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नौगामा में गढ़ भेदने और खमेरा में सामूहिक गेर खेलने जुटे युवा
शहर और जिले में तीन दिन का होली पर्व धूमधाम से मनाया। गांवों में अलग-अलग रीति रिवाजों और परंपराआंे का निर्वहन किया। पूनम पर होलीका दहन, प्रतिपदा को ढूंढोत्सव, होली की परिक्रमा, पूजा अर्चना, सामूहिक गेर का आयोजन किया गया। कहीं जलती लकड़ियों की तो कहीं कंडों की राड़ खेली गई। नौगामा में गढ़ भेदन देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग उमड़े। युवाओं ने शक्ति प्रदर्शन कर गढ़ भेदा।
घाटोल. खमेरा के अंबे माता मंदिर परिसर में धुलंडी पर गेर नृत्य का आयोजन किया गया। इसमें युवक-युवतियों ने रंग बिरंगे कपड़ों में सजधज कर आए और सामूहिक गेर नृत्य में उत्साह से भाग लिया। युवकों ने सिर पर साफा बांधा, आंखों पर रंगीन चश्मे, हाथों में रंग बिरंगी रिबन से सजे लट्ठ लिए ढोल और चंग की थाप पर जमकर गेर नृत्य किया। सामूहिक गेर नृत्य में हजारों युवक-युवतियां शामिल हुई, जिसका ग्रामीणों ने स्वागत किया।
नौगामा. कस्बे में होली चोक पर मंगलवार को गढ़भेदन देखने ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ी। युवाओं ने शक्ति का प्रदर्शन करते हुए गढ़ भेदा। करीब एक घंटे तक चले इस गढ़भेदन में ग्रामीणों ने फागोत्सव के गीत भी गाए। गढ़भेदन में आसपास क्षेत्र के ग्रामीणों ने भाग लिया।
गनोड़ा. पालोदा में सोमवार को होलीका दहन के लिए गेरियों ने पूरे गांव से लकड़ी एकत्रित कर पूजा अर्चना के बाद होलीका दहन किया। गांव के चौक पर सर्व समाजजनों की मौजूदगी मंे होली जलाई गई। पालोदा गांव में प्राचीन काल से 36 कोमों की एक होली आज भी एकता, अखंडता भाईचारे और सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
चिड़ियावासा. जालेश्वर महादेव मंदिर पर चिड़ियावासा, रुजिया, सेमलिया के ग्रामीणों का सामूहिक होली मिलन समारोह हुआ। महिलाओं और युवतियों ने फाग गीतों पर नृत्य किया।
घाटोल में जलती लकड़ियों से खेली राड़, एक युवक घायल
घाटोल| कस्बे में होली पर कुछ अलग ही परंपराओं का निर्वहन किया जाता है। होलीका दहन के दूसरे दिन सूर्योदय के साथ जलती लकड़ियों की राड़ खेली जाती है। मंगलवार सुबह से ही कस्बे के पोस्ट चौराहे पर आमने सामने दो पक्ष एक दूसरे पर जलती हुई लकड़ियां मारने लगे। इसे देखने के लिए हजारों की संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए। जलती लकड़ियों से खेली गई राड़ में इस साल एक ही युवक घायल हुआ। हालांकि हर साल इस राड़ मंे कई लोग घायल हुए थे।
दोपहर में सुथारवाड़ा स्थित होली चौक और जैन समाज द्वारा वासुपूज्य दिगंबर जैन मंदिर परिसर में ढूंढोत्सव मनाया गया। शाम को पाटीदार समाज द्वारा पटेलवाड़ा में गेर नृत्य का आयोजन किया गया। ढोल की थाप पर गेर खेलते हुए युवा कुम्हारवाड़ा, लक्ष्मीनारायण मंदिर, सदर बाजार, पुराना बसस्टैंड स्थित शिव शक्ति मंदिर परिसर पहुंचे, जहां महाकालेश्वर मंदिर में आरती के बाद गेर का समापन हुआ।
गनोड़ा में दाे युवतियों की शादी कराकर मंदिर पर नृत्य किया
गनोड़ा. कस्बे में श्रीगौड़ ब्राह्मण समाज के लोग धुलेंडी के दिन बरसों से चली आ रही परंपरा का हर साल निर्वहन करते हैं। यहां पर महिलाएं दो युवतियों की शादी कराते हैं। निष्कलंक मंदिर पर दाे युवतियों का चयन कर इसमें से युवती के सिर पर साफा बांधते हैं और काला चश्मा पहनाकर हाथ में तलवार के रूप मंे एक लकड़ी दी जाती है। पारंपरिक तरीके से विवाह गीत गाए जाते हैं। रंग और गुलाल खेलकर युवतियों की शादी करवाई जाती है और फिर उनको मंदिर पर लाकर
सदभावना का संदेश : अरथूना में खेली कड़ों की राड़
नाैगामा. हाेली पर गढ़ भेदने का प्रयास करते युवा और इसे देखने के लिए उमड़ी भीड़।
