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झूठ बोलना सबसे बड़ा पाप है, पढ़ाई से भी ज्यादा जरूरी व्यक्ति का आचरण : आचार्य

एक वर्ष पहले
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शहर की कॉमर्शियल कॉलोनी में स्थित जैन संत भवन में आचार्य पुलक सागरजी की धर्मसभा में गुरुवार को स्कूली बच्चे भी पहुंचे। आचार्य जी ने प्रवचन में कहा कि जीवन में सबसे बड़ा पाप झूठ बोलना है। इससे बड़ा कोई पाप नहीं हैं। आचार्य जी ने कहानी सुनाते हुए कहा कि लड़की की शादी के लिए मुल्ला नसरुद्दीन को देखने के लिए कुछ लोग आए।

उन्होंने नसरुद्दीन से पूछा कि क्या तुम शराब पीते हो उसने मना कर दिया। फिर पूछा कि क्या तुम चोरी करते हो फिर उसने मना कर दिया। फिर लड़की वालों ने पूछा कि क्या तुम हिंसा करते हो। फिर लड़के ने मना कर दिया। लड़की वाले बोले इसमें तो सब गुण है। फिर लड़के वाले ने बताया कि उसमें सिर्फ एक ही कमी है, वह है झूठ बोलने की। आचार्य जी ने कहा कि झूठ ही बड़ा पाप है। जो झूठ बोलता है समझ लो वो सभी पाप करता है। आचार्य जी ने कहा अच्छे लोग वही होते हैं जो शराब नहीं पीते, चोरी नहीं करते, लड़ाई नहीं करते। साथ ही आचार्य जी ने कहा कि पढ़ाई ही सबसे जरूरी नहीं है, बल्कि पढ़ाई से ज्यादा व्यक्ति का आचरण अच्छा होना चाहिए। बोलचाल में अच्छा होना चाहिए, बड़ों का सम्मान करने वाला होना चाहिए। बच्चों को भी स्कूल जाते वक्त अपने माता पिता और स्कूल में गुरुजनों के पैर छूने चाहिए। भगवान का नाम लेना चाहिए। आचार्य जी ने कहा कि पानी की बूंद अगर गंदे नाले में डाल दी जाए तो पानी गंदा हो जाएगा। अगर पानी को शक्कर में डाल दी जाए तो पानी मीठा हो जाएगा। अगर पानी की बूंद को समुद्र में डाल दी जाए तो फिर खारी हो जाएगी। साथ ही बच्चों के बारे में बताते हुए आचार्य जी ने कहा बच्चों का भविष्य कैमरे की तरह होता है जो कुछ देखता है उसे ही रिकॉर्ड कर लेता है। बच्चे बड़ों के आचरण को देखकर ही सिखाते हैं। आचार्य जी ने कहा पहले प्रश्न का जन्म होता है उसके बाद उत्तर आता है। इसलिए आप जिस प्रकार से प्रश्न करोगे उत्तर वैसा ही आएगा। इसलिए ध्यान से अच्छे से ही सवाल करना चाहिए। शाम के समय आनंदयात्रा और गुरुदेव की आरती का आयोजन किया गया।

भगवान पार्श्वनाथ की शोभायात्रा निकाली

परतापुर. अष्टान्हिका पर्व के समापन पर जैन समाज की ओर से बुधवार को जल यात्रा जैन मंदिर से पुष्प तीर्थ उद्यान पहुंची। जहां भागवान आदिनाथ का अभिषेक पूजन पंकज हीरालाल कोठारी द्वारा किया। वहीं जैन समाज द्वारा एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली की बधाईयां दी गई। पाठशाला के बच्चों द्वारा मंगला चरण किया गया। अर्घ्य अर्पण तेजपाल सवोत परिवार ने किया। प्रवक्ता संजय एन दोसी ने बताया कि इस वर्ष जन्में बच्चों का जैनत्व संस्कार वृत्तियों द्वारा णमोकार मंत्र के साथ किया गया।

है झूठ बोलने की। आचार्य जी ने कहा कि झूठ ही बड़ा पाप है। जो झूठ बोलता है समझ लो वो सभी पाप करता है। आचार्य जी ने कहा अच्छे लोग वही होते हैं जो शराब नहीं पीते, चोरी नहीं करते, लड़ाई नहीं करते। साथ ही आचार्य जी ने कहा कि पढ़ाई ही सबसे जरूरी नहीं है, बल्कि पढ़ाई से ज्यादा व्यक्ति का आचरण अच्छा होना चाहिए। बोलचाल में अच्छा होना चाहिए, बड़ों का सम्मान करने वाला होना चाहिए। बच्चों को भी स्कूल जाते वक्त अपने माता पिता और स्कूल में गुरुजनों के पैर छूने चाहिए। भगवान का नाम लेना चाहिए। आचार्य जी ने कहा कि पानी की बूंद अगर गंदे नाले में डाल दी जाए तो पानी गंदा हो जाएगा। अगर पानी को शक्कर में डाल दी जाए तो पानी मीठा हो जाएगा। अगर पानी की बूंद को समुद्र में डाल दी जाए तो फिर खारी हो जाएगी। साथ ही बच्चों के बारे में बताते हुए आचार्य जी ने कहा बच्चों का भविष्य कैमरे की तरह होता है जो कुछ देखता है उसे ही रिकॉर्ड कर लेता है। बच्चे बड़ों के आचरण को देखकर ही सिखाते हैं। आचार्य जी ने कहा पहले प्रश्न का जन्म होता है उसके बाद उत्तर आता है। इसलिए आप जिस प्रकार से प्रश्न करोगे उत्तर वैसा ही आएगा। इसलिए ध्यान से अच्छे से ही सवाल करना चाहिए। शाम के समय आनंदयात्रा और गुरुदेव की आरती का आयोजन किया गया।

धर्म समाज संस्था

अाचार्य पुलक सागरजी महारज।

बांसवाडा | शहर के कामर्शियल काेलाेनी के संत भवन में अाचार्य पुलक सागरजी से ज्ञान लेते स्कूली बच्चे |
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