हर मां त्रिशला की तरह हो तो हर घर में तीर्थंकर महावीर स्वामी जैसे पुत्र पैदा होंगे

Banswara News - भास्कर संवाददाता | बागीदौरा बेटा अगर सपूत है तो धन संचय की आवश्यकता नहीं है, वह स्वयं अपने पैरों पर खड़ा हो जाएगा...

Nov 19, 2019, 06:25 AM IST
Bagidora News - rajasthan news if every mother is like trishala then a son like tirthankar mahavir swami will be born in every house
भास्कर संवाददाता | बागीदौरा

बेटा अगर सपूत है तो धन संचय की आवश्यकता नहीं है, वह स्वयं अपने पैरों पर खड़ा हो जाएगा और माता पिता का मान बढ़ाएगा। अगर कपूत हुआ तो आप कितना भी उसे धन दे दो, वह सब मिट्‌टी में मिला देगा और माता पिता को अपमानित भी करेगा। यह विचार मुनि प्रतीक सागरजी ने बागीदौरा के शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में व्यक्त किए। मुनि ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मां बच्चे की पहली गुरु है। एक माता त्रिशला ने तीर्थंकर महावीर को जन्म दिया तो सारी दुनिया आज महाविनाश से बची हुई है। अगर दुनिया की हर मां त्रिशला की तरह हो तो हर घर में तीर्थंकर महावीर स्वामी जैसे पुत्र पैदा होंगे और जगत को खुशियां प्रदान करेगे। चरित्रवान पिता के घर में ही तीर्थंकर जैसे पुत्रों का जन्म होता है। मुनिश्री ने पिता को कर्तव्य बोध कराते हुए कहा कि पिता का कर्तव्य है कि सन्तान को पढ़ा लिखा कर इतना योग्य बना दे कि वह विद्वानों की सभा में अग्रिम पंक्ति में बैठने के लायक हो जाए। वह केवल कुलदीपक बनकर ना जिए आकाशदीप बनकर जिए। पेट भरने की विद्या तो लौकिक स्कूल में मिल जाती है, मगर भव तरने की कला केवल गुरु के चरणों में प्राप्त होती है। गुरु द्वार है परमात्मा का। मुनिश्री ने आगे कहा कि नास्तिक व्यक्ति को आस्तिक बना देना सबसे बड़ी धर्म प्रभावन है। पंच कल्यणक, विधान, रथयात्रा यह सभी धर्म प्रभावन की क्रिया है। उपकारी को अपने उपकार गिनाना नहीं चहिए। करके भूल जाना चाहिए। भगवान देकर भूल जाता है और इंसान लेकर भूल जाता है। शाम को आनंदयात्रा गुरु भक्ति आरती का कार्यक्रम सानंद संपन्न हुआ। मंगलवार सुबह 7:45 बजे मुनिश्री का मंगल प्रवचन होेंगे। शाम को आनंदयात्रा, गुरु भक्ति, आरती के कार्यक्रम होंगे। यह जानकारी बागीदौरा समाज के सेठ जयंतीलाल ने दी।

