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हर साल केवल तीन, लेकिन इस साल 8 पश्चिमी विक्षोभ, इसलिए मार्च भी सर्द
अलनीनो और पश्चिमी विक्षोभ के कारण मार्च के दूसरे सप्ताह के अाखिरी दिनों में ठंड का असर अचानक से बढ़ गया है। देश के उत्तरी क्षेत्रों में बर्फबारी होने और 10.9 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवा चलने से न्यूनतम तापमान पिछले दो दिन में पारा तीन डिग्री लुढ़ककर 15 तक पहुंच गया। वहीं अधिकतम तापमान 30 डिग्री से घटकर 27 डिग्री हो गया। जहां न्यूनतम तापमान 8.1 डिग्री कम हुआ, वहीं अधिकतम तापमान में 3 डिग्री की कमी आई, मार्च में ऐसा पहली बार हुआ है। तापमान में अचानक गिरावट आने का असर वनस्पतियों पर शुक्रवार सुबह ओस के जमे हुए होने के रूप में सामने आया है।
इधर, वातावरण में आद्रता 17 प्रतिशत रही। संभागीय कृषि अनुसंधान केंद्र बोरवट बांसवाड़ा के संभागीय निदेशक अनुसंधान डॉ. प्रमोद रोकड़िया ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण ही इस बार मार्च में ठंड का असर रहा है। हो सकता है कि अचानक ठंड का असर बढ़ने से आने वाले दिनों में कहीं-कहीं हल्की या तेज बारिश हो सकती है। वैसे ताे अमूमन हर साल दाे या तीन पश्चिमी विक्षोभ होते हैं। जिसका कारण अलनीनो को माना जाता है। उन्होंने बताया कि इस बार मौसम वैज्ञानिकों ने सालभर मंे आठ पश्चिमी विक्षोभों के सक्रिय होने की घोषणा की है। जिसके तहत इस बार मार्च में हवा के असर से ठंड का असर अधिक महसूस होने लगा है। उन्होंने बताया कि 11 मार्च काे अधिकतम तापमान 30.3 डिग्री, न्यूनतम तापमान 16.6 डिग्री दर्ज किया गया था। वहीं 12 मार्च को अधिकतम तापमान 28 और न्यूनतम तापमान 14 डिग्री रहा था। वहीं 13 मार्च को अधिकतम तापमान 27.3 डिग्री अाैर न्यूनतम तापमान 9.9 डिग्री रहा है।
सेहत पर असर: मार्च में सर्द हवा चलने से जिलेभर में मौसमी बीमारियों पीड़ितों की संख्या बढ़ गई है। पहले जहां एमजी अस्पताल की ओपीडी 700 के करीब थी। वाे ही अब 1000 के करीब हो गई है। वहीं चर्म रोग के मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है।
अाज से न्यूनतम तापमान 16 डिग्री हाेने की संभावना
संभागीय निदेशक कृषि अनुसंधान डाॅ. राेकड़िया ने बताया कि 14 मार्च को न्यूनतम तापमान 9.9 डिग्री से बढ़कर 16 डिग्री रहने की संभावना है। उन्हाेंने बताया कि अचानक बढ़े तापमान से फिलहाल फसल पर इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिला है।
फसलों पर असर: मार्च में सर्द हवा चलने से इस बार आम की पैदावार पर काफी असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार आम की पैदावार आधी रह जाएगी। वहीं बारिश ज्यादा होने से खरीफ की फसल में नुकसान हुआ था, अब रबी की फसल में नुकसान होगा।
पहली बार मार्च में जमी ओस की बूंदे
सर्द हवा के कारण पहली बार मार्च में घास पर ओस की बूंदे नजर आ रही है। फोटो. भरत कंसारा