तप करने से आत्मा की शुद्धि के साथ ही कर्मों की निर्जरा भी होती है : मुनि समता सागरजी

Banswara News - घाटोल मुनि समता सागरजी महाराज और एेलक निश्चय सागरजी महाराज के सानिध्य में पर्युषण महापर्व एवं संस्कार शिविर में 50...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 08:30 AM IST
Ghatol News - rajasthan news along with the purification of the soul by performing austerities deeds are also destroyed muni samata sagar
घाटोल मुनि समता सागरजी महाराज और एेलक निश्चय सागरजी महाराज के सानिध्य में पर्युषण महापर्व एवं संस्कार शिविर में 50 से अधिक श्रद्धालुओं ने दस-दस उपवास कर अपने तप से पूरी नगरी को तपोभूमि में परिवर्तित कर कस्बे को अतिशय युक्त एवं चमत्कारी रूप से देवी शक्तियों में विश्वास करने पर मजबूर कर दिया। वहीं संस्कार शिविर में जहां 16 साल के युवा से लेकर 80 साल वृद्ध ने भी जहां उपवास धारण कर सबको अचंभित किया।

दस दिन तक बिना अन्न एवं केवल मात्र 24 घंटे में एक समय जल ग्रहण कर अपने मन मस्तिष्क को किस तरह से नियंत्रित किया एवं अपने आत्मा को किस तरह विकसित किया यह केवल उपवास धारी ही जानता है। तप की आराधना से मन वचन एवं काय की शुद्धि होती है। वहीं उपवास धारण करने के संबंध में मुनि श्री समता सागरजी महाराज ने बताया कि जैन दर्शन के अनुसार व्रतों एवं तपों को बहुत आवश्यक माना गया है। जो इंसान उपवास धारण करता है वह स्वयं उसकी आत्मा के समीप रहता है जहां व्रत एवं तप करने से हमारे आत्मा की शुद्धि एवं पवित्रता बढ़ती है वहीं हमारे कर्मों की निर्जरा भी होती है और जैन दर्शन में संयम तप और त्याग के माध्यम से आत्मा पूर्ण शुद्धता को प्राप्त करती है। शिविर में कई युवा तो ऐसे हैं जिन्होंने पहली बार 10 उपवास धारण किए। कोटा के कोचिंग सेंटर में अध्ययनरत मंथन पुत्र शीतल दोषी पर्व के 2 दिन पहले आए और मुनि श्री के सानिध्य और वात्सल्य पाकर उपवास कर लिया जो पहले एक से शुरुआत की फिर मन के दृढ़ निश्चय से 10 उपवास पूरे किए। वहीं महाराष्ट्र के यवतमाल से आए श्रद्धालु 80 वर्षीय आदिनाथ कहते है कि पिछले 39 साल से प्रत्येक पर्युषण पर्व पर 10 उपवास करते हैं। वहीं शिविर में जो युवा जो 15 से 18 साल के हैं, उन्होंने पहली बार 10 उपवास धारण किए और 15 से अधिक पुरुष दूसरी से तीसरी बार उपवास धारण किया। 35 से अधिक महिलाओं ने किसी ने 7 साल तो कोई 9 साल से लगातार उपवास करते आ रहे हैं।

घाटाेल. उपवास धारी शिविरार्थियों काे पारणा कराते समाजजन।

ओम ध्वनि के स्वर के साथ माैन खोला, परिजनों ने कराया पारण

परतापुर| निवासी संजय दोसी अाैर उनकी धर्म प|ी मैना दोसी के उपवास पूर्ण होने पर पारणा कराया गया। सबसे पहले अभिषेक पूजन के उपरांत संजय दोसी ने बड़ी संख्या में उपस्थित समाजजन के बीच ओमकार की प्रथम ध्वनि के साथ मोन का समापन किया। जिसके उपरांत णमोकार मंत्र बोला गया तथा सबको जय जिनेन्द्र करते हुए क्षमा याचना की। दोसी दंपती को सबसे पहले उनके माता नीरा देवी दोसी अाैर पिता नथमल दोसी ने पारणा कराया। साथ में पुत्र चिंतन दोसी अाैर मुक्ति दोसी ने भी पारणा कराया। सभी लोगों ने पारणा कराते हुए रात्रि भोजन के त्याग का नियम लिया।