बागीदौरा. धर्मसभा के दौरान मुनि की आरती करते बच्चे।

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बेटा अगर सपूत है तो धन संचय की आवश्यकता नहीं है, वह स्वयं अपने पैरों पर खड़ा हो जाएगा और माता पिता का मान बढ़ाएगा। अगर कपूत हुआ तो आप कितना भी उसे धन दे दो, वह सब मिट्‌टी में मिला देगा और माता पिता को अपमानित भी करेगा। यह विचार मुनि प्रतीक सागरजी ने बागीदौरा के शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में व्यक्त किए। मुनि ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मां बच्चे की पहली गुरु है। एक माता त्रिशला ने तीर्थंकर महावीर को जन्म दिया तो सारी दुनिया आज महाविनाश से बची हुई है। अगर दुनिया की हर मां त्रिशला की तरह हो तो हर घर में तीर्थंकर महावीर स्वामी जैसे पुत्र पैदा होंगे और जगत को खुशियां प्रदान करेगे। चरित्रवान पिता के घर में ही तीर्थंकर जैसे पुत्रों का जन्म होता है। मुनिश्री ने पिता को कर्तव्य बोध कराते हुए कहा कि पिता का कर्तव्य है कि सन्तान को पढ़ा लिखा कर इतना योग्य बना दे कि वह विद्वानों की सभा में अग्रिम पंक्ति में बैठने के लायक हो जाए। वह केवल कुलदीपक बनकर ना जिए आकाशदीप बनकर जिए। पेट भरने की विद्या तो लौकिक स्कूल में मिल जाती है, मगर भव तरने की कला केवल गुरु के चरणों में प्राप्त होती है। गुरु द्वार है परमात्मा का। मुनिश्री ने आगे कहा कि नास्तिक व्यक्ति को आस्तिक बना देना सबसे बड़ी धर्म प्रभावन है। पंच कल्यणक, विधान, रथयात्रा यह सभी धर्म प्रभावन की क्रिया है। उपकारी को अपने उपकार गिनाना नहीं चहिए। करके भूल जाना चाहिए। भगवान देकर भूल जाता है और इंसान लेकर भूल जाता है। शाम को आनंदयात्रा गुरु भक्ति आरती का कार्यक्रम सानंद संपन्न हुआ। मंगलवार सुबह 7:45 बजे मुनिश्री का मंगल प्रवचन होेंगे। शाम को आनंदयात्रा, गुरु भक्ति, आरती के कार्यक्रम होंगे। यह जानकारी बागीदौरा समाज के सेठ जयंतीलाल ने दी।

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बेटा अगर सपूत है तो धन संचय की आवश्यकता नहीं है, वह स्वयं अपने पैरों पर खड़ा हो जाएगा और माता पिता का मान बढ़ाएगा। अगर कपूत हुआ तो आप कितना भी उसे धन दे दो, वह सब मिट्‌टी में मिला देगा और माता पिता को अपमानित भी करेगा। यह विचार मुनि प्रतीक सागरजी ने बागीदौरा के शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में व्यक्त किए। मुनि ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मां बच्चे की पहली गुरु है। एक माता त्रिशला ने तीर्थंकर महावीर को जन्म दिया तो सारी दुनिया आज महाविनाश से बची हुई है। अगर दुनिया की हर मां त्रिशला की तरह हो तो हर घर में तीर्थंकर महावीर स्वामी जैसे पुत्र पैदा होंगे और जगत को खुशियां प्रदान करेगे। चरित्रवान पिता के घर में ही तीर्थंकर जैसे पुत्रों का जन्म होता है। मुनिश्री ने पिता को कर्तव्य बोध कराते हुए कहा कि पिता का कर्तव्य है कि सन्तान को पढ़ा लिखा कर इतना योग्य बना दे कि वह विद्वानों की सभा में अग्रिम पंक्ति में बैठने के लायक हो जाए। वह केवल कुलदीपक बनकर ना जिए आकाशदीप बनकर जिए। पेट भरने की विद्या तो लौकिक स्कूल में मिल जाती है, मगर भव तरने की कला केवल गुरु के चरणों में प्राप्त होती है। गुरु द्वार है परमात्मा का। मुनिश्री ने आगे कहा कि नास्तिक व्यक्ति को आस्तिक बना देना सबसे बड़ी धर्म प्रभावन है। पंच कल्यणक, विधान, रथयात्रा यह सभी धर्म प्रभावन की क्रिया है। उपकारी को अपने उपकार गिनाना नहीं चहिए। करके भूल जाना चाहिए। भगवान देकर भूल जाता है और इंसान लेकर भूल जाता है। शाम को आनंदयात्रा गुरु भक्ति आरती का कार्यक्रम सानंद संपन्न हुआ। मंगलवार सुबह 7:45 बजे मुनिश्री का मंगल प्रवचन होेंगे। शाम को आनंदयात्रा, गुरु भक्ति, आरती के कार्यक्रम होंगे। यह जानकारी बागीदौरा समाज के सेठ जयंतीलाल ने दी।

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