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राज्य के आईएएस टॉपर ने प्रोजेक्टर पर दिए छात्र-छात्राओं को कामयाबी के टिप्स

बांसवाड़ा/बड़ोदिया| शिक्षा संगम कार्यक्रम के तहत सोमवार का दिन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बड़ोदिया के...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:25 AM IST

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    बांसवाड़ा/बड़ोदिया| शिक्षा संगम कार्यक्रम के तहत सोमवार का दिन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बड़ोदिया के छात्र-छात्राओं और अभिभावकों के लिए खास बन गया। इसलिए कि हाल ही में भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में नेशनल लेवल पर 82वीं और राजस्थान स्तर पर टॉपर रहे जैसलमेर निवासी देशलदान चारण ने परीक्षा परिणाम घोषित होने के अवसर पर अभिभावकों की उपस्थिति में बड़ोदिया के कक्षा 11वीं पास बच्चों से प्रोजेक्टर के माध्यम से संवाद किया। उन्होंने बच्चों को न केवल कामयाबी के टिप्स दिए, बल्कि जीवन निर्माण के आधारभूत तत्वों का भी दर्शन कराया। छात्रों के लिए देश की इस प्रतिभा के अनुभव से लाभान्वित होने में उनके मित्र व्याख्याता महिपालसिंह चारण ने एक सेतु की भूमिका निभाई। चारण के पिता जैसलमेर के छोटे से गांव में चाय की दुकान चलाते हैं और उन्होंने कर्ज लेकर अपने बेटे की पढ़ाई कराई और बेटे ने छोटे से गांव से संघर्षमयी परिस्थितियों से निकलकर आईएएस बनने का सपना पूरा किया।

    देशलदान चारण

    शिक्षा संगम कार्यक्रम के तहत बड़ोदिया सीनियर स्कूल में बच्चों और अभिभावकों को बुलाया था, भविष्य निर्माण के तरीके भी बताए

    बड़ोदिया में प्रोजेक्टर पर आईएएस टॉपर का संवाद सुनने अभिभावक।

    बांसवाड़ा/बड़ोदिया| शिक्षा संगम कार्यक्रम के तहत सोमवार का दिन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बड़ोदिया के छात्र-छात्राओं और अभिभावकों के लिए खास बन गया। इसलिए कि हाल ही में भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में नेशनल लेवल पर 82वीं और राजस्थान स्तर पर टॉपर रहे जैसलमेर निवासी देशलदान चारण ने परीक्षा परिणाम घोषित होने के अवसर पर अभिभावकों की उपस्थिति में बड़ोदिया के कक्षा 11वीं पास बच्चों से प्रोजेक्टर के माध्यम से संवाद किया। उन्होंने बच्चों को न केवल कामयाबी के टिप्स दिए, बल्कि जीवन निर्माण के आधारभूत तत्वों का भी दर्शन कराया। छात्रों के लिए देश की इस प्रतिभा के अनुभव से लाभान्वित होने में उनके मित्र व्याख्याता महिपालसिंह चारण ने एक सेतु की भूमिका निभाई। चारण के पिता जैसलमेर के छोटे से गांव में चाय की दुकान चलाते हैं और उन्होंने कर्ज लेकर अपने बेटे की पढ़ाई कराई और बेटे ने छोटे से गांव से संघर्षमयी परिस्थितियों से निकलकर आईएएस बनने का सपना पूरा किया।

    जीवन में सदुपयोग की आदत डालें

    चारण ने विद्यार्थियों को कहा कि जीवन में हमेशा संसाधनों की अल्पता अथवा उनकी अनुपलब्धता पर हतोत्साहित न होकर प्रेरित होते रहें। जीवन में महत्वपूर्ण यह नहीं कि संसाधन कितनी मात्रा में उपलब्ध हैं अपितु महत्वपूर्ण यह है कि उपलब्ध संसाधनों का सदुपयोग करने की हमारी आदत कैसी है। परिस्थितियां हमारी कमजोरी नहीं बल्कि हमारी ताकत बननी चाहिए। सकारात्मक सोच के साथ उन परिस्थितियों में ढलने का प्रयास करना चाहिए। पढ़ाई का अर्थ समाज देश और मानव मात्र के लिए अपने पास उपलब्ध संसाधन ज्ञान और सेवा का सदुपयोग करना है।

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