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काव्य-सुधा साहित्यिक परिवार की मानसून गोष्ठी में बही रस और छंदों की धार

2 वर्ष पहले
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काव्य-सुधा साहित्यिक परिवार की मानसून काव्य गोष्ठी नगर बांसवाड़ा के न्यू हाउसिंग बोर्ड स्थित किडन गार्डन स्कूल में हुई, जिसमें 40 साहित्यकारों ने भाग लिया।

मानसून काव्य गोष्ठी तारेश दवे द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से आरंभ हुई। इस गोष्ठी में विभिन्न रचनाकारों ने साहित्य की प्रत्येक विधा में वीर, भक्ति, करुण, शृंगार सहित नवरस से रंगी ग़ज़ल, गीत, छंद, कविताओं की बौछारों से साहित्यिक सावन का सुखद अहसास करवाया। जिनमें प्रमुख रूप से नरेंद्रपाल जैन ने आंखों में तेरा शबाब रखा है...., पी एल बामनिया ने इंसानियत मज़हब से हारी न होती...., भूपेंद्र तनिक ने ताश के पत्तों की तरह..., हिमेश उपाध्याय ने सुरों की साधना प्रस्तुत की। राम पंचाल भारतीय ने मैं तो हूं कतरा पानी का..., मां तो पूरा समंदर है ममता का...., मयूर पंवार ने फूलों की तरह अपना तू जीवन बिताया कर...., सूर्यकरण सोनी ने नेह भरे नयना तेरे......, जगदीश मुरी ने मां है तो मुझे कोई डर नहीं होता..., प्रहलाद सिंह प्रताप ने सुक्को तेरी यही कहानी..., उत्तम मेहता ने देखकर माहताब बहके हैं..., कामिनी रावल ने क्योंकि मैं बेटी हूं काव्य रचना सुना कर समा बांध दिया। प्रेम शर्मा ने सावन के झूलों पर झूलती कुछ मद मस्त सी.., राजेन्द्र राज संतवानी ने नक्ष पहले तो बहारों के मिटाना तेरा.., जलज जानी ने मिले जो दिल जवां , मोहनदास वैष्णव ने रगों में है समाहित..., अतुल पंचोरी ने यूं ही नहीं पालते शौक ज़ज़्बातों के...., पंकज देवड़ा ने राजस्थानी गीत ओ बादरा पाणी देता जाजो.., महेश पंचाल माही ने जो शब्दों में संवेदना हो तो सुंदर छंद होता है... रचनाओं को पेश कर महफ़िल को परवान चढ़ाया। रोहिणी पंड्या ने सरहद रक्षा की ख़ातिर.., प्रियंक ठाकोर ने दिल का हर ख्याल हर अरमान है तू.., हरीश चंद्र सिंह ने दुर्गा काली शक्ति स्वरूपा..., बृजमोहन तूफान ने अब हम भारत को इंडिया नहीं कहेंगे..., विजय गिरी काव्यदीप ने कल्पना के पंख लेकर उड़ते चहकते छंद ये.., संदेश जैन ने वो वफ़ा का पैगाम समझते ही नहीं जैसी रचनाएं प्रस्तुत कीं। सावन की फुहारों के संग इस खुशनुमा माहौल में विद्यालय की प्रधानाचार्य निशा सिंह एवं गोष्ठी में श्रोता के रूप में सम्मिलित लोकेंद्र सिंह मौजूद रहे, जिनका काव्य सुधा परिवार की तरफ से साहित्य के प्रति समर्पण के लिए सम्मान किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता कवि नरेंद्रपाल जैन ऋषभदेव ने की । मुख्य अतिथि पी एल बामनिया उदयपुर, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार भूपेंद्र उपाध्याय तनिक रहे। गोष्ठी का संचालन वसी सिद्दीकी ने किया। आभार महेश पंचाल माही ने जताया।

बांसवाड़ा. मानसून काव्य गोष्ठी में रचनाकारों ने भाग लेकर काव्य रचनाएं प्रस्तुत कीं।

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