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40 साल में नहीं बनी 7 किमी सड़क, 20 किमी का चक्कर लगा रहे 35 हजार लोग

एक वर्ष पहले
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कस्बे को राजपुर सहित मध्यप्रदेश से जोड़ने वाला 7 किमी सड़क मार्ग को लेकर पिछले 40 साल से मांग की जा रही है। सड़क निर्माण नहीं होने से हर दिन इससे जुड़े 18 गांवों के लोगों को 20 किमी का चक्कर लगाकर आना पड़ रहा है। राज्य सरकार की ओर से बजट भी जारी कर दिया गया है, लेकिन वन विभाग की क्लीयरेंस नहीं मिलने से इसका निर्माण अटका हुआ है। कस्बेवासियोंने इसका निर्माण जल्द शुरू कराने की मांग की है।

कस्बे से सीधा राजपुर जाने के लिए सिहारी घाटी होकर स्टेट टाइम से रास्ता बना हुआ था। बाद में पीडब्ल्यूडी की ओर से मुंडियर होकर सड़क का निर्माण करवाया गया। एेसे में यह दूरी बढ़कर 20 किमी हो गई। इससे लोगों को 13 किमी अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा है।

मुख्यालय के लिए सीधी पहुंच जरूरी

कस्बेवासी कमल श्रीवास्तव, राजेंद्र तोमर, सुनील गर्ग आदि ने बताया कि क्षेत्र के लोगों को उपखंड मुख्यालय पर आने के लिए सुगम रास्ता मिलना चाहिए। राजपुर के लिए रियासतकाल से सीधा मार्ग था। बाद में इस पर ध्यान नहीं दिया गया। अब मार्ग का निर्माण जल्दी होना चाहिए, जिससे क्षेत्र के लोगों को राहत मिल सके।

सड़क के लिए 3 करोड़ का है बजट

पीडब्ल्यूडी के अनुसार सरकार की ओर से इस मार्ग के लिए करीब 3 करोड़ रुपए का बजट भी स्वीकृत कर दिया है, लेकिन मामला वन विभाग की ओर से स्वीकृति के लिए लखनऊ भेजा है। वहां पर पहली स्वीकृति के बाद दूसरी स्वीकृति के लिए फाइल गई है।

सात किमी राजपुर रोड के निर्माण को लेकर करीब 3 करोड़ का बजट आ चुका है। इसमें वनभूमि आ रही है। ऐसे में लखनऊ से पहली कार्रवाई पूरी कर ली गई है। अब दूसरी कार्रवाई की जा रही है। इसमें भी जल्द कार्रवाई होने की उम्मीद है।
-अशोक सांध्य, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी

यह तस्वीर बदलनी चाहिए...सड़क पर खरंजा ऐसा कि पैदल चलना भी मुश्किल

सड़क बनी तो यह फायदा 18 गांवों के लिए घट जाएगी 13 किमी की दूरी

इस मार्ग के बनने से शाहाबाद, राजपुर, बैंहटा, बड़ारा, आनासागर, किराड़ पहाड़ी, हाड़ौता, तेलनी, सेमलीफाटक, गणेशपुरा, जखोनी सहित 18 से अधिक गांवों के लिए दूरी 13 किमी तक घट जाएगी। अभी लोगों को विभिन्न मार्गों से पहुंचना पड़ता है। आवाजाही के साधन नहीं मिलने के साथ समय भी अधिक लग रहा है। इस रास्ते के पक्के निर्माण की मांग 80 के दशक से की जा रही है। सरकार की ओर से बजट जारी किया गया, तो मामला वन विभाग की स्वीकृति में अटक गया। क्षेत्रवासियों ने वन विभाग की जल्द क्लीरेंस कराकर निर्माण कराने की मांग की है।

शाहाबाद. कस्बे से राजपुर के लिए परंपरागत मार्ग पर ग्रेवल और खरंजा हो रहा है। इस रास्ते के पक्के निर्माण की मांग की जा रही है।
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