ऐ री सखी मोरे पिया घर आए : जुनैद सुल्तानी

Banswara News - बांसवाड़ा| सूफी बिस्मिल नक्शबंदी साहब द्वारा स्थापित खानकाह सभागार में बज़्मे सूफ़ी कल्चर संस्था के तत्वावधान में...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 07:00 AM IST
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बांसवाड़ा| सूफी बिस्मिल नक्शबंदी साहब द्वारा स्थापित खानकाह सभागार में बज़्मे सूफ़ी कल्चर संस्था के तत्वावधान में आध्यात्मिक गोष्ठी हुई। इसमें प्रख्यात सूफियाना कव्वाली गायक जुनैद सुल्तानी ( सुल्तानपुर ) ने कहा कि बुजुर्गों की सलाहियत में हर इंसान का मकसद प्रेम से भरपूर इंसानियत ही होना चाहिए। कव्वाल जुनैद ने “ ऐ री सखी मोरे पिया घर आए , भाग जगे इस आंगन के “ सूफ़ियाना प्रस्तुति की और बताया कि वे डेढ़ दशक बाद पुनः दूसरी बार बुजुर्ग बिस्मिल नक्शबंदी साहब की बारगाह में हाजिरी देकर रुहानी सुकून और तस्कीन महसूस कर रहे हैं। अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार हरीश आचार्य ने “वो जीवन की नई भोर थी जब तुम आए थे मिलने, वो शाम ही कुछ और थी जब तुम आए थे मिलने “ गुनगुनाते हुए कहा कि अहं ब्रह्मास्मि और अनलहक की बुलंदी पर ही सूफ़ीवाद का आविर्भाव हुआ है। विशिष्ट अतिथि गायक वीरेंद्र सिंह राव ने कहा कि प्रेम जब पराकाष्ठा की महाअवस्था में पहुंचता है तब सूफ़ियाना फूल महकने लगते हैं। नागदा (म.प्र.) से आए अतिथि मोईन गुमनामी ने कहा कि कव्वाली और भजन की गंगा-जमनी परम्परा ने देश की एकता को बनाए रखा है। बिस्मिल घराने के तरन्नुमी प्रतिनिधि शायर एजाज़ अकमल ने सत्य के आग्रह को जीवन की प्रामाणिकता बताते हुए अशआर पेश किए “ जाने किस बात पे इल्ज़ाम दिए लोगों ने, बाख़ुदा सच के सिवा मैंने कहा कुछ भी नहीं”। अन्वेषणधर्मी भंवर गर्ग ‘मधुकर’ ने बीज का महत्त्व प्रतिपादित करते हुए “ जब भी मुझको फेंका गया बेकार समझकर, बीज-सी फ़ितरत लिए उग आया फलदार बनकर “ उदगार व्यक्त किए। बज़्मे सूफ़ी कल्चर संयोजक और समारोह के सूत्रधार शायर सिराज नूर चिश्ती ने संस्था की पिछले डेढ़ दशक की सांस्कृतिक, साहित्यिक और सामाजिक सरोकार से ओतप्रोत उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए अपनी प्रतिबद्धता को यूं संकल्पित किया “ मठों से प्यार, मोहब्बत है ख़ानक़ाहों से ...अमन के फूल खिलेंगे इन्हीं जगाहों से “। स्वागत-अभिननन्दनार्थ आयोज्य गोष्ठी में मेहबूब मंसूरी, फारुख अली, सैय्यद रशीद, रफीक भाई और जमील भाई ने भी सहभागिता की।

खानकाह पर आध्यात्मिक गोष्ठी में कव्वाल का सम्मान करते कवि-शायर।

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