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भगवान बालमुकुंद पर फूलों की बारिश, भक्तों ने की पधरावनी

एक वर्ष पहले
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शहर के किशनपोल तेलीवाड़ा स्थित बालमुकुंद चौक पर शनिवार को रंग पंचमी पर बालमुुकुंद गणेश मंडल तेली समाज की ओर से फागोत्सव मनाया गया। रात को भक्तों ने भगवान बालमुकुंद पर 150 किलो गुलाब के फूलों और 100 किलो अबीर गुलाल की बारिश कर पधरावनी की। पांडाल में जैसे ही भगवान बालमुकुंद की पधरावनी की गई तो भक्त भाव विभोर होकर जयकारे लगाने लगे। श्रद्धालुओं ने देररात तक फाग गीत गाए और भक्ति नृत्य किया। लालीवाव मठाधीश हरिओमशरण दास महाराज के सानिध्य में श्री राधावल्लभ मंडल और बाल मुकुंद गणेश मंडल द्वारा शनिवार को जैसे ही बाल मुकुंद फागोत्सव की शुरुआत की तो जयकारे गूंज उठे। दीप प्रज्ज्वलन, गणेश वंदना अाैर सुमिरन करु पहले गजानंद काे सुमिरन करु के भजन के साथ फागोत्सव शुरू किया। श्री राधा वल्लभ मंडल के सदस्यों ने फाग गीतों और भजनों की शुरुआत की। सदस्यों ने मारों खो गयो नवलखा हार ओ रसिया होरी में, रंग भरी रंग भरी रंग सु भरी, होरी आई होरी आई रंग सु भरी’, आज बिरज में होरी रे रसिया, होरी के रसिया, तेरे नैनो में मारी पिचकारी, होरी खेलने आए बालमुकुन्द, भरोसा आपका गुरुदेव संभालों ना करो देरी, साथ अगर गुरुवर का हो तो नाम और इज्जत क्या मांगे, होरी खेले नन्दलाला बिरज में नन्दलाला, राधे श्याम सपनों में आये, बालमुकुन्द तेरा ऐसान होगा तेरा ऐसान होगा, दिगम्बर खेले मसाने मे होरी आदि भजनों की प्रस्तुति दी तो बच्चों और युवाओं के साथ साथ महिला पुरुष भाव विभोर होकर खूब नाचे। भक्तों ने भगवान संग फूलों और गुलाल से होली खेली। साथ ही ईत्र और होरी भजनों ने भगवान बालमुकुंद को रिझाया गया। मंदिर में भगवान बालमुकुंद का मनोहारी शृंगार किया, जो आकर्षण का केंद्र रहा। गुलाब के फूलों की खुश्बू से सारा वातावरण भक्तिमय हो गया। हर भक्त ने बालमुकुन्द के दरबार में गुलाब के फूलों की पत्तियों के साथ होली खेलते हुए भजनों में रमकर नाचते रहे। उन्होंने बताया यहां आकर ऐसा लगा जैसे गोकुल वंृदावन में बैठे हों। फाग भजनों के बाद देर रात 12.15 बजे भगवानश्री को ‘‘ऐ तमे जमवा पधारो मारा लाल’’ भोग लगाया गया। इसके बाद महाआरती की गई।

में होरी रे रसिया, होरी के रसिया, तेरे नैनो में मारी पिचकारी, होरी खेलने आए बालमुकुन्द, भरोसा आपका गुरुदेव संभालों ना करो देरी, साथ अगर गुरुवर का हो तो नाम और इज्जत क्या मांगे, होरी खेले नन्दलाला बिरज में नन्दलाला, राधे श्याम सपनों में आये, बालमुकुन्द तेरा ऐसान होगा तेरा ऐसान होगा, दिगम्बर खेले मसाने मे होरी आदि भजनों की प्रस्तुति दी तो बच्चों और युवाओं के साथ साथ महिला पुरुष भाव विभोर होकर खूब नाचे। भक्तों ने भगवान संग फूलों और गुलाल से होली खेली। साथ ही ईत्र और होरी भजनों ने भगवान बालमुकुंद को रिझाया गया। मंदिर में भगवान बालमुकुंद का मनोहारी शृंगार किया, जो आकर्षण का केंद्र रहा। गुलाब के फूलों की खुश्बू से सारा वातावरण भक्तिमय हो गया। हर भक्त ने बालमुकुन्द के दरबार में गुलाब के फूलों की पत्तियों के साथ होली खेलते हुए भजनों में रमकर नाचते रहे। उन्होंने बताया यहां आकर ऐसा लगा जैसे गोकुल वंृदावन में बैठे हों। फाग भजनों के बाद देर रात 12.15 बजे भगवानश्री को ‘‘ऐ तमे जमवा पधारो मारा लाल’’ भोग लगाया गया। इसके बाद महाआरती की गई।

बांसवाड़ा. रंग पंचमी पर शहर के बालमुकुंद चौक में फूलों और गुलाल से फागोत्सव मनाते श्रद्धालु।
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