भास्कर संवाददाता|घाटोल

घाटोल मुनि समता सागरजी महाराज और एेलक निश्चय सागरजी महाराज के सानिध्य में पर्युषण महापर्व एवं संस्कार शिविर में 50 से अधिक श्रद्धालुओं ने दस-दस उपवास कर अपने तप से पूरी नगरी को तपोभूमि में परिवर्तित कर कस्बे को अतिशय युक्त एवं चमत्कारी रूप से देवी शक्तियों में विश्वास करने पर मजबूर कर दिया। वहीं संस्कार शिविर में जहां 16 साल के युवा से लेकर 80 साल वृद्ध ने भी जहां उपवास धारण कर सबको अचंभित किया।

दस दिन तक बिना अन्न एवं केवल मात्र 24 घंटे में एक समय जल ग्रहण कर अपने मन मस्तिष्क को किस तरह से नियंत्रित किया एवं अपने आत्मा को किस तरह विकसित किया यह केवल उपवास धारी ही जानता है। तप की आराधना से मन वचन एवं काय की शुद्धि होती है। वहीं उपवास धारण करने के संबंध में मुनि श्री समता सागरजी महाराज ने बताया कि जैन दर्शन के अनुसार व्रतों एवं तपों को बहुत आवश्यक माना गया है। जो इंसान उपवास धारण करता है वह स्वयं उसकी आत्मा के समीप रहता है जहां व्रत एवं तप करने से हमारे आत्मा की शुद्धि एवं पवित्रता बढ़ती है वहीं हमारे कर्मों की निर्जरा भी होती है और जैन दर्शन में संयम तप और त्याग के माध्यम से आत्मा पूर्ण शुद्धता को प्राप्त करती है। शिविर में कई युवा तो ऐसे हैं जिन्होंने पहली बार 10 उपवास धारण किए। कोटा के कोचिंग सेंटर में अध्ययनरत मंथन पुत्र शीतल दोषी पर्व के 2 दिन पहले आए और मुनि श्री के सानिध्य और वात्सल्य पाकर उपवास कर लिया जो पहले एक से शुरुआत की फिर मन के दृढ़ निश्चय से 10 उपवास पूरे किए। वहीं महाराष्ट्र के यवतमाल से आए श्रद्धालु 80 वर्षीय आदिनाथ कहते है कि पिछले 39 साल से प्रत्येक पर्युषण पर्व पर 10 उपवास करते हैं। वहीं शिविर में जो युवा जो 15 से 18 साल के हैं, उन्होंने पहली बार 10 उपवास धारण किए और 15 से अधिक पुरुष दूसरी से तीसरी बार उपवास धारण किया। 35 से अधिक महिलाओं ने किसी ने 7 साल तो कोई 9 साल से लगातार उपवास करते आ रहे हैं।

पारणा महोत्सव के साथ शिविर संपन्न

दस दिवसीय संस्कार शिविर और पर्युषण महापर्व का समापन शुक्रवार को उपवास धारियों के पारणा महोत्सव के साथ संपन्न हुआ समस्त उपवास धारियों का पारणा कराने का सौभाग्य अहिंसा ग्रुप के दीपक मुंगाणिया, विपिन सेठ, निर्मल मूंगाणिया, मनोज सेठ, हीरालाल उकावत, विशेष सेठ, हितेश सेठ, रतनपाल कोठारी, तरुण जोधावत, संदीप भुता, मनीष कोठारी, आशीष कोठारी, महावीर जैन, युवा संगठन के अध्यक्ष नीतेश घाटलिया के परिवार को प्राप्त हुआ जिन्होंने समस्त उपवास धारियों काे पारणा करवाया। मंदिर प्रांगण में पूजा पाठ नित्य नियम अभिषेक के बाद धर्म सभा में महाराष्ट्र कर्नाटक मध्य प्रदेश गुजरात एवं वागड़ से आए समस्त शिविरार्थियों सम्मान किया गया। मुनि त्यागी कमेटी के अध्यक्ष अजीत लालावत, मंत्री दीपक मुंगणिया के साथ ही नगर अध्यक्ष राजमल सेठ महिला मंडल अध्यक्ष वसुंधरा जोधावत, मंजुला सरिया, प्रीति वगेरिया, आदिनाथ मंदिर कमेटी के अध्यक्ष अजीत मुंगाणिया के साथ ही नगर के धर्म प्रेमी जन उपस्थित थे।

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