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ट्रस्ट का खेल; पिछले साल मेले में 24 लाख का घाटा बताया, जबकि अवैध कमाई 50 लाख की

Banswara News - भास्कर टीम| डूंगरपुर/बांसवाड़ा बेणेश्वरधाम की पूरी जमीन सरकारी है। पर, असल में इसकी इंच-इंच जमीन पर दबंगों का...

Jan 24, 2020, 07:00 AM IST
Banswara News - rajasthan news game of trust last year a loss of 24 lakhs was reported in the fair while illegal earnings of 50 lakhs
भास्कर टीम| डूंगरपुर/बांसवाड़ा

बेणेश्वरधाम की पूरी जमीन सरकारी है। पर, असल में इसकी इंच-इंच जमीन पर दबंगों का कब्जा हंै। जमीनों की अस्थाई सौदेबाजी में हर साल करीब 50 लाख रुपए दलालों के जरिए दबंगों के जेब में पहुंच रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सारा खेल प्रशासन की आंखों के सामने हो रहा है। ये दलाल अपने आप को कलेक्टर, नेता और बीडीओ से ऊंचा मानते हैं। भास्कर टीम ने दुकानदार बन पर इस पूरे मेले का स्टिंग किया। यहां दलाल गुजरात और उत्तरप्रदेश के मिले। इन्होंने खुलेआम पूरे मैदान में घुमाया। पूरी जमीन दिखाई। दस दिन के लिए दुकान और पंडाल का किराया 10 हजार से 50 हजार तक बताया। सरकारी रसीद से लेकर सुरक्षा तक की पूरी जिम्मेदारी का वादा भी दिया गया। भास्कर स्टिंग में सामने आया कि यह सारा खेल एक मंदिर ट्रस्ट के नाम पर हो रहा है। यूं किराये पर देने का अधिकार पंचायत समिति का है। पंचायत समिति की रसीद भी कटती है। पर, यह सब ट्रस्ट के नाम पर दलालों और दबंगों का खेल हैं। ट्रस्ट ने 2018 में बेणेश्वर मेले में करीब आय के मुकाबले अत्याधिक खर्च पर 24 लाख का घाटा बताया। जबकि दलालों के जरिए अवैध कमाई 50 लाख रुपए की हुई।

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3 जगह और कीमत बताई... ज्यादा शोर शराबा मत करना, राजू पांडेय से मिल लो, काम हो जाएगा

आप बता दो, उसके हिसाब से जमीन तय कर लेते हैं, लाइट का अलग से होगा, सब जोड़कर 56 हजार

दूसरा दलाल

उत्तर प्रदेश का राजू पांडेय

गुमानसिंह: आप पर छोड़ा है, मैने तो अपनी रेट बता दी। आप बोले तो ऊपर-नीचे कर देता हूं। यहां पर कोटा से एक मैडम झूले लेकर आई, कोई सहयोग नहीं करता था। मैने बैठाया तो आज कमाकर जा रही है। अब वो ज्यादा लाभ नहीं देती है, इसलिए इस साल मूड हो गया है, मैडम को बैठने नहीं दूं।

भास्कर: आप फाइनल रेट बता दे।

गुमानसिंह: मैंने पहले से बहुत कम रेट बताई। आप लोग काम कर देख लो अच्छी कमाई होगी। मेरे पास हर साल ये दुकानदार, मेले वाले लगाते हैं, अच्छा कमाते हैं। कई व्यापारी मुझे प्रतिशत पर काम करने की ऑफर करते हैं, लेकिन मैं उन्हें मना कर देता हूं।

भास्कर: हर साल मेले में कितनी दुकानें लगती हैं।

गुमानसिंह: हर साल रिकॉर्ड 800 दुकानें लगती हैं, इसके अलावा छोटी-मोटी फैरी लगती है।

