ट्रांसफार्मर बदलने की जिम्मेदारी निगम की, एईएन स्तर से भेज रहे मुख्यालय

Baran News - बारां. बिजली निगम की अनदेखी के चलते ट्रांसफार्मर व अन्य उपकरण जलभराव में पड़े हुए हैं। धान की सिंचाई व रबी की...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 07:10 AM IST
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बारां. बिजली निगम की अनदेखी के चलते ट्रांसफार्मर व अन्य उपकरण जलभराव में पड़े हुए हैं।

धान की सिंचाई व रबी की बुवाई को लेकर समय पर बिजली कनेक्शन शुरू नहीं होने से किसान हो रहे हैं परेशान

भास्कर न्यूज| बारां

जिले में अतिवृष्टि के बाद किसान की खरीफ की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। ऐसे में सोयाबीन, उड़द व मंूग की फसल बर्बाद होने के बाद किसान अब बची हुई फसल धान से पैदावार निकलने की उम्मीद लगाकर बैठे हैं। इस सबके बीच बिजली निगम के अधिकारियों की मनमानी के चलते किसानों को कनेक्शन के बाद सिंचाई के लिए ट्रांसफार्मर लेने के लिए अधिकारियों व कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

जिले में निगम द्वारा बरसात के पहले बिजली कनेक्शन देने के बाद कई किसानों को डीपी नहीं दी गई थी। ऐसे में अब ज़रुरत पड़ने पर किसानों को समय पर डीपी नहीं मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई किसानों की डीपी जलने के बाद नई डीपी के लिए भी चक्कर काटना पड़ रहा है। किशनगंज क्षेत्र के लोलकिया निवासी बजरंगलाल एक माह से डीपी के लिए किशनगंज सहायक अभियंता कार्यालय के चक्कर काटने के साथ ही सैकड़ो किसान डिपियों के लिए कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।

ऐसे में किसान सहायक अभियंता कार्यालय के कर्मचारियों के कहने पर ट्रांसफार्मर लेने के लिए मुख्यालय पर ही आ रहे हैं। स्टोर रुम में जलभराव व कीचड़ के बीच पड़ी सामाग्री को उठाने को लेकर काफी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते किसान वापस लौट रहे हैं। एेसे में विभागीय उदासीनता व नियमों के विपरीत निगम में हो रहे कार्यों के चलते किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

समस्या: निगम के अधिकारियों की बेपरवाही के चलते स्टोर रूम में भरा पानी कैसे लाए डीपी

किसान महापंचायत के प्रदेश संयोजक सत्यनारायण सिंह, जिलाध्यक्ष कैप्टन रघुवीर सिंह, जगदीश शर्मा, कृष्णमुरारी नागर ने कहा कि निगम के अधिकारियों की बेपरवाही के चलते कोटा रोड स्थित बिजली निगम के स्टोर में करोड़ों रुपए के थ्री फेस के ट्रांसफार्मर खुले में पड़े हुए हैं। लगातार 3 माह से बरसात के चलते इनके नीचे पानी भरने से आयल में पानी मिक्स हो गया है। कीचड़ व जलभराव होने के बाद यहां से ट्रांसफार्मर को ले जाने के लिए भी किसानों से लेकर विभाग के कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जलभराव व कीचड़ के चलते विभाग के द्वारा खुले में पड़े ट्रांसफार्मर व अन्य उपकरणों के भी खराब होने की संभावना बनी हुई है। विभाग को इन बिजली के उपकरणों को स्टोर रूम में पानी से बचाकर रखना चाहिए। राज्य सरकार की ओर से किसी भी किसान के खेत के ट्रांसफार्मर के जलने के बाद सूचना मिलते ही तीन दिन के अंदर स्वंय पुराने व जले ट्रांसफार्मर को खुद विभाग की टीम द्वारा विभाग के स्टोर रूम तक लाने की जिम्मेदारी है। इसके बाद 3 दिन के अंदर एसटीएम की टीम द्वारा नए ट्रांसफार्मर को किसान के खेत तक ले जाकर लिफ्टर के माध्यम से लेकर जाकर बदलने का कार्य पूरा किया जाता है। जिले में ना तो एसटीएम की टीम द्वारा कार्य किया जा रहा है ना ही किसान के ट्रांसफार्मर को 3 दिन के अंदर बदला जा रहा है।


पानी के बीच से कैसे लाएं निकालकर

किशनगंज क्षेत्र के लोलकिया निवासी बजरंगलाल ने बताया कि एक माह पहले ट्रांसफार्मर जलने के बाद उसको बदलने के लिए सहायक अभियंता किशनगंज को लिखित में सूचना दी गई थी। बरसात के दौरान सिंचाई की ज़रुरत नहीं पड़ी। अब धान में सिंचाई के साथ ही रबी की फसल के लिए ट्रांसफार्मर की ज़रुरत पड़ रही है। उपखंड में ऐसे ही 26 अन्य किसानों द्वारा भी ट्रांसफार्मर बदलने के लिए सूचना विभाग को दी गई। अब तक एक भी किसान के ट्रांसफार्मर को नहीं बदला गया है। निगम के स्थानीय अधिकारी बारां से डीपी लाने की बात कह रहे हैं। बारां में भी स्टोर रुम में कीचड़ के बीच से डीपी को निकालना मुश्किल काम हो रहा है।

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