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300 हैक्टेयर में सिंचाई के लिए 11 करोड़ में बना दिया बांध, नहरंे बनाना ही भूल गए

एक वर्ष पहले
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चौरासी विधानसभा के पीठ क्षेत्र में 300 हैक्टेयर में फैले खेत भरपूर पानी होने के बाद भी सूखे हैं। हैरानी की बात है कि सरकार ने किसानों के खेतों को सरसब्ज करने के लिए बांध तक बना दिया। इस काम पर 11 करोड़ रुपए भी खर्च कर दिए। इसके बाद भी खेतों को पानी का इंतजार है। इस क्षेत्र में किसानों की परेशानी को देखते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्ष 2012 मे बजट घोषणा के तहत चौरासी विधानसभा क्षेत्र में वारंदा सिंचाई परियोजना के लिए 11 करोड़ रुपए की राशि जारी की थी। इसके बाद 2016 में बांध बनाने का काम पूरा हुआ। कुछ क्षेत्र में नहरों का काम भी हुआ लेिकन इसी बीच बजट खत्म हो गया। इसके साथ ही यह प्रोजेक्ट थम चुका है।

40 सालों से किसान कर रहे थेमांग : इस क्षेत्र के किसान पिछले 40 सालों से सिंचाई के लिए किसी परियोजना की मांग करते आ रहे थे। उसी को देखते हुए कांग्रेस सरकार ने 2012 में वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति जारी की। वर्ष 2013 में इसका शिलान्यास कर वारंदा बांध का निर्माण कार्य शुरू हुआ।

निर्माण पर सवाल : समतल भाग में नहर नहीं बनाई, ऊंचाई वाले में कर दिया निर्माण

नहरों के माध्यम से सिंचाई का पानी किसानों के खेत तक पहुंचाने के लिए वर्ष 2016 से 2018 तक नहरों का निर्माण का कार्य चला। इसके बाद बजट खत्म होते ही नहरों का निर्माण कार्य रुक गया। समतल भाग वाले क्षेत्र में नहर का निर्माण नहीं किया गया। वहीं ऊंचाई वाले भाग के लिए नहर का निर्माण किया गया। 11 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च करने के बाद किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पाया है।

यह दिखाए थे किसानों को सपने : वारंदा सिंचाई परियोजना से पीठ क्षेत्र की करीब 300 हैक्टेयर जमीन सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया था। इसमें बांध में कुल 58 एमसीएफटी की भराव क्षमता रखी गई थी। इस योजना में दाई नहर करीब 3.4 किलोमीटर और बाई नहर 5.5 किलोमीटर थी। नहर में समय पर बजट नहीं मिलने के कारण लागत बढ़ गई। इसके बाद काम ठप हो गया।

आधी कच्ची-आधी पक्की नहर बना दी

जोरावरपुरा गांव के जगदीश डामोर ने बताया कि सिंचाई करना तो दूर यहां नहर का कार्य ही बाकी है। गांव में कांतिलाल डामोर के घर के पास ही नहर बनाई गई है। ग्रामीणों ने बताया कि नहर रतना दोला डामोर के घर तक बनानी थी लेकिन आधे भाग में नहर बनाई गई और आधे भाग में कच्ची नजर है।

नहरों में पानी छोड़ा, खेतों तक नहीं आया

नई बस्ती पीठ निवासी किसान हुका ननोमा ने बताया कि 2017-18 में सिंचाई के लिये पानी छोड़ा गया था लेकिन फुदडी फला पक्की नहर तक ही पानी आया उससे आगे कच्ची नहर में पानी ही नही चढ़ा। पीठ फुदडी फला नईबस्ती, नई कॉलोनी स्थित क्षेत्रों में 200 से ऊपर किसानों की 350 बीघा जमीन सिंचाई से वंचित है।

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वारंदा सिंचाई परियोजना में बांध बनने के बाद कच्ची नहर का निर्माण हुआ था। वहीं नहरों के पक्के निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजे है। पक्का निर्माण होने के बाद किसानों को दोहरा लाभ मिलेगा।
-गोविंद सिंह राठौड़, एक्सईएन, सिंचाई विभाग, डूंगरपुर

पीठ.वारंदा बांध ने निकलने वाली नहरों पर कैसा काम हुआ, उसकी हकीकत बयां करती यह तस्वीर।

भास्कर
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