मुनिश्री का आह्वान- दिगंबर और श्वेतांबर जैन समाज का क्षमावाणी महोत्सव सामूहिक मनाएं

Banswara News - अनेक नदियों के मिलने से सागर बनता है, उसी प्रकार अनेक जातियों के मिलने से समाज बनता है। समाज वह जिसमें एकता और आपसी...

Sep 14, 2019, 07:05 AM IST
Banswara News - rajasthan news call of munishree celebrate the kumbavani festival of digambara and shwetambar jain samaj collectively
अनेक नदियों के मिलने से सागर बनता है, उसी प्रकार अनेक जातियों के मिलने से समाज बनता है। समाज वह जिसमें एकता और आपसी मिलन सरिता हो। यह विचार क्रांतिवीर मुनि प्रतीक सागरजी ने शुक्रवार काे बाहुबली काॅलाेनी के मांगलिक भवन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि दिगंबर और श्वेतांबर दो संप्रदाय हैं, मगर धर्म तो एक ही जैन धर्म हैं। समाज में मतभेद भले ही रहे लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए। मुनिश्री ने 10 दिन से उपवास कर रहे तपस्वियों के सामूहिक पारणा महोत्सव में कहा कि महावीर जयंती और क्षमावाणी दोनों संप्रदाय की एक साथ मनाई जानी चाहिए। श्वेतांबर के 8 और दिगंबर के 10 दिन के पर्युषण पर्व यानि 18 दिन के पर्युषण पर्व महोत्सव पूरे होने पर क्षमावाणी महोत्सव मनाया जाना चाहिए। जिससे जैन एकता का संदेश जन जन तक पहुंचे। मुनिश्री ने आगे कहा कि एकता से बड़ी कोई ताकत नहीं होती है। जैन समाज को समस्त मतभेदों को मिटाकर एक होकर रहना चाहिए। दिगंबर और श्वेतांबर जैन धर्म की दो आंखें हैं। कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों द्वारा आचार्य शांति सागर महाराज व आचार्य पुष्पदंतसागर महाराज के चित्र का अनावरण किया। वहीं मुनिश्री का पादप्रक्षालन 10 उपवास कर रहे तपस्वी हेमंत सेठ, पूर्णिमा जैन ने किया। समिति द्वारा तपस्वियों का अभिनंदन पत्र प्रदान कर सम्मान किया गया।

बांसवाड़ा. मुनि के पाद प्रक्षालन करते श्रावक-श्राविकाएं।

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