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शव आरोपी के घर ले जाने पर अड़ी भीड़, पत्थर फेंके, एंबुलेंस के आगे लेटी महिलाएं, पुलिस ने हवाई फायर और आंसू गैस से खदेड़ा

Banswara News - नवागांव. शहर से 15 किमी दूर आंबापुरा के केसरपुरा के खड़देव में युवक की मौत के बाद महिलाओं को आगे कर ग्रामीणों ने पीछे...

Oct 13, 2019, 06:31 AM IST
नवागांव. शहर से 15 किमी दूर आंबापुरा के केसरपुरा के खड़देव में युवक की मौत के बाद महिलाओं को आगे कर ग्रामीणों ने पीछे से पुलिस पर पत्थर फेंके।

विश्राम को सरिए से मारा था, चार दिन बाद दम तोड़ा, 3 आरोपी पकड़े

छोटी बदरेल में 8 अक्टूबर की रात 11 बजे दशहरा कार्यक्रम चल रहा था। विश्राम उसके साथी राजेश मईड़ा, विनोद, संजय उर्फ कालू, अनिल के साथ रावण दहन देखने गया। जहां उनका गामदा निवासी 6-7 अन्य जनों से किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया। जिसमें विश्राम और राजेश दोनों के साथ लट्ठ से मारपीट की गई। हमले से विश्राम घायल हो गया। जिसे गंभीर हाल में एमजी अस्पताल लाया गया। हालत नाजुक होने पर उदयपुर रैफर कर दिया गया। जहां उपचार के दौरान शुक्रवार विश्राम ने दम तोड़ दिया। विश्राम के भाई मुकेश के अनुसार उसके भाई विश्राम और राजेश को लोहे के सरिये से सिर पर मारने से सिर फट गया था। पुलिस ने राजेश की रिपोर्ट पर 3 जनों के खिलाफ नामजद और 7 अन्य के खिलाफ केस दर्ज कर किया है।

नवागांव. पथराव के बाद तैनात पुलिसबल और सड़क पर पड़े पत्थर।

छावनी में तब्दील खड़देव, अंतिम संस्कार आज: पथराव के कारण रात को भी भारी पुलिसबल तैनात रहा। परिजनों से समझाइश के बाद रात को ही शव रात को 10 बजे मृतक के घर पहुंचा दिया गया। रविवार को सुबह पुलिस की मौजूदगी में अंतिम संस्कार होगा। इधर, पथराव से 10 से 15 पुलिसकर्मी चोटिल हुए हैं। जिनका मेडिकल करवाया जाएगा।

आंखों देखी... मुझे कहा- शव को आरोपियों के घर ले आओ, नहीं तो मार डालेंगे: एंबुलेंसकर्मी

विश्राम की मौत पर सुबह 6 बजे परिजनों ने शव ले जाने के लिए एंबुलेंस मांगी। बांसवाड़ा आने पर परिजनों ने पटाखे खरीदने की बात कही। बोला- रिवाज है इसलिए खरीदने पड़ेंगे। कुंडला टोल नाके पर रुके। कुछ पुलिसकर्मी भी साथ हो गए। गांव जाकर देखा तो भीड़ लगी थी। मेरी एंबुलेंस को मृतक के घर नहीं जाने दिया गया। कुछ महिलाएं मेरी गाड़ी के आगे लेट गई। भीड़ में से कुछ जनों ने मुझे शव आरोपियों के घर ले जाने के लिए कहा। बोल रहे थे कि आरोपी के घर शव ले जाकर सिरा गाढ़ेंगे इसके बाद लौटेंगे। ऐसा नहीं करने पर जान से मारने की धमकी दी। अंधेरा होते ही पथराव हो गया। पॉवर विंडो होने पर मैंने कांच चढ़ा दिए लेकिन पत्थर लगने से टूट गए। पत्थर शव पर भी पड़े। कुछ लोगों के हाथों में जलती मशाल देख मैं घबरा गया और किसी तरह शव सहित एंबुलेंस लेकर बांसवाड़ा आ गया। अगर मैं वहा थोड़ी देर और रुकता तो शायद वाहन को आग लगा देते। (जैसा कि विश्राम के शव को लाने वाले एंबुलेंस चालक शाकिर हुसैन ने बताया)

एंबुलेंस और तहसीलदार की गाड़ी के कांच फोड़े

भीड़ द्वारा फोड़े गए वाहनों के कांच।

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