दूसरों को आनंद दे वह नंद और दूसरों को यश दे वह यशोदा है: शास्त्री राम गणेश भाई

Banswara News - भास्कर संवाददाता |बांसवाड़ा बोरवट में चल रही भागवत कथा में व्यास पीठ पर विराजित शास्त्री राम गणेश भाई ने...

Nov 21, 2019, 06:57 AM IST
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भास्कर संवाददाता |बांसवाड़ा

बोरवट में चल रही भागवत कथा में व्यास पीठ पर विराजित शास्त्री राम गणेश भाई ने श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन वामनावतार, श्रीकृष्ण जन्म एवं नंदोत्सव के लीलाओं की कथा सुनाकर उपस्थित श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। धर्म प्रेमी श्रोताओं को कथा का रसपान कराते हुए शास्त्री ने कहा कि भागवत का यह पांडाल स्वर्ग लोक, कैलाश और बैकुन्ठ से भी बढ़कर है। भक्त के अपने इष्ट के प्रति आस्था को केवल प्रभु ही समझ सकते हैं। इसीलिए जीव को अपना दु:ख संसार के सामने नहीं केवल प्रभु के सामने ही प्रकट करना चाहिए। प्रभु पालनहार हैं वो शरण में आए भक्त के सारे दु:खों को हर लेते हैं। श्री कृष्ण भक्ति में लीन हुए श्रद्धालुओं से कथा क्रम में शास्त्री ने कहा कि भगवान का परम भक्त प्रहलाद जिसे कि पिता हिरण्यकश्यप के द्वारा अति भयंकर कष्ट दिए गए, लेकिन प्रहलाद प्रत्येक जगह अपने प्रभु का ही दर्शन करते थे। इसलिए उन्हें कहीं भी किसी भी प्रकार की पीड़ा का एहसास नहीं हुआ। उन्हें विश्वास था कि हमारे प्रभु सर्वत्र विराजमान है। तो प्रभु ने नृसिंहवतार लेकर भक्त के विश्वास को पूर्ण करते हुए पत्थर के खंभ से प्रकट होकर दिखा दिया कि वो भक्त की इच्छा एवं विश्वास को पूर्ण करने के लिए कहीं भी किसी भी समय प्रकट हो सकते है। शास्त्री ने वामन अवतार की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान किसी न किसी रूप में हमारी रक्षा करते है। राजा बलि का उद्धार करने भगवान को वामन रूप में आना पड़ा था। शास्त्री ने नंदोत्सव का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि जो दूसरों को आनंद दे वह नंद और जो दूसरों को यश दे वह यशोदा है। एेसे ही दाम्पत्य में परम आनंद श्रीकृष्ण का जन्म होता है। कंस की व्याख्या करते हुए कहा कि जो भ्रूण हत्या गर्भ हत्या करवाता है वही कंस है। किसी की निन्दा करने की जगह सदैव भगवान की ही चर्चा करनी चाहिए। प्रभु कथा श्रवण करने से प्रभु के चरित्रों का चिन्तन करने से प्रभु कृपा निश्चित रूप से प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि विशाल पेड़ जिस प्रकार से छोटी सी कुल्हाड़ी से कट जाता है उसी प्रकार से प्रभु के चरण कमलों का स्मरण करने से जीव के सारे पाप कट जाते है। इसके लिए उसे प्रभु की शरण में आना होगा विशेष महोत्सव के रूप में श्री कृष्ण जन्मोत्सव धूम-धाम से मनाया गया। शास्त्री ने श्री कृष्ण जन्म से पहले राम कथा सुनाई और कहा कि भागवत में श्रीकृष्ण जन्म से पहले राम कथा की चर्चा इसी कारण की गई है कि जब तक हमारा जीवन राम की तरह सीधा नही रहेगा तब तक श्री कृष्ण कथा हमें समझ नहीं आएगी।

शास्त्री राम गणेश भाई

बोरवट में चल रही भागवत कथा के दौरान कृष्ण जन्मोत्सव मनाते श्रद्धालु।

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