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जानलेवा बन रहा बुखार, 20 दिन में 4 ने गंवाई जान, रोकथाम से ज्यादा आंकड़े छुपाने में जुटे जिम्मेदार

Baran News - जिले में मौसम में लगातार आ रहे बदलाव से मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। दिन के समय में उमस और गर्माहट और रात के समय सर्द...

Nov 10, 2019, 07:11 AM IST
जिले में मौसम में लगातार आ रहे बदलाव से मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। दिन के समय में उमस और गर्माहट और रात के समय सर्द अहसास लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। बीते सप्ताह डेंगू के 8 मरीज सामने आए हैं। वहीं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग एक भी मृत्यु नहीं बता रहा है। जबकि 20 दिनों में 4 जनों की मृत्यु हो चुकी है। इनके परिजनों का दावा है कि मृतकों में डेंगू बुखार के लक्षण थे। बीमारों और मौतों के लगातार सामने आने के बाद भी रोकथाम के इंतजाम करने के बजाय जिम्मेदार आंकड़ों को छिपाने या जानकारी नहीं होने का हवाला देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने में लगे हैं। समय रहते स्थिति को काबू नहीं किया गया, तो आगामी समय में हालात विकट होने का अंदेशा बना हुआ है।

शहर से लेकर ग्रामीण व कस्बाई क्षेत्रों में लगातार मरीज सामने आ रहे हैं। चिकित्सा विभाग के अधिकारी सिर्फ एक ही जवाब दे रहे हैं कि जिले में डेंगू से अभी तक कोई मौत नहीं हुई। जबकि गत 20 दिनों के भीतर ही जिले में जिन 4 मरीजों की मृत्यु हुई है। उनके परिजन डेंगू के लक्षण होने का दावा कर रहे हैं। वर्तमान में स्थिति यह है कि दिन के समय अधिकतम तापमान 30 डिग्री और न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस बना हुआ है। घर में कूलर, टंकी में भरे पानी में डेंगू के मच्छर पनप रहे हैं। वहीं आसपास खाली प्लाट और नालियों में जलभराव के कारण मच्छरों का प्रकाेप बना हुआ है। समस्या के समाधान को लेकर प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। लोगों ने डेंगू की रोकथाम के लिए सर्वे और मच्छरों की रोकथाम के कदम उठाने की मांग की है।

बारां. शहर के जिला अस्पताल में भर्ती मरीज।

एलाइजा टेस्ट ही मान्य, कार्ड टेस्ट से डेंगू की पुष्टि संभव नहीं

चिकित्सा विभाग के अधिकारियों का कहना है डेंगू की पुष्टि एलाइजा टेस्ट से ही होती है, जो सरकारी अस्पताल में होता है। कार्ड टेस्ट से मरीज को संदिग्ध श्रेणी में रख सकते हैं, लेकिन इससे डेंगू की पुष्टि करना संभव नहीं है। यह भी तर्क दिया जा रहा है कि कार्ड टेस्ट में बुखार के मरीज की भी जांच की जाए तो उसमें डेंगू पॉजीटिव आएगा, इसलिए एलाइजा टेस्ट ही मान्य है। यहां भर्ती मरीजों को एलाइजा टेस्ट से ही डेंगू की पुष्टि कराई जाती है। चिकित्सा विभाग यह तर्क भी नहीं दे सकता कि मृतकों का एलाइजा टेस्ट नहीं हुआ था।

दाे विभागों के बीच फसी शहर में फोगिंग करने का काम

शहर में हर साल की तरह ही खाली पड़े प्लॉट बीमारियों का घर बन रहे हैं। शहर में खाली पड़े 500 से ज्यादा प्लॉटों में हुए जलभरावों में मच्छर पनप रहे हैं। जिसका खामियाजा लाेगांे को भुगतना पड़ रहा है। इसको लेकर प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं हो रही हैं। शहर में फोगिंग को लेकर नगर परिषद व चिकित्सा विभाग दोनों ही एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। इसके चलते शहर में मच्छरजनित बीमारियों का प्रक्राेप होने के बावजूद विभिन्न वार्डाे में फोगिंग नहीं करवाई गई है।

चिकित्सा विभाग नहीं मान रहा डेंगू से माैत

18 अक्टूबर को ढाई वर्षीय बालिका की भी मृत्यु हुई थी। 25 अक्टूबर को किशनगंज निवासी 41 वर्षीय महिला की कोटा में मृत्यु हुई। 5 नवंबर को माथना निवासी एक डेढ़ वर्षीय बालिका की कोटा में मृत्यु हो गई। 6 नवंबर को गऊघाट निवासी 18 वर्षीय युवक की मृत्यु हाे गई। परिजनों का कहना था कि मृतकों में डेंगू के लक्षण थे और जांच रिपोर्ट में डेंगू को लेकर उपचार किया गया था। अब विभाग अधिकारी इन्हें डेंगू से मृत्यु नहीं मान कर किसी अन्य बीमारी से मृत्यु होना बता रहे हैं।


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