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बाल विवाह रोकने के लिए सजग रहें, ताकि इस कुरीति का जड़ से हो खात्मा: बाडदार

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से दो चरणों में पांच महीने तक बाल विवाह निषेध अभियान चलाया जाएगा। न्यायाधिपति...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:05 AM IST

बाल विवाह रोकने के लिए सजग रहें, ताकि इस कुरीति का जड़ से हो खात्मा: बाडदार
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से दो चरणों में पांच महीने तक बाल विवाह निषेध अभियान चलाया जाएगा। न्यायाधिपति गोवर्धन बाडदार ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय से विधिक जनजागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अभियान दो चरणों में 1 अप्रैल से 30 जून तक तथा 1 नवंबर से 31 दिसंबर तक चलाया जाएगा। समारोह के दौरान न्यायाधिपति बाडदार ने बाल विवाह निषेध अभियान के तहत कानूनी जानकारी से संबंधित पोस्टर का विमोचन किया। समारोह के दौरान न्यायाधिपति बाडदार ने कहा कि बाल विवाह के कारण बाल मृत्यु दर में बढ़ोतरी होती है।

बच्चियों के जल्दी मां बन जाने के कारण उनका भी स्वास्थ्य प्रभावित होता है तथा बच्चियों की शिक्षा अधूरी रह जाती है। बाल विवाह प्रतिषेध अभियान 2006 में कठोर दंड के प्रावधान किए हुए हैं। अत: इस संबंध में विधिक सेवा प्राधिकरण, पुलिस व प्रशासन को आपसी समंवय करते हुए इन प्रावधानों की जानकारी आमजन तक पहुंचानी चाहिए। प्रशासन एवं न्यायपालिका मिलकर व संकल्पबद्ध होकर कार्य करेंगे, तो निश्चित रूप से समाज से इस कुरीति का खात्मा हो जाएगा। कार्यक्रम के दौरान न्यायाधिपति कैलाशचंद्र शर्मा, जिला एवं सेशन न्यायाधीश रविंद्र कुमार माहेश्वरी, कलेक्टर डाॅ. एसपी सिंह, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट लोकेश कुमार शर्मा व अन्य न्यायिक अधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम में आशा सहयोगिनी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा बच्चे भी उपस्थित थे।

बारां. न्यायाधिपति बाडदार ने बाल विवाह निषेध अभियान के तहत कानूनी जानकारी से संबंधित पोस्टर का विमोचन किया।

बारां. बाल विवाह निषेध अभियान की शुरुआत के दौरान निकाली गई जागरूकता रैली।

पारिवारिक न्यायालय के नवीन भवन का लोकार्पण

बारां| मिनी सचिवालय परिसर स्थित पारिवारिक न्यायालय के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण न्यायाधिपति गोवर्धन बाडदार न्यायाधीश, राजस्थान उच्च न्यायालय ने रविवार को किया। भवन के लिए 2 करोड़ 56 लाख का बजट आवंटित किया गया था। लोकार्पण समारोह में न्यायाधिपति बाडदार ने कहा कि पारिवारिक न्यायालय की कार्यप्रणाली सामान्य न्यायालय से भिन्न होती है। यह न्यायालय परिवार को जोड़ने व बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अतः पारिवारिक न्यायालय की कार्यप्रणाली में अधिनियम के तहत अधिरोपित की गई शर्तों या पाबंदियों की पालना करते हुए कार्य करना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान न्यायाधिपति कैलाशचंद शर्मा, जिला एवं सेशन न्यायाधीश रविंद्र कुमार माहेश्वरी, कलेक्टर डाॅ. एसपी सिंह व पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीश अरुण कुमार दुबे मंचासीन थे। न्यायाधिपति ने रविवार को न्यायालय परिसर में स्थित जिला अभिलेखागार का भी लोकार्पण किया।

प्रदेश के 16 जिलों में चलेगा अभियान

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट लोकेश कुमार शर्मा ने बताया कि राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने प्रदेश में 14 जिले चिंहित किए हैं। जहां बाल विवाह अधिक हो रहे हैं। इनमें बारां भी शामिल हैं। इन जिलों में पांच महीने तक बाल विवाह निषेध अभियान चलाया जाएगा।

बारां. नए भवन का उद्‌घाटन करते न्यायाधिपति गोवर्धन बाडदार व अन्य अतिथि।

दो साल की जेल का है प्रावधान

कार्यक्रम में जिला एवं सेशन न्यायाधीश रविंद्र कुमार माहेश्वरी ने कहा कि विधायिका ने बाल विवाह की कुरीति को दूर करने के लिए 2006 में बाल विवाह निषेध अधिनियम पारित किया। इसमें दाे साल तक की सजा और एक लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान किया गया। बाल विवाह में किसी प्रकार का सहयोग करते हुए हलवाई, पंडित, टेंट, घोड़ी वाला व अन्य सभी इस अधिनियम के अनुसार अपराधी माने जाते हैं। इस अधिनियम के प्रावधानों के प्रति आमजन को जागरूक करने के लिए पैरालीगल वाॅलेंटियर, न्यायाधीश, पैनल अधिवक्ता जगह-जगह विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन करेंगे।

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