पानी में प्रेशर से खींच रहे बजरी

4 वर्ष पहले
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प्रियंक भट्‌ट/मुकेश पाटीदार|बांसवाड़ा

सुप्रीम कोर्ट ने बजरी खनन पर रोक लगा रखी है। बावजूद इसके बांसवाड़ा में माफिया सक्रिय है। अब तक नदी के सूखे पेटे से बजरी निकालने वाले माफिया जिम्मेदारों की मिलीभगत से अब नदी का सीना चीर कर गीली बजरी निकाल रहे हैं। चाप नदी पर करीब 20 पाइंट ऐसे हैं, जहां माफिया खुलेआम जुगाडू इंजन, नांव और पाइप की मदद से रोजाना लाखों की बजरी तस्करी कर रहे हंै। इन की सांठगांठ इस कदर है कि नदी में दोहन से लेकर ट्रैक्टर और डंपर तक बिना किसी रोकटोक के शहर में आ रहे हैं।

शहर में गीली बजरी से भरे डंपर पहुंचने पर इसकी हकीकत तलाशी। तो पता चला कि गुजरात की आड़ में चाप नदी के कुछ इलाकों में धड़ल्ले से बजरी निकाली जा रही है। भास्कर टीम ने ग्राहक बनकर बजरी निकाले जाने वाले बिलोदा, परसोलिया, खरवेड़ा जगहों का दौरा किया। जहां का नजारा चौंकाने वाला था। बजरी के बड़े-बड़े ढेर। ट्रैक्टर और डंपर की कतारे और पाइप से पानी की तरह निकल रही बजरी। बजरी निकालने का यह तरीका पहली बार देखा था।

यह मलबा नहीं, चाप नदी से निकाली जा रही बजरी है नांव में जुगाड़ का इंजन लगा हर घंटे भर रहे एक ट्रोला
पानी की तरह पाइप से बह निकल आती है बजरी
बजरी तस्करी से जुड़े एक युवक ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि वह चाप नदी नांव की मदद से 6 इंच के पाइप लगाकर एक फुटबाल लगाई जाती है। जीप या कार के इंजन का जुगाड़ कर फुटबाल के जरिये गहरे पानी में प्रेशर बनाया जाता है। यह प्रेशर इतना होता है कि फुटबाल के पांच मीटर तक बजरी खींच लेता है। युवक ने बताया कि अगर गहराई में अच्छी बजरी मिल जाए तो एक घंटे में एक ट्रैक्टर ट्रॉली भी भर जाती है। महज कुछ लीटर डीजल खर्च पर हजारों की बजरी के चलते अब जगह-जगह इस तकनीक से माफिया बजरी निकाल रहे है।

तस्करों ने चोरी की बजरी कीमत भी तय की

रेत से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली 2500 रुपए में
रेत से भरा एक ट्रोला 9000 रुपए में
नदी के अंदर अवैध खनन की ऐसी तस्वीर और तरीका पहली बार सिर्फ भास्कर में
ये मिलीभगत ही है, क्योंकि... मुख्य सड़क से भी नजर आ जाते हैं ठिकाने

बजरी माफिया पर खनिज अधिकारी मेहरबान हैं। जहां पर बजरी निकाली जा रही है, वे ठिकाने तो मुख्य मार्ग से भी नजर आ जाते हंै। गीली बजरी से भरे डंपर के जरिये सरेआम तस्करी हो रही है, लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नहीं। विधानसभा में भी बजरी तस्करी और इसे रोकने को लेकर पुलिस और खनिज अभियंताओं की भूमिका को लेकर सवाल उठ चुका है। हालांकि, खनन विभाग ने अप्रैल से अब तक 33 कार्रवाई कर 22.17 लाख रुपए जुर्माना वसूला।

घरों के बाहर बजरी के ढेर, रास्ता तक बंद कर दिया
भास्कर संवाददाता चाप नदी से सटे डाबरा पाड़ा नाम के एक गांव में पहुंचे। यहां का नजारा तो और भी हैरान करने वाला था। गांव से दूर एक वीराने से आते-जाते ट्रैक्टर दिखाई देने पर पीछा किया, आगे पहाड़ी पर इक्का-दुक्का कच्चे घर नजर आए। जिनके बाहर बजरी के टीले लगे थे। हमारे आने की पहले ही माफिया तक सूचना पहुंच चुकी थी। इसलिए नदी की उस जगह की ओर जाने वाले रास्ते पर पहले ही कांटे डालकर रास्ता बंद कर दिया गया। हमने उनसे ही पूछा कि रेती कहां मिलेगी। इस पर एक युवक ने बताया कि जगू भाई की मशीन पर, लेकिन तभी पास खड़े युवक ने उसे टोक दिया और बोला कि उन्हें नहीं पता। हम वहा से लौट गए।

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