टिकट वितरण के बाद बिखरी भाजपा को एकजुट करने आज आएंगे कटारिया

Banswara News - भास्कर संवाददाता| बांसवाड़ा विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भाजपा को जीत दिलाने के मकसद से जिस पर पार्टी ने बूथ...

Nov 11, 2019, 06:26 AM IST
भास्कर संवाददाता| बांसवाड़ा

विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भाजपा को जीत दिलाने के मकसद से जिस पर पार्टी ने बूथ स्तर तक अपनी टीम को मजबूत किया था। वहीं भाजपा इस बार निकाय चुनाव में बिखरी बिखरी नजर आ रही है। जहां कार्यकर्ताओं में भी उत्साह कम देखने को मिल रहा है साथ ही कई बड़े पदाधिकारी भी प्रचार प्रसार से दूरी बनाए हुए हैं। हालांकि पार्टी पदाधिकारी सबकुछ सामान्य बता रहे हैं, लेकिन अंदरुनी स्तर पर टिकट वितरण को लेकर नाराजगियां देखने को मिल रही है। नाराज होने वाले नेताओं में एक बड़ा नाम पूर्व राज्यमंत्री और वर्तमान पार्टी के प्रदेशमंत्री भवानी जोशी का भी है। भाजपा का वो चेहरा जो निकाय चुनाव की घोषणा से पहले ही बतौर सभापति के तौर पर प्रोजेक्ट किया गया। इसको लेकर कार्यकर्ताओं ने भी शहर में एक माहौल तैयार किया था। लेकिन पार्षदों के टिकट वितरण का काम पूरा होने के बाद जोशी का नाम एकदम दब गया और पूर्व जिलाध्यक्ष ओम पालीवाल को पार्टी की ओर से बतौर सभापति प्रोजेक्ट किया जाने लगा। जोशी हालांकि अपने बेटे भरत जोशी को वार्ड से टिकट दिलाने में कामयाब रहे हैं, लेकिन कुछ अन्य कार्यकर्ता और उनके समर्थकों को टिकट नहीं मिलने के कारण जोशी भी नाराज हैं। उन्होंने शहर में प्रचार प्रसार में भी दूरी बना ली है। इस संबंध में भास्कर ने जोशी से भी बात की तो उन्होंने कहा कि उनको किसी से भी कोई नाराजगी नहीं है।

गढ़ी में संभाला मोर्चा तो जिताया भाजपा का विधायक

जोशी का कद पार्टी में इसलिए भी बड़ा है क्योंकि वो पूर्व मंत्री रहने के साथ शहर में हर वर्ग में उनकी पकड़ अच्छी है और गत विधानसभा चुनाव में जोशी को गढ़ी विधानसभा का प्रभार दिया गया और उन्होंने अपनी इस जिम्मेदारी गढ़ी में भाजपा को जीत दिलाई। ऐसे में निकाय चुनाव में जोशी की दूरी भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी भी कर सकती है।

कटारिया से करीबी के कारण पालीवाल निकले रेस में आगे

पूर्व जिलाध्यक्ष ओम पालीवाल को सभापति के दावेदार की घोषणा पार्टी ने तो नहीं कि लेकिन उनका नाम सबसे आगे रखने में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया भी प्रमुख वजह माने जा रहे हैं। जिले के भाजपा नेताओं में पालीवाल कटारिया के काफी करीबी माने जाते हैं। पालीवाल के पहले कभी कोई चुनाव नहीं लड़े इस लिहाज से उन्हें भी एकबार सभापति बनाने के मकसद से यह निर्णय लिया जाना बताया जा रहा है। अब इस अंदरुनी खींचतान और नाराजगी को दूर करने के लिए भाजपा को नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया से आस बंधी हुई है। जो सोमवार को बांसवाड़ा पहुंचेंगे और सभा के संबोधन के बाद प्रचार प्रसार भी करेंगे।

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