पिच्छीका जीव रक्षा, संयम और श्रद्धा का प्रतीक : मुनि आज्ञा सागरजी

Banswara News - पालोदा कस्बे में रविवार शाम बस स्टैंड पर स्थित पगल्या मंदिर परिसर में आचार्य आज्ञा सागरजी ससंघ एवं साध्वियों का...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 06:26 AM IST
Banswara News - rajasthan news pichhika is a symbol of survival restraint and reverence muni adesh sagar
पालोदा कस्बे में रविवार शाम बस स्टैंड पर स्थित पगल्या मंदिर परिसर में आचार्य आज्ञा सागरजी ससंघ एवं साध्वियों का भव्य पिच्छी परिवर्तन समारोह हुअा। समारोह में बड़ी संख्या में समाजजन माैजूद रहे। भक्ति भाव से महाराज श्री को नवीन पिच्छी परिवर्तन कराई। समारोह में मुनि आज्ञा सागर ने जैन समाज के धर्मावलंबियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह पिच्छी जीव रक्षा संयम और श्रद्धा का प्रतीक है और इस पिच्छी से जीव मात्र की रक्षा की जाती है। साधु संत इसे सेफ्टी पीस कहते हैं क्योंकि यह दूसरों की रक्षा करने के उपयोग में आती है। मुनि आज्ञा सागर ने कहा कि यह पिच्छी मोर के पंख से बनाई जाती है और खास बात यह है कि मोर के पंख को उसके शरीर से तोड़ी नहीं जाती बल्कि मोर नवरात्रि के दिनों में अपने आप इसे त्याग देता है। इसके बाद मोर के पंख से बनी यह पिच्छी साधु संत ग्रहण करते हैं।

मुनि आज्ञा सागरजी ने कहा कि पिच्छी परिवर्तन का यह समारोह संयम और श्रद्धा का पर्व है। मुनि ने कहा कि कभी भी अपने पुत्र की प्रशंसा उसके सामने नहीं करनी चाहिए। अगर एक पिता अपने पुत्र की प्रशंसा उसके सामने करेगा तो निश्चित रूप से वह बेटा बिगड़ जाएगा। बेटा अपने पिता के मुंह से प्रशंसा सुनकर अभिमानी बन जाएगा और वह समझेगा कि मैं सर्वश्रेष्ठ हूं। उन्हाेंने ने कहा कि साधु संत अपने साथ जो पिच्छी रखते हैं वह मोर पंख से इसलिए बनाई जाती है क्योंकि मोर का पंख कभी भी पानी में खराब नहीं होता है। धूल से बिगड़ता नहीं है और पसीने से इस पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। मोर का पंख पवित्र माना गया है। इस समारोह में सभी को एक-एक बुरी वस्तु अपने अंदर से त्याग कर देनी चाहिए। पालोदा में आयोजित पिच्छी परिवर्तन कार्यक्रम में महाराज एवं माता श्री को जो पिच्छी भेंट की गई वह पिच्छी ड्राेन से हवा में उड़ा कर महाराज श्री के मंच तक लाई गई। पिच्छी परिवर्तन के समारोह में विमान से पुष्प वर्षा का भी एक सुंदर नजारा सभी को देखने मिला। आचार्य मुनि आज्ञा सागर की पिच्छी परिवर्तन की बोली पंचोरी श्रीपाल कोदरजी ने ली। श्रीपाल कोदरजी जैन ने अपने मस्तक पर पिच्छी को धारण करते हुए महाराज श्री को पिच्छी भेंट की। माताजी प्रवेश मती को पिच्छी भेंट करने का सौभाग्य समादिया विनय कुमार राजेंद्र कुमार ने पाया। इसके अलावा सुप्रज्ञा मति माताजी को पिच्छी भेंट करने की बोली भलावत कपिल कुमार बसंत लाल ने ली। सुवर्णश्री मति को पंचोरी जिनेंद्र कुमार फूलचंद ने नवीन पिच्छी भेंट करने की बोली ली।

