उतावलेपन में किए काम से बाद में पश्चाताप करना पड़ता है : प्रतीक सगरजी

Banswara News - मुनि प्रतीकसागर ने जैन बाेर्डिंग में अमृत संस्कार प्रवचन सभा में कहा कि जब जागो तभी सवेरा मानो, क्योंकि मौत और...

Jan 23, 2020, 06:55 AM IST
मुनि प्रतीकसागर ने जैन बाेर्डिंग में अमृत संस्कार प्रवचन सभा में कहा कि जब जागो तभी सवेरा मानो, क्योंकि मौत और वैराग्य की कोई उम्र नहीं होती और अपने आप में सुधार लाने के लिए समय की कोई पाबंदी नहीं होती। व्यक्ति को जब सत्संग और सद्गुरु मिल जाता है तो उसका उद्धार हो जाता है। लेकिन सत्संग और सदगुरु का मिलना, नहीं मिलना, कब मिलना यह सब आपके प्रारब्ध और पुण्यों पर निर्भर करता है। मुनि ने कहा कि उतावलेपन में किए काम से बाद में पश्चाताप करना पड़ता है। मनुष्य का दिमाग विचारों का खजाना है। इन विचारों से जिन्दगी सुधर भी सकती है और बिगड़ भी जाती है। इसलिए अपने विचार ऐसे हो कि जिस पर अमल कर यह जिंदगी ही तीर्थ बन जाए। इसके लिए सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रम्हचर्य रूपी पंचर| भगवान महावीर ने दिए हैं। इनकी पालना करने से व्यक्ति का जीवन इसी जन्म में तीर्थ के समान बन जाएगा।

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