पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Banswara News Rajasthan News The Curtain Is Not Being Taken For Serious Crimes In The Police Record

संगीन अपराधों काे पुलिस रिकाॅर्ड में नहीं लेकर डाला जा रहा है पर्दा

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

एमजी अस्पताल में इन दिनों कई गंभीर अपराधों लाए जाने वाले घायलों और मृतकों का रिकॉर्ड दर्ज नहीं किया जा रहा है। जिससे अस्पताल में उपचार के बाद रिपोर्ट नहीं होने पर इनके बारे में पता नहीं चल पा रहा है। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में तो संदिग्ध मौत पर भी पोस्टमार्टम नहीं करवाया जा रहा है।

मामला किसी के फंदे से मृत लटके मिलने का हो या चाकूबाजी या फिर हमले का। ऐसे गंभीर अपराधों का रिकॉर्ड भी यहां की पुलिस चौकी में मनमाने तरीके से इंद्राज किया जा रहा है। मतलब, चाकूबाजी में अगर कोई घायल आया तो इसका कारण नहीं लिखा जा रहा है। हादसे में किसी की मौत के दो दिन बाद भी उसे घायल दर्शाया जा रहा है। ऐसे में कई गंभीर अपराध अस्पताल से घायल या मृतक के शव को ले जाने के बाद सामने नहीं आ पा रहे है। इससे पुलिस के आलाधिकारी भी पूरी तरह बेखबर है। रिकॉर्ड इंद्राज करने में यह लापरवाही तब बरती जा रही है जब अस्पताल में तीन पारियों में अलग-अलग कांस्टेबल की ड्यूटी लगाई जा रही है।

शुक्रवार रात को ही शहर की मुस्लिम कॉलोनी से एक 21 वर्षीय युवक को अस्पताल लाया गया। युवक के सीने में चाकू लगा था। जिसे एक टांका लेने के बाद ट्रोमा वार्ड में भर्ती करा दिया गया। बताया जा रह है कि किसी से युवक ने चाकू मारा था। अस्पताल पुलिस चौकी के रजिस्टर में बड़ी ही चतुराई से इसका उल्लेख कर दिया गया। जिसमें युवक का नाम तो लिखा गया है लेकिन वह क्यों अस्पताल लाया गया और वह कैसे घायल हुआ इसका कोई भी उल्लेख नहीं किया गया। यहीं वजह है कि चाकू लगने से युवक के घायल होने के बावजूद कोतवाली पुलिस इस मामले में पूरी तरह बेखबर रही। इस संबंध जब कोतवाल भैयालाल आंजना से बात की तो उन्हों ने बताया कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है। जबकि ऐसे मामलों में संबंधित विभाग के प्रभारी नर्सिंग कर्मी को भी पुलिस को सूचना देना जरूरी है।

खुदकुशी की, बिना पोस्टमार्टम शव ले गए


12 मार्च को शिवपुरा में सड़क हादसे में अरविंद कटारा नाम का युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था। जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। लेकिन, पुलिस चौके के रिकॉर्ड में उसे सिर्फ घायल ही दर्शाया जा रहा है। इसी प्रकार 13 मार्च को चंदूजी का गढ़ा गांव में शांति तीरगर अपने ही घर में फंदे से मृत लटका मिला। मामला संदिग्ध होने के बावजूद एमजी अस्पताल के रजिस्टर में ये लिखकर इतिश्री कर ली गई कि परिजन पोस्टमार्टम नहीं करवाना चाहते। लापरवाही की हद तो यहां तक है कि शुक्रवार को कलिंजरा में सड़क हादसे में दो युवक घायल हो गए। दोनों को एमजी अस्पताल लाया गया। यहां शैलेश नाम के युवक की मौत हो गई। पुलिस रजिस्टर में केवल शैलेश की मौत का ही उल्लेख किया गया है। जबकि दूसरे घायल व्यक्ति का नाम नहीं लिखा गया है।

महात्मा गांधी अस्पताल।
खबरें और भी हैं...