज्यादा घायल होते थे, इस बार 8 ही हुए

राड़ खेलने आई युवाओं की टोली को राेकने के प्रयास होेते रहे

भीलूड़ा. पत्थरों की राड़ खेलते लोग एक-दूसरे पर पत्थर बरसाते हुए।

रंग लाया लोगों का प्रयास, इस बार संख्या घटी

सालों की परंपरा अचानक बंद करना मुश्किल जरूर था लेकिन बड़े लोगों के प्रयास के कारण राड़ खेलने वालों की संख्या करीब 500-600 से सिमटकर 50 हो गई तो दर्शकों की संख्या भी हजारों से सिमटकर सैकड़ों में आ गई। लोग मैदान पर आए थे वह भी यह नजारा देखने आए थे कि क्या वाकई राड़ बंद हो सकती है, क्योंकि 10 सालों से चल रहे यह प्रयास पहले भी फेल हुए थे।

यह हुए जख्मी

राड़ के दौरान 8 जनों का उपचार किया गया। गणेशपुरी के लालशंकर पाटीदार (40), धनजी पाटीदार (50), नीतेश पाटीदार (19), दिलीप पाटीदार (21), नितिन पाटीदार (17), भीलूड़ा के मुकेश जैन (48 ), मोहित जैन (38 ), कमलेश भील, राणीबीली (18 ) को चोट लगने पर इलाज किया गया।

पूर्व मंत्री कनकमल कटारा, पूर्व उपप्रधान नरेंद्र पंड्या सहित समाजों के अध्यक्ष ने इस बार प्रतीकात्मक राड़ को बंद करने इस परंपरा को बंद करने की दिशा में कदम बढ़ाया।

भास्कर रिकॉल

14 वर्षों में 755 घायल

पिछले 14 वर्षों में करीब 755 लोगों को सामान्य से लेकर गंभीर चोटें लग चुकी हैं। वर्ष 2004 में 32 घायल, 2005 में 54, 2006 में 51, 2007 में 60, 2008 में 43, 2009 में 60, 2010 में 51, 2011 में 6 5, 2012 में 46 , 2013 में 44, 2014 में 68, 2015 में 48, 2016 में 81 एवं 2017 में 52 लोग जख्मी हो चुके हैं।

दस वर्ष पूर्व अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश फास्ट ट्रेक दिनेश कुमार गुप्ता ने राड़ को परंपराजन्य अपराध मानते हुए इसे बंद करवाने के आदेश दिए थे। प्रशासन की ग्रामीणों के साथ कई बैठकों का दौर चला था।

80 फीसदी तक मिली सफलता