भास्कर: हमने बड़े शहरों में दो हजार दुकाने लगाई हंै।

गुमानसिंह: मेरी पंचायत समिति से बात चल रही है बोर्ड बन जाएगा तो हम एक साथ पूरा मेला भी दे सकेंगे।

राजू पंाडे: आपने एक बार यहां धंधा कर दिया, फिर हर साल इसी रसीद पर ये जमीन आपकी हो जाएगी। आपको यहां से कोई हटा नहीं सकेंगा।

चेतन गुजराती: देखो, आपको मेले में झूले लगाने के लिए कितनी कीमत देनी है।

भास्कर: दो से तीन लाख का बैलेंस हैं हमारा तो।

चेतन गुजराती: ये 5 लाख का फिफ्टी परसेंट वाली बात हो गई। मैने बापू को इशारा किया उन्होंने 3.51 लाख की बात कही है। आप घाटे में नहीं रहोगे, मुझे पता है नीचे कितना बिजनेस होता है।

भास्कर: पंचायत के चुनाव हो जाए फिर आपको फाइनल जवाब देते हैं।

चेतन गुजराती: अब आप पर छोड़ा है, जितना जल्दी करोंगे उतना आपका फायदा होगा।

मुख्य दलाल

वलाई गांव का गुमान सिंह

भास्कर टीम दुकान खरीदने के लिए एक व्यापारी से मिली, दुकान लगाने की बात तय हुई तो उसने राजू पांडेय का नाम बताया। कहा कि ज्यादा शोर शराबा मत करना। जैसा चाहोगे, वैसा हो जाएगा। व्यापारी ने राजू पांडेय को कॉल किया तो उसने कहा कि बांसवाड़ा हूं। आधे घंटे में पहुंच रहा हूं। व्यापारी ने कहा कि राजू भाई जल्दी आ जाओ, बड़ी पार्टी है। इस पर भास्कर टीम ने कहा कि 2 दुकान लगानी हैं और कोई समस्या नहीं चाहिए। इस पर व्यापारी ने कहा कि 2 क्या 10 दुकान लगाओ।

कोटा की मैडम ज्यादा मुनाफा नहीं देती है, इसलिए इस साल मूड हो गया, बैठने नहीं दूं, आप घाटे में नहीं जाओगे, तीनों दलाल साथ में 5 लाख की दुकान 3.51 में सौदा तय

3 तरीके से लूटते हैं दुकानदार को

शिवालय ट्रस्ट की रसीद कटाने के साथ शुरू होता है अवैध वसूली का खेल

1 बेणेश्वर शिवालय ट्रस्ट: एक माह पहले होने वाले पैदल यात्रा से बेणेश्वर धाम में मेले में दुकानों के लिए दौड़ शुरू हो जाती है। यहां मुख्य मार्ग पर दुकान लगाने के लिए बेणेश्वर शिवालय ट्रस्ट की रसीद कटती है। इसके साथ ही ऊपर के खर्चे के पैसे देने पड़ते है।

2 ग्राम पंचायत और प्रशासन की वसूली: मुख्य मेले के 7 दिन पहले प्रशासन की ओर से प्लाट आंवटन होता है। यहां पहले से दंबगों द्वारा बेच दी जाती है। ऐसे में ग्राम पंचायत इन दुकानदारों से सेटिंग के नाम से पुन: नियमानुसार आवंटन की रसीद काटती है।

3 बिजली-अन्य खर्च की वसूली: मेले में बिजली व्यवस्था डिस्कॉम की होती है। पहले बेणेश्वर शिवालय ट्रस्ट की ओर से अस्थाई कनेक्शन लेकर बिजली कनेक्शन दिया जाता है। बाद में पंचायत समिति भी अस्थाई कनेक्शन लेकर बिजली कनेक्शन देती है। इसके बाद इन दोनंो की वसूली की जाती है। वही ग्राम पंचायत के आंवटन में बिजली सुविधा देने का नियम होता है।

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