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नए कोर्ट भवन में अधिवक्ता चैंबर नहीं बनाने पर सरकार से मांगा जवाब
माही कॉलोनी क्षेत्र में करोड़ों की लागत से बन रहे नए कोर्ट भवन परिसर में अधिवक्ता चैंबर का निर्माण नहीं करने पर दायर याचिका पर सुनवाई कर रही खंडपीठ ने पीडब्ल्यूडी, विधि विभाग, वित्त विभाग, रजिस्ट्रार उच्च न्यायालय एवं जिला न्यायाधीश बांसवाड़ा को नोटिस जारी किए हैं।
बांसवाड़ा बार एसोसिएशन ने इस संबंध में याचिका दायर की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष नंदलाल पुरोहित और सचिव हेमेंद्रनाथ पुरोहित ने बताया कि हाईकोर्ट की ओर से साल 2013 में नए कोर्ट भवन के निर्माण के लिए स्वीकृत नक्शे के आधार पर अधिवक्ता चैंबर एवं कवर्ड पार्किंग, पक्षकारों के लिए प्रतीक्षा कक्ष, स्टांप वेंडर्स एवं टायपिस्ट एवं ओथ कमिश्नर सहित संपूर्ण सुविधा युक्त परिसर का निर्माण नहीं किए जाने से व्यथित होकर एक जनहित याचिका उच्च न्यायालय जोधपुर की खंडपीठ के समकक्ष दायर की है। याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश की खंड पीठ ने नोटिस जारी करते हुए याचिका में उठाए गए आधारों को पर अपना जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। एसोसिएशन की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पीआर मेहता ने पूरे मामले में बताया कि हाइकोर्ट द्वारा साल 2013 में नए कोर्ट भवन और अधिवक्ता चैंबर्स का नक्शा अनुमोदित करते हुए कोर्ट भवन के साथ अधिवक्ताओं के चैंबर निर्माण के लिए निर्देश दिए थे। इसके लिए 2991.23 लाख की वित्तीय स्वीकृति जारी की थी, लेकिन पीडब्ल्यूडी ने चैंबर निर्माण के लिए निविदा जारी नहीं की। विभाग द्वारा 18.87 करोड़ के कार्यादेश अगस्त, 2018 में जारी किए। कोर्ट को बताया गया कि बार एसोसिएशन ने कई सिविल, रेवेन्यू और फौजदारी के कई अधिवक्ता दिए हैं। लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी सीनियर और जूनियर अधिवक्ताओं को चैंबर्स की व्यवस्था नहीं है। नए कोर्ट परिसर के नक्शे में भी चैंबर के लिए स्थान आवंटित है। लेकिन सारा बजट कोर्ट भवन निर्माण के लिए ही इस्तेमाल किया जा रहा है। निर्माण कार्य में घटिया सामग्री इस्तेमाल और निविदा जारी करने में अनियमितता बरतने की भी बात कही गई। अधिवक्ता मेहता ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा समान प्रकार के प्रकरणों में पारित दिशा निर्देशों का हवाला देते हुए पैरवी कर चैंबर निर्माण शीघ्र प्रारंभ किए जाने के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए जाने का निवेदन किया।