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विचार पवित्र हो तो आचरण भी शुद्ध हो जाता है : आचार्य
कॉमर्शियल कॉलोनी स्थित जैन संत भवन में शनिवार को आचार्य पुलक सागरजी महाराज ने कहा कि जीवन में आप काम करते हो उसका आंकलन शास्त्र के माध्यम से या भगवान महावीर की वाणी से पता चलता है। पूजा में तीन चीजें बहुत महत्वपूर्ण होती है, जिसकी ज़रूरत पड़ती है। एक मंत्र दूसरा तंत्र और तीसरा यंत्र। सुबह होते ही जब जाप करते हैं तो वह मंत्र होता है। जब शक्ति वश में हो जाती है उसी मंत्र को लिख लेते हैं तो वह यंत्र हो जाता है। साथ ही मंत्र और यंत्र को जिससे सिद्ध किया जाता है उसे तंत्र कहते है। जिस तरह गणित में अगर हम माना की नहीं जोड़ते हैं तब तक वह गणित नहीं कहलाएगी। जो तांत्रिक विज्ञान नहीं जानता वह पूजा भी सही तरीके से नहीं कर सकता है। जीवन में विचार शुद्ध रखो तो आचरण भी शुद्ध हो जाता है। जीवन में शास्त्र का पढ़ना बहुत जरूरी है। शास्त्र पढ़ने से गलत सही का ज्ञान प्राप्त होता है। साथ ही बहुत सी जानकारी शास्त्र के पढ़ने से हमें ज्ञात हो जाती है। वहीं अगर कोई दुखी हो तो वह शास्त्र पढ़ लेने से उसके दुख का निवारण हो जाता है। ज्ञान व्यक्ति के जीवन का सार है। आचार्यजी ने कहा कि सारा न्याय भगवान महावीर की वाणी से हो जाता है। सभी भगवान कमल के फूल पर विराजमान होते हैं। इसलिए भगवान के चरणों में ही फूलों को चढ़ाया जाता है। आचार्य जी ने कहा की जो संकेतों की भाषा को समझते हैं मंजिल भी उसी को मिलती है। साथ ही श्रीफल के रूप में नारियल को चढ़ाते हैं। जिसके तीन आंखें होती है। जो समयक दर्शन, समयक ज्ञान और समयक चरित्र का प्रतिक रहती है। साथ ही आचार्य जी ने कहा नारियल सबसे पवित्र होता है जो दीक्षा लेते हैं उस समय भी नारियल को चढ़ाया जाता है। वहीं शाम के समय आनंदयात्रा और गुरुदेव की आरती हुई। यह जानकारी प्रदीप भैया ने दी।
आज पुलक परिवार का संभागीय अधिवेशन: जैन संत भवन में रविवार को सुबह 8 बजे आचार्य पुलक सागर महाराज के सान्निध्य में पुलक परिवार का संभागीय अधिवेशन होगा। संभागीय अधिवेशन में पुलक मंच से जुड़े देश के कोने कोने से पदाधिकारी भाग लेंगे। जिसको लेकर शनिवार को अलग-अलग महिला संगठन, पुलक मंच के सदस्यों ने तैयारियों को अंतिम रूप दिया।
जरूरी है। शास्त्र पढ़ने से गलत सही का ज्ञान प्राप्त होता है। साथ ही बहुत सी जानकारी शास्त्र के पढ़ने से हमें ज्ञात हो जाती है। वहीं अगर कोई दुखी हो तो वह शास्त्र पढ़ लेने से उसके दुख का निवारण हो जाता है। ज्ञान व्यक्ति के जीवन का सार है। आचार्यजी ने कहा कि सारा न्याय भगवान महावीर की वाणी से हो जाता है। सभी भगवान कमल के फूल पर विराजमान होते हैं। इसलिए भगवान के चरणों में ही फूलों को चढ़ाया जाता है। आचार्य जी ने कहा की जो संकेतों की भाषा को समझते हैं मंजिल भी उसी को मिलती है। साथ ही श्रीफल के रूप में नारियल को चढ़ाते हैं। जिसके तीन आंखें होती है। जो समयक दर्शन, समयक ज्ञान और समयक चरित्र का प्रतिक रहती है। साथ ही आचार्य जी ने कहा नारियल सबसे पवित्र होता है जो दीक्षा लेते हैं उस समय भी नारियल को चढ़ाया जाता है। वहीं शाम के समय आनंदयात्रा और गुरुदेव की आरती हुई। यह जानकारी प्रदीप भैया ने दी।
बांसवाड़ा. कॉमर्शियल कॉलोनी स्थित जैन संत भवन में धर्मसभा में मौजूद समाज की महिलाएं।
पुलक सागरजी