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मंजरी से लकदक हुए आम के 7800 पेड़, इस साल अच्छी बारिश से 2730 मीट्रिक टन बढ़ेगा उत्पादन
जिलेभर में आम के पेड़ों पर इन दिनों फूल मंजरी अाना शुरू हो गया है। अधिकांश पेड़ों में सघनता अधिक होने से पेड़ आकर्षक लग रहे हैं। इस साल जिले में 7800 पेड़ों में फूल (मंजरी) आ रहे हैं। इससे आम का उत्पादन 2730 मीट्रिक टन बढ़ जाएगा। किसानों को आम के अच्छे दाम मिलने से आय भी हो सकेगी।
जिले में इस साल अच्छी बारिश होने से आम का उत्पादन बढ़ेगा। आम के पेड़ों पर फूल आ रहे हैं। अच्छे फल लगने पर किसानों को भी अच्छी आमदनी की उम्मीद है। उद्यान विभाग के सहायक निदेशक नंदबिहारी मालव ने बताया कि पिछले साल जिले में पिछले साल 175 हैक्टेयर में आम की खेती हुई थी। किसानों के जागरूक होने से इस बार आम की खेती 50 हैक्टेयर बढ़ी है। इस बार जिले में कुल 225 हैक्टेयर में आम का उत्पादन होगा।
उद्यान विभाग के अनुसार जिले में पिछले साल 5 हजार 460 पेड़ों पर आम का फलाव हुआ था। इस बार यह बढ़कर 7800 पेड़ों में फलाव होगा। जिले में कैरी के आम वाले पेड़ों की संख्या ज्यादा है। जिले के घाटी वाले क्षेत्रों में अनुकूल परिस्थितियों व जलवायु के कारण कैरी के फलों की संख्या अच्छी होती है। जिले में हाल ही में दीगोदपार में किसान की ओर से आम का बगीचा लगाया गया है। इससे आने वाले सालों में उत्पादन बढ़ने की संभावना हैै।
आम के पेड़ों को ऐसे रोग लगने से बचाएं किसान
सहायक निदेशक मालव ने बताया कि इस साल आम की अच्छी पैदावार की संभावना है। आम को सफेद फफूंद से बचाने के लिए दो ग्राम सल्फर पाउडर को एक लीटर पानी में मिलाकर उसका छिड़काव करना चाहिए। पौधों की 1 से लेकर दस वर्ष की अवस्था तक प्रति पौधा प्रति वर्ष 170 ग्राम. यूरिया, 110 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट और 115 ग्राम पोटाश का म्यूरियेट और उसके बाद 1.7 किग्रा 1.1 किग्रा दो समान यात्राओं में (जून-जुलाई और अक्टूबर) दिया जा सकता है।
किसानों की बढ़ेगी आय...एक आम का पेड़ देता है 5 से 6 क्विंटल पैदावार
लंगड़ा, तोतापारी और दशहरी हैं प्रमुख किस्म
उद्यान विभाग के सहायक निदेशक मालव ने बताया कि जिले में लंगड़ा, दशहरी, तोता, आम्रपाली, मल्लिका और केसर की किस्म के आम होते हैं। एक आम के पेड़ से 5 से 6 क्विंटल आम की पैदावार होती है। जलवायु अनुकूल हो तो आम्रपाली आम की एक हैक्टेयर में 16 टन की फसल होती है। आम को उष्ण कटिबंधीय और उष्णीय जलवायु में उगाया जा सकता है। बशर्ते कि पुष्पन अवधि के दौरान उच्च आर्द्रता, वर्षा या सर्दी न हो।
बारां. किसानों के जागरूक होने से इस बार आम की खेती 50 हेक्टेयर बढ़ी है। एक खेत में मंजरियों से लदा आम का पेड़।