पिच्छिका परिवर्तन कार्यक्रम में राजेंद्र सरोदिया जिनेंद्र पंचोरी मनोहरलाल सेठ, अनिल समादिया, कपिल भलावत, हेमंत कोठारी, कमल कोठारी, संजय कोठारी, अक्षत कोठारी, कीर्तिश पंचोली आदि ने सहयोग किया। कार्यक्रम पालोदा के अलावा मेतवाला खोड़न, कोटड़ा, भीमपुर, बांसवाड़ा, परतापुर, सागवाड़ा, चंदुजी का गड़ा आदि गांवों से समाजजन शाामिल हुए।

गनाेड़ा. पालाेदा में आचार्य आज्ञा सागरजी महाराज ससंघ का पिच्छिका परिवर्तन समाराेह।

भास्कर संवाददाता| गनोड़ा

पालोदा कस्बे में रविवार शाम बस स्टैंड पर स्थित पगल्या मंदिर परिसर में आचार्य आज्ञा सागरजी ससंघ एवं साध्वियों का भव्य पिच्छी परिवर्तन समारोह हुअा। समारोह में बड़ी संख्या में समाजजन माैजूद रहे। भक्ति भाव से महाराज श्री को नवीन पिच्छी परिवर्तन कराई। समारोह में मुनि आज्ञा सागर ने जैन समाज के धर्मावलंबियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह पिच्छी जीव रक्षा संयम और श्रद्धा का प्रतीक है और इस पिच्छी से जीव मात्र की रक्षा की जाती है। साधु संत इसे सेफ्टी पीस कहते हैं क्योंकि यह दूसरों की रक्षा करने के उपयोग में आती है। मुनि आज्ञा सागर ने कहा कि यह पिच्छी मोर के पंख से बनाई जाती है और खास बात यह है कि मोर के पंख को उसके शरीर से तोड़ी नहीं जाती बल्कि मोर नवरात्रि के दिनों में अपने आप इसे त्याग देता है। इसके बाद मोर के पंख से बनी यह पिच्छी साधु संत ग्रहण करते हैं।

मुनि आज्ञा सागरजी ने कहा कि पिच्छी परिवर्तन का यह समारोह संयम और श्रद्धा का पर्व है। मुनि ने कहा कि कभी भी अपने पुत्र की प्रशंसा उसके सामने नहीं करनी चाहिए। अगर एक पिता अपने पुत्र की प्रशंसा उसके सामने करेगा तो निश्चित रूप से वह बेटा बिगड़ जाएगा। बेटा अपने पिता के मुंह से प्रशंसा सुनकर अभिमानी बन जाएगा और वह समझेगा कि मैं सर्वश्रेष्ठ हूं। उन्हाेंने ने कहा कि साधु संत अपने साथ जो पिच्छी रखते हैं वह मोर पंख से इसलिए बनाई जाती है क्योंकि मोर का पंख कभी भी पानी में खराब नहीं होता है। धूल से बिगड़ता नहीं है और पसीने से इस पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। मोर का पंख पवित्र माना गया है। इस समारोह में सभी को एक-एक बुरी वस्तु अपने अंदर से त्याग कर देनी चाहिए। पालोदा में आयोजित पिच्छी परिवर्तन कार्यक्रम में महाराज एवं माता श्री को जो पिच्छी भेंट की गई वह पिच्छी ड्राेन से हवा में उड़ा कर महाराज श्री के मंच तक लाई गई। पिच्छी परिवर्तन के समारोह में विमान से पुष्प वर्षा का भी एक सुंदर नजारा सभी को देखने मिला। आचार्य मुनि आज्ञा सागर की पिच्छी परिवर्तन की बोली पंचोरी श्रीपाल कोदरजी ने ली। श्रीपाल कोदरजी जैन ने अपने मस्तक पर पिच्छी को धारण करते हुए महाराज श्री को पिच्छी भेंट की। माताजी प्रवेश मती को पिच्छी भेंट करने का सौभाग्य समादिया विनय कुमार राजेंद्र कुमार ने पाया। इसके अलावा सुप्रज्ञा मति माताजी को पिच्छी भेंट करने की बोली भलावत कपिल कुमार बसंत लाल ने ली। सुवर्णश्री मति को पंचोरी जिनेंद्र कुमार फूलचंद ने नवीन पिच्छी भेंट करने की बोली ली।

