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फसलों के लाभकारी मूल्य की मांग को लेकर किसान आंदोलन कल से

बारां| अखिल भारतीय किसान सभा, किसान संघर्ष समिति, नहरी किसान संघर्ष समिति सहित किसान संगठनों की ओर से फसलों के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:00 AM IST

फसलों के लाभकारी मूल्य की मांग को लेकर किसान आंदोलन कल से
बारां| अखिल भारतीय किसान सभा, किसान संघर्ष समिति, नहरी किसान संघर्ष समिति सहित किसान संगठनों की ओर से फसलों के लाभकारी मूल्य सहित तीन सूत्रीय मांगों को लेकर मंगलवार से आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसके तहत कोटा में संभागीय आयुक्त कार्यालय के सामने किसानों की ओर से क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा। वहीं 5 अप्रैल को बारां जिले सहित कोटा संभाग की मंडियों को बंद रखकर किसान मांगों को पूरा करने की मांग रखेंगे। रविवार को कृषि उपजमंडी स्थित किसान भवन में पत्रकारों से चर्चा में किसान नेताओं ने यह बात कही।

गालव ने कहा कि किसान परेशानी में हैं। फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। किसान कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। 29 मार्च को कोटा में सभी किसान संगठनों की बैठक हुई। इसमें निर्णय लिया कि जब तक आंदोलन नहीं होता है, तब तक सरकार की आंख नहीं खुलती है। इसके तहत मंगलवार से संभाग स्तर पर क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा। 5 अप्रैल को कोटा संभाग की सभी मंडियां बंद रखकर सरकार तक बात पहुंचाई जाएगी। किसानों की ओर से तीन प्रमुख मांगें की जा रही हैं। इनमें प्रदेश में गेहूं पर समर्थन मूल्य 1735 रुपए क्विंटल किया गया है, जबकि समीपवर्ती मध्यप्रदेश में किसानों को दो हजार रुपए क्विंटल दिए जा रहे हैं। सरकार की ओर से भावांतर के तहत 265 रुपए की भरपाई की जा रही है। लहसुन की समर्थन मूल्य 5 से 6 हजार रुपए क्विंटल के बीच निर्धारित कर सरकारी खरीद शुरू की जाए। सरसों व चना के लिए कांटे पर्याप्त नहीं है। कांटों की संख्या बढ़ाई जाए। साथ ही किसान की पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीद की व्यवस्था सरकार करे।

अखिल भारतीय किसान सभा के संयोजक फतेहचंद बागला ने कहा कि प्रदेश में मंडियों में गेहूं 1500 रुपए क्विंटल की दर से बिक रहा है। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। नहरी किसान संघर्ष समिति अध्यक्ष पवन यादव ने कहा कि किसानों को उड़द की फसल का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। जिससे किसानों को आर्थिक तंगी का सामना कर पड़ रहा है। नहरी किसान संघर्ष समिति के बृजमोहन मेघवाल ने कहा कि जिन खेतों में रबी की फसल नहीं हुई और खेत पड़त रह गए। उनका प्रशासन की ओर से पटवारियों द्वारा कोई सर्वे तक नहीं कराया गया और राजस्व की वसूली की जा रही है। पदाधिकारियों ने सरकार पर व्यापारियों व कंपनियों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया। इस दौरान किसान पंचायत के प्रदेश संयोजक सत्यनारायण सिंह, अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष दुलीचंद बोरदा, हाड़ौती किसान संघर्ष समिति के नंदकिशोर शर्मा, किसान सर्वोदय नहरी किसान संघर्ष समिति के अब्दुल हमीद गौड़, परवन परियोजना संयोजक रामेश्वर मीणा आदि ने किसानों की मांगें रखी। इस दौरान किसान सभा के तहसील संयोजक मुरली भड़सुई, पवन बामली, हरिओम मीणा भड़सुई आदि मौजूद थे।

बारां. पत्रकारों से चर्चा करते किसान नेता।

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