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मंत्री की घोषणा के दो साल बाद भी नहीं बढ़ी बैड की संख्या

जिले के सबसे बड़े उपखंड मुख्यालय के जयचंद्र मोहिल रेफरल चिकित्सालय में सुविधाओं की कमी और विशेषज्ञों के अभाव में...

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 06:25 AM IST
मंत्री की घोषणा के दो साल बाद भी नहीं बढ़ी बैड की संख्या
जिले के सबसे बड़े उपखंड मुख्यालय के जयचंद्र मोहिल रेफरल चिकित्सालय में सुविधाओं की कमी और विशेषज्ञों के अभाव में मरीज आए दिन रैफर हो रहे हैं। क्षेत्र के लोगों ने कई बार इस अस्पताल में बेड की संख्या और विशेषज्ञ चिकित्सक लगाने की मांग को लेकर मंत्रियों को ज्ञापन भी दिए। तत्कालीन चिकित्सा मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ ने दो साल पूर्व इस अस्पताल में बैड की संख्या बढ़ाने की घोषणा भी की थी, लेकिन आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। जिसका खमियाजा इस क्षेत्र के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

छोटीसादड़ी के रैफरल अस्पताल में एक साल में डेढ़ लाख से अधिक मरीज अपना इलाज कराने आते हैं, लेकिन उनके चेहरे पर उस वक्त मायूसी छा जाती है, जब डॉक्टर उन्हें बीमारी का इलाज यहां नहीं होने की बात कहकर अन्यत्र अस्पताल में उपचार कराने की सलाह देते हैं। रात के समय तो यह चिकित्सालय राम भरोसे ही रहता है। रात में अगर गंभीर रोगी या हादसे में घायल यहां पहुंच जाता है, तो उसको डाक्टर के आने का इंतजार करना पड़ता है। डॉक्टर अगर पहुंच भी जाए तो घटना, दुर्घटना में घायल को यहां केवल प्राथमिक उपचार देकर रैफर कर दिया जाता है। वर्तमान में यह चिकित्सालय 30 बैड का है। यहां प्रतिदिन विभिन्न रोगों के निवारण के लिए 500 से ज्यादा मरीज आते हैं। साथ ही 150 से ज्यादा प्रसव भी होते हैं। मरीजों को यहां एनबीएसयू, एमटीसी, टेलीमेडिसीन, भामाशाह योजना का लाभ तो मिल रहा है, लेकिन यहां विशेषज्ञों की सेवाएं नहीं होने से घटना, दुर्घटना और अन्य गंभीर रोग के मरीजों को प्रतापगढ़, चितौडग़ढ़, उदयपुर या अन्य जगहों पर रैफर किया जाता है। जिससे उनको शारीरिक, आर्थिक और मानसिक परेशानी भी उठानी पड़ती है।

छोटीसादड़ी. सरकारी अस्पताल में मरीजों से भरे हुए बैड।

लंबे समय से हो रही मांग : पिछले वर्षों में क्षेत्र में हुए विभिन्न हादसों और घटनाओं के बाद नगर सहित क्षेत्र के लोगों ने चिकित्सालय में सुविधाओं को बढ़ाने, विशेषज्ञों को लगाने और इस चिकित्सालय को रेफरल चिकित्सालय से सेटेलाइट चिकित्सालय में बदलने की मांग की जा रही है। इस समस्या के निदान के लिये कई बार लोगों ने उच्चाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी ज्ञापन दिए, लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मंत्री राठौड़ ने भी की थी घोषणा

रेफरल अस्पताल में 18 दिसंबर 2015 को सोनोग्राफी मशीन और अन्य कार्यों का लोकार्पण करने पहुंचे तत्कालीन चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने लोगों की ओर से सौंपे गए विभिन्न ज्ञापनों के बाद अप्रैल 2016 तक इस चिकित्सालय को निंबाहेड़ा छोटीसादड़ी विधायक और वर्तमान में यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी के सहयोग से सौ बैड का करवाने की घोषणा की थी, लेकिन दो साल गुजर जाने के बाद भी अभी तक यह पचास बेड का अस्पताल भी नहीं बन पाया है।

वर्तमान में ये चिकित्सक दे रहे हैं सेवाएं

चिकित्सालय में स्त्री रोग विशेषज्ञ, दंत चिकित्सक, वरिष्ठ सर्जन एवं मेडिसिन के वरिष्ठ चिकित्सक और चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। यहां कोई पद रिक्त नहीं है। इसके अलावा 3 एएनएम, 4 नर्सिंग स्टॉफ, 2 प्रयोगशाला सहायक कार्यरत है। एक्सरे का पद रिक्त है। अगर सरकार इसको 50 बैड का चिकित्सालय क्रमोन्नत करती है, तो 4 एएनएम, 6 जीएनएम और अन्य स्टॉफ की पूर्ति हो जाएगी। इससे मरीजों को अन्य रैफर नहीं करना पड़ेगा।

चार सौ से ज्यादा मरीज हुए रेफर : चिकित्सालय में एक साल के आंकड़ों पर नजर डाले तो एक साल में यहां विभिन्न रोगों और दुर्घटनाओं में चार हजार छह रोगी उपचार कराने पहुंचे थे। विशेषज्ञों के अभाव में वर्तमान में कार्यरत चिकित्सकों ने चार सौ ग्यारह मरीजों को अन्यत्र रैफर कर दिया। इनमें से कई मरीजों ने तो यहां से रैफर होने के बाद रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

सरकार ने विकास ही ओर ध्यान नहीं दिया





एक साल का आउटडोर आंकड़ा

अप्रैल 2017 में 421 भर्ती, 39 रैफर

मई में 407 रैफर 40

जून में 209 रैफर 41

जुलाई में 250 रैफर 22

अगस्त में 450 रैफर 40

सितंबर में 382 रैफर 33

अक्टूबर में 326 रैफर 43

नवंबर में 219 रैफर 34

दिसंबर में 211 रैफर 34

जनवरी 2018 में 233 रैफर 30

फरवरी में 340 रैफर 26

मार्च में 468 रैफर 29

प्रसूती ग्रह का यह है आंकड़ा

मई में 109 रैफर 7

जून में 103 रैफर 5

जुलाई 95 रैफर 3

अगस्त 128 रैफर 4

सितंबर 99 रैफर 03

अक्टूबर में 121 रैफर 5

नवंबर 113 रैफर 3

दिसंबर 103 रैफर 2

जनवरी 2018,118 रैफर 3

फरवरी 82 रैफर 2

मार्च में 91 रेफर 1

अप्रैल 00 रैफर 81 2

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