पिच्छिका परिवर्तन कार्यक्रम में राजेंद्र सरोदिया जिनेंद्र पंचोरी मनोहरलाल सेठ, अनिल समादिया, कपिल भलावत, हेमंत कोठारी, कमल कोठारी, संजय कोठारी, अक्षत कोठारी, कीर्तिश पंचोली आदि ने सहयोग किया। कार्यक्रम पालोदा के अलावा मेतवाला खोड़न, कोटड़ा, भीमपुर, बांसवाड़ा, परतापुर, सागवाड़ा, चंदुजी का गड़ा आदि गांवों से समाजजन शाामिल हुए।

घाटोल में मुनि को श्रीफल और शास्त्र भेंट कर पाद प्रक्षालन किया

घाटाेल. जीवन ज्योति सोसायटी कॉम्पलेक्स के मैदान पिच्छिका भेंट करते समाजजन और समाराेह में भक्ति नृत्य प्रस्तुत करती बालिकाएं।

भास्कर संवाददाता| घाटोल

आचार्य विद्यासागर महाराज के परम शिष्य मुनि समता सागरजी एवं एेलक निश्चय सागरजी महाराज का भव्य पिच्छीका परिवर्तन समारोह रविवार को संपन्न हुआ। पिच्छीका परिवर्तन समारोह दोपहर में जीवन ज्योति सोसायटी कॉम्पलेक्स के मैदान में महिला मंडल के मंगलाचरण से प्रारंभ हुआ। तत्पश्चात मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं उत्तर प्रदेश के साथ गुजरात से आए मेहमानों ने आचार्य विद्यासागर महाराज की तस्वीर का अनावरण कर दीप प्रज्वलन किया। वागड़ क्षेत्र से आए जैन समाज के पंच महानुभव ने मुनि को श्रीफल भेंट किए एवं मुनी का पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट किए। धर्मसभा में समस्त ब्रह्मचारी भैया ने नवीन पिच्छी का अनावरण किया। मुनि समता सागर महाराज को नवीन िपच्छी देने का सौभाग्य लालावत अजीत कुमार निहालचंद परिवार को प्राप्त हुआ। मुनि समता सागरजी महाराज की पुरानी िपच्छीका लेने का सौभाग्य धीरावत बदामी लाल धुलजी परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं मुनि ऐलक निश्चय सागरजी महाराज की नवीन िपच्छी का अनावरण समस्त ब्रह्मचारी बहने एवं नगर की त्यागी वृत्ति महिलाओं ने किया एेलक निश्चय सागर महाराज की पुरानी पिचछीका ग्रहण करने का सौभाग्य सैठ अशोक कुमार के पुत्र रीगल एवं जुगल को प्राप्त हुआ। मुनि समता सागरजी ने धर्मसभा को संबोधित किया एवं ब्रह्मचारी विजय भैया के सान्निध्य में कार्यक्रम संपन्न हुअा। कार्यक्रम में स्थानीय कार्यकर्ताओं का सम्मान किया गया। पिच्छीका परिवर्तन समारोह में नगर सेठ राजमल जैन, मुनि त्यागी सेवा कमेटी के अध्यक्ष अजीत लालावत, मंत्री दीपक मुॱगाणिया, जैन युवा संगठन के अध्यक्ष विपिन वगेरिया एवं मंत्री वैभव घाटलिया महिला मंडल अध्यक्षा वसुंधरा जोधावत, प्रीति वगेरिया, मंजुला सरिया, कनकलता समाधिया, सुषमा धीरावत आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अध्यक्ष अजीत जैन, भानु कोठारी, मानमल सितावत, हीरालाल समाधिया, मनसुखलाल जोधावत सहित खमेरा, नरवाली, पारसोला, मुंगाना, धरियावद, भूंगड़ा, परतापुर, बागीदौरा, कलिंजरा, नोगामा, गनोड़ा से समाजजन शामिल हुए।

गनाेड़ा. पालाेदा में पिच्छिका परिवर्तन समाराेह में मौजूद समाजजन।

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