कोरोना वायरस जैसी बीमारियों से बचने के लिए होली में कपूर, लौंग, इलायची, जौ और श्रीफल का किया होम
तलवाड़ा. कस्बे में विधि विधान और परंपरा अनुसार होली का उत्सव मनाया गया। बड़ा चौक पर होली में लौंग, इलायची, कपूर, श्रीफल, जौ और शुद्ध घी का होम किया, ताकि कोरोना वायरस समेत मौसमी बीमारियों से बचा जा सके। इसके अलावा औषधीय लकड़ियां और गोबर से बने कंडों का जलाए गए, जिससे वातावरण भी शुद्ध बना रहे। युवाओं की टोलियों ने फाग गीत गए। दोपहर में नवजात बच्चों को ढूंढाया गया। इसके अलावा जैन समाज, सोमपुरा समाज पर भी होली पर आयोजन हुए। वहीं कूपड़ा, सुंदनपुर, मसोटिया, कोहाला, कुशलपुरा, सुंदनपुर, गामड़ी, उमराई, भटवाड़ा में गेर नृत्य का आयोजन किया गया।
सज्जनगढ़ में 5 किलो कपूर का किया होम : सज्जनगढ़. कस्बे में होली का पर्व पूरी तरह से सुरक्षित रहकर मनाया गया। इन दिनों चल रहे कोरोना वायरस से बचाव के लिए लोगांे ने होली में 5 किलो कपूर का होम किया ताकि इसके धुंए से वातावरण शुद्ध रहे। होली में कपूर होम के बाद सभी लोगों ने परिक्रमा की और आग की तपन ली। युवाओं ने बताया कि इन दिनों कोरोना वायरस का जो डर है, उसे दूर करने के लिए होली में कपूर का होम किया। छाजा. चांदरवाड़ा कस्बे में मंगलवार काे कंडों की राड़ खेली गई। इसके बाद काकरी डूंगर व छायणा में राड़ खेली।
धर्म समाज संस्था
जैन मंदिर परिसर में ढूंढोत्सव मनाया गया। शाम को पाटीदार समाज द्वारा पटेलवाड़ा में गेर नृत्य का आयोजन किया गया। ढोल की थाप पर गेर खेलते हुए युवा कुम्हारवाड़ा, लक्ष्मीनारायण मंदिर, सदर बाजार, पुराना बसस्टैंड स्थित शिव शक्ति मंदिर परिसर पहुंचे, जहां महाकालेश्वर मंदिर में आरती के बाद गेर का समापन हुआ।
समाज के लोगों के सामने नृत्य करवाया जाता है। इसके अलावा जिस बच्चे की ढूंढ होती है उसके माता पिता और नवनिवाहित जोड़ों को भी नाचना पड़ता है।
छाजा. कस्बे में पंडित योगेश पंड्या द्वारा पूजा अर्चना के बाद होलीका दहन किया गया। जलती होली से प्रहलाद रूपी डंडे को सुरक्षित निकालकर युवाओं ने कुंए में डालकर ठंडा किया। मंगलवार को सर्व समाज के लोग होली चौक पर एकत्रित हुए। बच्चों को ढूंढाकर होली की परिक्रमा करवाई।
बागीदौरा. कस्बे के पुराना बसस्टैंड पर सोमवार को होलीका दहन किया। ग्रामीणों ने जलती होली की परिक्रमा की। धुलंडी पर दोपहर में वैष्णव समाजजनों ने ढोल की थाप के पास फागण गीतों पर खूब नाच किया। नवजात बच्चों को ढूंढाया गया।
आनंदपुरी. कस्बे में होलीका दहन के दूसरे दिन प्रतिपदा पर पारंपरिक गेर मेला भरा। इसमें हजारों लोगों ने उत्साह से भाग लिया। पूर्व सरपंच विनोद डामोर के नेतृत्व में नवाघरा और आसपास गांवों से आए महिला पुरुषों ने ढोल कुंडी, थाली, शहनाई की धुन पर हाथों में लट्ठ लिए गेर खेली। मेले में लगी दुकानों मंे खरीदारी के लिए भारी भीड़ जुटी। वहीं सिकुड़ते मेलास्थल की वजह से मेलार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जगह जगह निर्माण कर देने से मेलास्थल छोटा हो गया।
अरथूना. कस्बे के पोरड़ा बसस्टैंड पर होली पर सांप्रदायिक सदभाव और भाईचारे का अनोखा संगम देखने को मिलता है। यहां पर हिंदू समाज द्वारा कंडों की राड़ खेली जाती है। मुस्लिम समाज द्वारा कंडों और पानी की व्यवस्था की जाती है। सोमवार को भी पाेरड़ा बसस्टैंड पर कंडों के राड़ खेली गई। होली खेल रहे युवाओं और मेहमानों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया।
घाटोल. धुलंडी के दिन सुबह जलती लकड़ियों से राड़ खेलते घाटोलवासी।
गनोड़ा. होली पर शादी की परंपरा को निभाती दो महिलाएं।
घाटोल. खमेरा के अंबा माता मंदिर परिसर में हजारों की संख्या में गेर खेलते युवक-युवतियां।
तलवाड़ा में बीमारियों से मुक्ति के लिए जलती होली की परिक्रमा करते लोग।