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मंदसौर की तर्ज पर प्रतापगढ़ मंडी में भी शुरू हुई लहसुन-प्याज की खरीद

कृषि उपज मंडी में सोमवार से मंदसौर मंडी की तर्ज पर लहसुन प्याज की खरीद शुरू हो गई। पहले ही दिन इसके काफी सकारात्मक...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 06:50 AM IST
कृषि उपज मंडी में सोमवार से मंदसौर मंडी की तर्ज पर लहसुन प्याज की खरीद शुरू हो गई। पहले ही दिन इसके काफी सकारात्मक परिणाम सामने आए। नई प्रक्रिया से किसान भी काफी खुश नजर आए। कृषि मंडी सचिव मदनलाल गुर्जर ने बताया कि किसानों ने प्रतापगढ़ मंडी में भी मंदसौर मंडी की तर्ज पर लहसुन और प्याज की खरीद करने की लिखित में मांग की थी। इसके बाद मंडी प्रशासन ने प्रशासनिक अधिकारियों और व्यापारियों से चर्चा कर इसकी शुरुआत करने की बात कही। सभी की सहमति पर इसकी साेमवार को शुरुआत कर दी गई। इसके चलते सुबह 6 बजे कृषि मंडी के पीछे वाले गेट से लहसुन आैर प्याज को लेकर आने वाले किसानों को मंडी में प्रवेश कराया गया। एक घंटे में लगभग 100 ट्रैक्टर यार्ड में माल खाली कर बाहर चले गए। इसके बाद शेष रहे स्थान के लिए भी ट्रैक्टरों को प्रवेश दिया गया। 9.30 बजे गेट को बंद कर नीलामी शुरू करवा दी गई, जो 1 बजे तक लगातार चलती रही। इसके बाद बचे माल की नीलामी दोपहर 2 बजे बाद की गई। नीलामी के साथ ही तुलाई का काम भी शुरू कर दिया गया। इससे किसान भी जल्दी फ्री हो गए।

8 बजे से पहले पूरा माल उठाना होगा

मंडी सचिव गुर्जर ने बताया कि गेट खोलने से पूर्व किसानाें आैर व्यापारियों की बैठक ली गई। इस दौरान किसानों ने भी काफी सकारात्मक रुख दिखाया। इस दौरान यार्ड में आने वाले किसानों को मौके पर ही क्रम से पर्ची दी गई। इसके साथ ही व्यवस्था शुरू करवाने को लेकर सचिव सहित मंडी प्रशासन के कर्मचारी उज्ज्वल जैन और रतनसिंह राजपूत सुबह 5 बजे से ही तैयारियों में लगे रहे। मंडी सचिव ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत व्यापारियों को रात 8 बजे पहले यार्ड से पूरा माल उठाना होगा। इसके बाद यार्ड की सफाई की जाएगी।

नहीं लगा जाम

लहसुन प्याज मंडी का रास्ता पीछे के गेट से कर दिए जाने से मंडी में लगने वाले जाम की समस्या भी नजर नहीं आई। इसके साथ ही ट्रैक्टरों के माल खाली करने के साथ ही बाहर चले जाने से व्यापरियों को भी माल उठाने में काफी आसानी रही। पूर्व में किसानों के ट्रैक्टर मंडी में ही खड़े कर दिए जाने से थोड़ी-थोड़ी देर में जाम लग जाता था। इससे मंडी प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ती थी।