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मंडी में लागत के बराबर भी नहीं मिल रहे थे दाम समर्थन मूल्य का दायरा बढ़ाने से राहत की आस

केंद्र सरकार की ओर से गुरुवार को पेश हुए आम बजट में खरीफ फसलों को समर्थन मूल्य के दायरे में लाने पर किसानों ने खुशी...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 02:05 AM IST
मंडी में लागत के बराबर भी नहीं मिल रहे थे दाम समर्थन मूल्य का दायरा बढ़ाने से राहत की आस
केंद्र सरकार की ओर से गुरुवार को पेश हुए आम बजट में खरीफ फसलों को समर्थन मूल्य के दायरे में लाने पर किसानों ने खुशी जताई। किसानों का कहना है कि मंडी में लागत के बराबर भी फसलों के दाम नहीं मिल रहे हैं। सरकार की ओर से किसानों के उपज के दाम निर्धारित किए जाएं, जिससे लागत के साथ मुनाफा भी मिल सके। किसानों का कहना है कि समय के साथ प्रत्येक क्षेत्र में महंगाई लगातार बढ़ रही है। इसके मुकाबले किसानों को फसल के दाम नहीं मिल रहे हैं।

मंडी में समर्थन मूल्य से कम भाव पर कृषि जिंसों की खरीद की जा रही है। इससे किसानों की लागत भी नहीं निकल रही है। हालात यह हैं कि किसान केसीसी का कर्ज चुकाने के लिए बाजार से उधार लेने को मजबूर हो रहे हैं। फसल बीमा योजना में भी समय पर क्लेम नहीं मिल रहा है। सर्वे से लेकर क्लेम की प्रक्रिया भी कंपनियों की मनमानी पर ही निर्भर करती है। सरकार की ओर से बजट में किसानों को समर्थन मूल्य और मंडी में फसल के दामों को लेकर एमपी की तरह भावांतर की व्यवस्था लागू की जाती तो किसानों को राहत मिल सकती थी। बजट में कृषि यंत्र निर्माताओं को टैक्स फ्री करने, पशुपालकों को केसीसी से जोड़ने और खरीफ फसल को समर्थन मूल्य के दायरे में लाने पर किसानों ने खुशी जताई है।

किसान बोले-महंगाई ने कमर तोड़ी, केसीसी का कर्ज चुकाने में आ रहे पसीने

बारां. कृषि उपज मंडी में नीलामी के लिए पहुंची कृषि जिंस की तुलाई के बाद लगे बाेरियों के ढेर।

फसलों के भाव नहीं मिलने से किसानों की हालत खराब

धनिया 4100 रुपए क्विंटल ही बिका है। फसल में मजदूरी बढ़ गई है। डीजल के भाव बढ़ गए हैं। बच्चों की फीस तक नहीं चुका पा रहे हैं। बिजली के बिल भी बढ़े हुए आ रहे हैं। सरकार किसानों को राहत नहीं दे पा रही है। बजट से राहत मिलने उम्मीद थी लेकिन निराशा ही मिली है।

हेमराज मीणा, बपावर

मंडी में मुनाफाखोरी पर लगाम लगना जरूरी

10 हजार रुपए क्विंटल में तेलीय उड़द का बीज खरीदा था। अब मंडी में फसल लेकर आए हैं, तो दो हजार रूपए क्विंटल का भाव मिल रहा है। सरकार इस मुनाफाखोरी को बंद करने का कदम उठाए, तो किसानों को राहत मिलेगी। 3 लाख की केसीसी चुकाने के लिए बाजार से उधार रकम उठानी पड़ेगी।

- उमाशंकर गौतम, निपानियां

फसलों का उचित दाम नहीं, बजट से मिली कुछ राहत

पिछले साल उड़द का भाव 6 हजार रुपए क्विंटल था। अब मंडी में 2 हजार रुपए क्विंटल का भाव दिया जा रहा है। 4 लाख की केसीसी चुका नहीं पा रहे हैं। किसानों ने बड़ी मात्रा में लहसुन बोई थी। अब भाव 200 रुपए क्विंटल रह गए हैं। किसान फैंकने को मजबूर हो रहे हैं। बजट में प्रावधान किए हैं।

- चौथमल नागर, निपानियां

सरकार की ओर से किए प्रावधानों का मिले लाभ

मंडी में उड़द के भाव 3400 रुपए क्विंटल के मिले हैं। सरकार की ओर से किए गए प्रावधानों का किसानों को जमीनी स्तर पर फायदा नहीं मिलता है। सरकार समर्थन मूल्य घोषित करती है। इससे कम भाव में मंडी में खरीद नहीं हो। इसको लेकर व्यवस्था लागू होनी चाहिए।

- बालमुकुंद नागर, निपानियां

पशुपालकों को केसीसी से जोड़ने से बढ़ेगी आय

किसानों के बिल 6 हजार से बढ़कर 24 हजार तक के आ रहे हैं। बिजली भी कम समय दी जा रही है। फसलों की सिंचाई हो नहीं रही है। पशुपालकों को केसीसी से जोड़ने से किसानों वर्ग की आय में इजाफे की उम्मीद है। - बहादुर, बपावर

मप्र की तर्ज पर भावों में अंतर की व्यवस्था हो

मानसून कमजाेर रहने से फसल कमजोर हुई है। मंडी में भाव कम मिल रहे हैं। 1 लाख 80 हजार की केसीसी चुकाने के रुपए भी नहीं है। सरकार को मध्यप्रदेश की तरह किसानों को भावांतर की व्यवस्था करनी चाहिए थी। पशुपालकों को केसीसी से जोड़ने से फायदा होगा।

- रामस्वरूप किराड़, बैंहटा

किसानों के कर्ज को लेकर भी उठाना चाहिए कदम

सरकार की ओर से किसानों के कर्ज को लेकर भी उचित कदम उठाने चािहए थे। बारिश कम होने से आधी जमीन पड़त रह गई है। केसीसी चुकाने के लिए कर्ज लेना पड़ेगा। खरीफ फसल को समर्थन मूल्य से जोड़ने से फायदा मिलेगा।

- बद्रीलाल माली, टारड़ा

मंडी में फसल का पूरा दाम मिले, इसके हों इंतजाम

इस साल फसल नहीं होने से दो लाख रूपए की केसीसी नहीं चुक रही है। सरकार से बजट में किसानों को कर्ज में राहत की उम्मीद थी, लेकिन नहीं मिल सकी है। मंडी में फसल का पूरा दाम नहीं मिल रहा है। इसमें सुधार के इंतजाम होने चाहिए थे।

- चंद्रेश सिंह, तिसाया

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