इंसान को जीवन जीने का ढंग अाना चाहिए
कॉमर्शियल कॉलोनी में स्थित जैन संत भवन में आचार्य पुलक सागरजी की सुबह 8.30 से 10 बजे तक धर्मसभा हुई। बुधवार को आचार्य पुलक सागरजी ने कहा कि इंसान को जीवन जीने का ढंग आना चाहिए। आचार्य ने कहानी बताते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद के पास एक भक्त फल और मिठाई लेकर आता है। तब विवेकानंद उससे बात नहीं करते है, उसके मिठाई और फल खा लेते हैं। उसके बाद उसके चले जाने के बाद पास खड़े दूसरे व्यक्ति से पूछते हैं कि उस भक्त ने क्या कहा। तो उसने कहा कि वह भक्त काफी नाराज हुआ और बोलो की ये कैसे संत हैं बात तक नहीं की। उसके बाद विवेकानंद के पास दूसरा भक्त आता है मिठाई और फल लेकर। तब विवेकानंद उससे मीठी मीठी और धर्म की बात करते हैं। लेकिन उसकी मिठाई और फल नहीं खाते हैं। उसके चले जाने के बाद फिर विवेकानंद जी व्यक्ति से पूछते हैं कि भक्त क्या कह रहा था। तब उस व्यक्ति ने बताया कि वह आपसे नाराज हुआ और बोला कि ऐसे क्या संत हैं मेरे लाए हुए फल और मिठाई नहीं खाई।
फिर तीसरा भक्त आता है तो विवेकानंद ने मिठाई और फल भी खाए साथ ही मीठी मीठी बात भी की और भक्त खुश होकर घर गया। तब विवेकानंद ने बताया की जीवन में तीसरा जो काम मैंने किया, वही करना चाहिए। आचार्य जी ने कहा जीवन के जीने का सलीका हर इंसान को आना चाहिए। साथ ही आचार्य जी ने बताया कि जीवन में कोई किसी का साथ नहीं देता है साथ ही उतना ही सहयोग होता है जिस तरह समुद्र में नाव का है। आचार्यजी ने कहा कि भगवान महावीर का संदेश है की संसार में आए हो तो अपना ध्यान रखो क्योंकि व्यक्ति अपने कर्मों का फल स्वंय भोगता है। कोई किसी के सुख दुख को कम या ज्यादा नहीं कर सकता है।
आचार्य पुलक सागरज महाराज
कॉमर्शियल कॉलोनी में आचार्य पुलक सागर के प्रवचन सुनते श्रद्धालु।