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दशकों से मंडी बंद, किसानों को 100 किमी दूर दाहोद मंडी में बेचना पड़ रहा अनाज

शहर के समीप कृषि उपज मंडी दशकों से बंद पड़ी है। हमारे किसान अनाज बंपर पैदावार कर रहे हैं लेकिन बेचने के लिए कोई...

Danik Bhaskar | Sep 13, 2018, 02:16 AM IST
शहर के समीप कृषि उपज मंडी दशकों से बंद पड़ी है। हमारे किसान अनाज बंपर पैदावार कर रहे हैं लेकिन बेचने के लिए कोई प्लेटफार्म नहीं है। इसका फायदा बिचौलिए उठा रहे हैं। वे किसानों से मनमाने भाव में अनाज खरीदकर पड़ोसी गुजरात के दाहाेद जिले में बेच मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।

इससे लाइसेंसी व्यापारियों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं मंडी शुल्क के रूप में सरकार को मिलने वाले लाखों के राजस्व की भी चपत लग रही है। बीते सालों में प्रशासन की ओर से मंडी में कारोबार शुरू करने के लिए सख्ती भी की थी और व्यापार भी शुरू कराया, लेकिन यह सख्ती ज्यादा दिनों तक नहीं रही और हालात फिर पहले जैसे ही हो गए। इसी का परिणाम है कि मंडी शुरू करने के लिए अब तक 22 बार प्रयास हुए, लेकिन मंडी में व्यापार शुरू नहीं हो पाया।

25 जून 1987 में प्रशासन ने मंडी को शुरू कराने के लिए सभी प्रकार के कृषि उत्पादों को जिले से बाहर ले जाने पर रोक लगा दी थी। इसके लिए जिले के सभी प्रमुख मार्गों पर चुंगी नाके बना दिए गए और वाहनों की जांच शुरू करा दी गई। जिसके बाद 10 से 12 व्यापारियों ने मंडी में कारोबार भी शुरू किया था लेकिन निगरानी के अभाव और सुविधाओं की कमी के चलते यह व्यवस्था ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाई। प्रशासन की सख्ती के चलते व्यापारियों ने मंडी में पहुंचकर कारोबार किया था लेकिन मंडी सचिव और आला अधिकारी इस सुधार को संभाल नहीं पाए। कुछ समय बाद व्यापारियों ने किसानों और अनाज के मंडी में नहीं आने की शिकायत शुरू कर दी। साथ ही व्यापारी वापस अपनी दुकानों पर जाने की मांग करने लगे। ऐसे में मंडी समिति ने अपने कार्मिकों से एक सर्वे कराया। कार्मिकों ने सर्वे में यह प्रमाणित कर दिया कि किसी भी प्रकार की कृषि जिंस शहर में नहीं आ रही है। ऐसे में मंडी से व्यापारी अपने मूल स्थानों पर लौट गए।

भास्कर लगातार

12 सितंबर, 2018 को प्रकाशित

क्षेत्र के किसान कर रहे अनाज की बंपर पैदावार, लेकिन बेचने के लिए नहीं मिल रहा प्लेटफार्म

गेट पास की व्यवस्था भी फेल हुई

वर्ष 2003 में बांसवाड़ा में कलेक्टर रहे राजीव ठाकुर ने मंडी को शुरू करने के लिए प्रयास किए थे। व्यापारियों से मुलाकात से लेकर गेट पास की व्यवस्थाएं कराई। इससे व्यापारी फिर से मंडी यार्ड में आए और करोबार भी शुरू किया, लेकिन ठाकुर का यहां से तबादला होने के बाद फिर से हालात पहले जैसे हो गए और व्यापारी वापस लौट गए। वर्ष 1987 के बाद में कई बार प्रशासन और मंडी सचिव की ओर से कारोबार शुरू कराने के लिए पहल की गई लेकिन वह भी मूर्त रूप नहीं ले पाई।

खुली नीलामी से किसान को होगा फायदा

मंडी शुरू होने से किसानों को खुली नीलामी में अनाज बिकने से उसका वाजिब दाम मिलेगा। वहीं नियमानुसार मंडी शुल्क या सेवा शुल्क के रूप में ली जाने वाली राशि से सरकार को भी आय होगी। इस रेवेन्यू में से 60 प्रतिशत काश्तकार कल्याण और 40 प्रतिशत मंडी में सुविधाएं बढ़ाने में व्यय किया जात है। जिले में मुख्य फसल के रूप में 2.7 लाख टन गेहूं, 2.50 लाख टन मक्का और 15 हजार टन चना की औसत पैदावार है।

किसान भाइयों को मिलेगा फायदा


मनमाने दाम पर बेचने की मजबूरी