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गुजरात से अनुबंध हुआ नहीं, पेयजल योजना की डीपीआर बनाने की घोषणा की

एक वर्ष पहले
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कडाणा बेकवाटर से सीमलवाड़ा, झौंथरी और चिखली तक पानी देने की है योजना

मुख्यमंत्री ने डूंगरपुर जिले में बजट घोषणा के तहत चौरासी विधानसभा क्षेत्र में पेयजल सुविधा देने के लिए कडाणा बांध के बेकवाटर से पानी लाने के लिए डीपीआर बनाने की स्वीकृति दी है। पर, यह फिलहाल झुनझुना ही है। इस योजना पर चार साल पहले भी डीपीअार बनाने का काम हुअा अाैर यह गुजरात जल समझौते के पैंच में फंस कर उलझ गया। इस बार फिर पानी दिखाया, लेकिन गुजरात से पानी इस्तेमाल के अनुबंध की दिशा में पहल ही नहीं हुई। एेसे में इस बार भी डीपीअार के नाम पर लाखाें व्यर्थ ही हाेने हैं। इस योजना में पूर्व में वर्ष 2016-17 में डीपीआर बनाने का काम पूरा हो चुका है। अब वापस इस बड़ी परियोजना की डीपीआर बनाने में लाखों रुपए खर्च होंगे। करीब एक से दो वर्ष का समय बर्बाद होगा। इसके बाद सरकार स्तर पर वित्तीय स्वीकृति जारी हो सकती है जबकि अफसरों के पास पुराने प्रोजेक्ट के तहत डीपीआर तैयार है। मुख्यमंत्री इस मामले में वित्तीय स्वीकृति जारी कर लोगों को राहत दे सकते थे। इन सबसे पहले कडाणा बांध के बेकवाटर क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी लेने के लिए गुजरात सरकार के अनुबंध पर चर्चा करना जरूरी है।

केंद्रीय जल नीति; राज्य सरकार आज की तय राशि जमा कराए तो गुजरात सरकार पानी पर हिस्सा देगी


कडाणा बांध के निर्माण के समय मुआवजा राशि गुजरात सरकार की ओर से राजस्थान के किसानों को दी थी। इसके अलावा माही बांध के निर्माण में भी कुछ हिस्सा गुजरात सरकार की ओर से वहन किया गया था। इसके कारण राजस्थान को पानी लेने से पहले केंद्रीय जल नीति समझौते के तहत लागत का वर्तमान पैसा गुजरात सरकार को देना होगा। इसके बाद ही पानी का उपयोग कर सकेंगा। इसके अलावा किसी भी प्रकार की पेयजल और सिंचाई परियोजना पर पूर्ण पाबंदी रहेंगी। इसी के कारण कडाणा के बेक वाटर से आज तक कोई भी सिंचाई परियोजना का निर्माण नहीं हो सका है।


राजस्थान का पानी स्टोरेज होता है कडाणा बांध में, पूर्व में भी राज्य सरकार बना चुकी है डीपीआर

उदयपुर संभाग से निकलने वाली नदियों, बांध और जलाशय का ओवरफ्लो पानी बहकर कडाणा बांध क्षेत्र में पहुंचता है। इसके लिए वर्ष 1979 से 1989 में गुजरात सरकार ने बांध का निर्माण किया। करीब 66 मीटर ऊंचाई के बांध 25520 किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस बांध का स्वामित्व गुजरात सरकार के पास है। इस बांध के निर्माण के साथ ही राजस्थान सरकार के लिखित में समझौता कर रखा है। इसके तहत नर्वदा बांध के निर्माण तक इसके पानी का उपयोग राजस्थान नहीं कर सकती है। नर्वदा बांध बनने के बाद राजस्थान सरकार को पानी के उपयोग के लिए गुजरात सरकार को पैसा और लागत राशि देकर मंजूरी लेनी होगी। लागत राशि जमा होने के बाद ही गुजरात सरकार की ओर से पानी दिया जा सकता है। चौरासी विधानसभा के चिखली, झौथरी, सीमलवाड़ा, गलियाकोट और सागवाड़ा के कुछ क्षेत्र में पेयजल सप्लाई करने के लिए पूर्व में राज्य सरकार की ओर से प्रयास किए गए थे। तत्कालीन चौरासी विधायक जल राज्यमंत्री सुशील कटारा की ओर से जयपुर स्तर पर प्रयास शुरू किए थे। मामले को दिल्ली केंद्रीय जल समझौता बैठक तक उठाया था। उस समय गुजरात और राजस्थान के अनुबंध का हवाला देते हुए पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। इस कार्य के बाद डीपीआर बनाकर गलियाकोट से पानी को भेमई के रास्ते सीमलवाड़ा और चिखली पहुंचाने की कार्ययोजना बनाई थी। यहीं पानी को झौथरी से होकर बिछीवाड़ा तक पहुंचाना था। बजट स्वीकृति से पहले फाइल केंद्रीय जल समझौते के पास जाकर अटक गई।


मैरे कार्यकाल में बन चुकी है डीपीआर: सुशील कटारा

मैरे कार्यकाल में 2016-17 में डीपीआर बनाकर तैयार की गई थी। मामला केंद्रीय जल समझौता समिति तक पहुंचाया गया था। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत वास्तव में लोगों का भला चाहते है तो अफसरों के पास तैयार डीपीआर की वित्तीय स्वीकृति देनी चाहिए। तब लोगों को लाभ पहुंचाता। ये तो सिर्फ सपने दिखाने वाली बात है।

- सुशील कटारा, पूर्व जलदाय राज्यमंत्री डूंगरपुर।

कडाना बैक वाटर
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