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वृद्धाश्रम में 6 बुजुर्गों का इंद्राज, लेकिन एक भी मौजूद नहीं

एक वर्ष पहले
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राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण योजना के तहत गठित सम्प्रेषण एवं किशोर गृह समिति के अध्यक्ष शिवकुमार सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सीताराम मीना ने लोकदर्शन निराश्रित बालगृह एवं कन्यादह स्थित स्वामी श्रीकृष्ण बालगृह का निरीक्षण किया।

प्राधिकरण के सचिव शिवकुमार ने बताया कि इस दौरान शाहाबाद के बालगृह में छह बच्चे तथा कन्यादह स्थित बालगृह में 24 बच्चे मैजूद मिले। निरीक्षण के दौरान बालगृहों में निवासरत बच्चों के लिए रसोई घर, भोजन कक्ष गृह की उपलब्धता की जांच की गई। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सीताराम मीना ने बालगृहों में स्नानघर, शौचालय एवं शयनागार का भी निरीक्षण किया। इस दौरान बालकों को शिकायत पेटी का महत्व बताया गया। निरीक्षण के दौरान बालगृहों के स्टाफकर्मी तथा प्राधिकरण के हरिशंकर मीना मौजूद थे। वहीं कस्बे में स्थित प्रेरणा एज्युकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी टोंक वृद्धाश्रम का डालसा सचिव शिवकुमार तथा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सीताराम मीना ने निरीक्षण किया।

उन्होंने बताया कि वृद्ध आश्रम के बाहर किसी भी तरह का साइन बोर्ड नहीं लगा हुआ है। वृद्धाश्रम में कोई भी स्टाफकर्मी तथा वृद्धजन मौजूद नहीं मिला। वृद्धाश्रम में केवल एक महिला मिली, जो स्वयं को वृद्धाश्रम की संचालिका बता रही थी, लेकिन उसने किसी तरह का दस्तावेज पेश नहीं किया। निरीक्षण में पाया गया कि वृद्धाश्रम में वृद्धजनों की उपस्थिति का रजिस्टर, विजिटिंग रजिस्टर तथा अन्य किसी तरह का रजिस्टर संधारित नहीं किया जा रहा है। वृद्धजनों के रहने के लिए किसी भी तरह की कोई भी व्यवस्था नहीं मिली।

वृद्धजनों को ओढ़ने के लिए कंबल, चादर तथा बिछाने के लिए फर्श की व्यवस्था भी सही नहीं पाई गई। इसके अतिरिक्त वृद्धाश्रम में स्टाफ की ओर से छह बुजुर्गों का रहना बताया, लेकिन निरीक्षण में कोई भी बुजुर्ग उपस्थित नहीं मिला।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सीताराम मीना ने वृद्धाश्रम के स्नानागार, शौचालय तथा रसोई की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया, जो अत्यधिक खराब मिली। गौरतलब है कि वृद्धाश्रम में वृद्धजनों के रहने के स्थान पर मुर्गीपालन किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान प्राधिकरण के हरिशंकर मीना भी साथ थे।

छबड़ा उपकारागृह की जमीन उपकारागृह के नाम ही नहीं: छबड़ा. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला न्यायाधीश रमेश कुमार शर्मा तथा सचिव एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश शिवकुमार ने उपकारागृह का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि उपकारागृह की जमीन उपकारागृह के नाम पर ही नहीं है। प्राधिकरण के अध्यक्ष ने बताया कि इस मामले में उपकारापाल की ओर से तहसीलदार को उपकारागृह की भूमि के सीमाज्ञान के लिए पत्र लिखा, लेकिन तहसीलदार ने पत्र के जवाब में कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद उपकारापाल की ओर से अध्यक्ष तालुका विधिक सेवा समिति को पत्र लिखा जो अग्रिम कार्रवाई के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रेषित किया गया। इस पत्र के संदर्भ में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बारां की ओर से तहसीलदार को उपकारागृह को आवंटित भूमि के सीमाज्ञान करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान जिला न्यायाधीश रमेशकुमार शर्मा ने बंदियों से दैनिक दिनचर्या के बारे में पूछा। निरीक्षण के दौरान उपकारागृह में कुल 90 बंदियों को रखने की क्षमता है, जबकि वर्तमान में 96 बंदी हैं। उपकारागृह में महिला कैदियों के लिए बैरक बना हुआ है तथा बैरक में पांच महिला बंदियों को रखने की क्षमता है, लेकिन एक भी महिला प्रहरी नियुक्त नहीं होने के कारण महिला बंदियों को जिला कारागृह में भिजवा दिया जाता है।

छबड़ा. कस्बे के उपकारागृह का िनरीक्षण करते डालसा अध्यक्ष।
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