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शाहाबाद क्षेत्र में क्रूड आॅयल की मौजूदगी के संकेत, बदल जाएगी इलाके की तस्वीर

आदित्य शर्मा/अनिल भार्गव| बारां/राजपुर सैटेलाइट सर्वे के आधार पर हाड़ौती में पेट्रोलियम पदार्थों की अच्छी...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:25 AM IST
आदित्य शर्मा/अनिल भार्गव| बारां/राजपुर

सैटेलाइट सर्वे के आधार पर हाड़ौती में पेट्रोलियम पदार्थों की अच्छी उपलब्धता के संकेत मिलने पर ओएनजीसी के तहत अल्फा जियाे इंडिया लिमिटेड की टीम ने जिले में सर्वे शुरू कर दिया है। खास बात यह है कि सर्वे में क्रूड ऑयल को लेकर अच्छे संकेत मिल रहे हैं। मशीनों से गहराई में जाकर ब्लॉस्ट कर एक्सरे लिया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट मार्च 2019 तक आएगी। इसके बाद थ्री डी सर्वे किया जाएगा। उसकी फाइनल रिपोर्ट आने पर आगामी कार्रवाई प्रारंभ होगी। जिले में पेट्रोलियम पदार्थों की अच्छी मात्रा मिलने पर इस क्षेत्र के सरसब्ज होने की उम्मीद है।

पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से देशभर में जमीन के भीतर क्रूड ऑयल की मौजूदगी को लेकर सैटेलाइट सर्वे किया गया है। इसके आधार पर ओएनजीसी के तहत कंपनी अल्फा जियाे इंडिया लिमिटेड एमपी सहित प्रदेश के हाड़ौती में बारां, झालावाड़ और कोटा जिले में सर्वे करेगी। फिलहाल बारां के शाहाबाद ब्लॉक के मुहाल, ओडाखारा, बांसखेड़ा, समरानियां, गणेशपुरा आदि स्थानों पर सर्वे किया है। टीम समीपवर्ती एमपी के कराहल के जंगल में भी सर्वे कर रही है। सूत्रों के अनुसार टीम को शाहाबाद क्षेत्र से अच्छे डाटा प्राप्त हो रहे हैं। टीम रिपोर्ट तैयार कर नमूनों का परीक्षण कराएगी। अच्छी संभावना वाले क्षेत्रों में थ्री डी सर्वे शुरू होगा। इसके परिणाम आने पर क्रूड ऑयल भंडारों की मौजूदगी की फाइनल रिपोर्ट मिलेगी। इंडिया सेक्टर 9 विंध्यान, नर्मदा और सतपुड़ा बेसिन में यह सर्वे किया जा रहा है।

ओएनजीसी की टीम पेट्रोलियम पदार्थों के सर्वे में जुटी, रिपोर्ट 2019 तक

प्राथमिक जांच के बाद थ्रीडी सर्वे करेगी टीम

मशीन से ड्रिलिंग की जा रही है।

नॉलेज: ऐसे मिलती है पेट्रोलियम स्टॉक की जानकारी: कंपनी के फील्ड इंचार्ज अजय मिश्रा के अनुसार मुख्यत: यह सर्वे जमीन में क्रूड ऑयल और प्राकृतिक गैस की मौजूदगी को लेकर है। सैटेलाइट सर्वे में जमीन के भीतर हलचल के आधार पर पेट्रोलियम पदार्थों के भंडार का पता लगता है। निश्चित स्थान पर बोरिंग करने के बाद अंदर ब्लास्ट करते हैं और पूरा एक्स-रे लेते हैं। इसके साथ सेंटर भी लगाया जाता है, यह जमीन के भीतर की हलचल को रिकॉर्ड करता है। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाती है। यह डाटा मिलने पर छह माह बाद जांचा जाता है। इसमें पुख्ता होता है कि जमीन के अंदर कुछ है। इसके बाद थ्री डायमेंशनल सर्वे किया जाता है। वर्तमान में टू डायमेंशनल सर्वे किया जा रहा है।

राजपुर. पेट्रोलियम पदार्थों की खोज में जुटी ओएनजीसी की टीम।

60 से 100 मीटर की गहराई से ले रहे नमूने

60 से 100 मीटर की गहराई तक ड्रिलिंग करते हैं। इसमें एक्सरे व्यू के साथ कैमरा व्यू भी लिया जाता है। सैटेलाइट से सीधी पट्टियां मिली है। इसके अनुसार सर्वे हो रही है। शाहाबाद क्षेत्र में किए जा रहे सर्वे में प्राकृतिक गैस और क्रूड ऑयल को लेकर अच्छे संकेत मिले हैं।

3 किमी में 200 प्वाइंटों पर हो रही है जांच

एमपी के श्योपुर और बारां, कोटा, झालावाड़ में करीब 50 हजार प्वाइंटों पर जांच होनी है। इनमें से 11 हजार प्वाइंटों पर जांच की जा चुकी है। शेष प्वाइंटों पर जांच की जा रही है। टीम वर्तमान में राजस्थान बॉर्डर के समीप एमपी के कराहल के जंगल में सर्वे कर रही है। कोटा में भी सर्वे के लिए जिला प्रशासन से अनुमति ली गई है। इसमें 3 किमी क्षेत्र में करीब 200 प्वाइंटों पर जांच होती है।

किसानों से अनुमति लेने के बाद करते हैं जांच

कंपनी के क्रॉप विभाग के राहुल पंवार ने बताया कि जिले में सर्वे के लिए प्रशासन से अनुमति ली गई है। साथ ही किसी किसान के खेत पर प्वाइंट होने पर उससे अनुमति ली जाती है। उसके खेत में फसल आदि को लेकर मुआवजा भी दिया जाता है। किसानों को पर्याप्त राशि दी जाती है।

कस्बाथाना में मिल चुका है लाइम स्टोन का भंडार

जिले के कस्बाथाना में भू विज्ञान विभाग की ओर से कराए सर्वे में बड़ी मात्रा में लाइम स्टोन का भंडार मिल चुका है। इसकी मात्रा को लेकर भी सर्वे मशीनों के माध्यम से जांच आगे बढ़ रही है। सबकुछ ठीक रहा तो क्षेत्र खनिज और पेट्रोलियम पदार्थों का बड़ा क्षेत्र बन सकता है।

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