57 में से 39 बसों की लाइफ खत्म, फिर भी सड़कों पर दौड़ रही, रोज खतरे भरा सफर कर रहे 10 हजार यात्री

Baran News - यात्रियों की सुरक्षा का दावा करने वाले राजस्थान रोडवेज निगम की ओर से विभिन्न रुटों पर धड़ल्ले से खस्ताहाल बसों का...

Dec 04, 2019, 08:10 AM IST
Baran News - rajasthan news life out of 39 buses out of 57 still running on roads 10 thousand passengers traveling daily in danger
यात्रियों की सुरक्षा का दावा करने वाले राजस्थान रोडवेज निगम की ओर से विभिन्न रुटों पर धड़ल्ले से खस्ताहाल बसों का संचालन किया जा रहा है। रोडवेज के बारां डिपो के बेड़े में शामिल ऐसी कई बसें विभिन्न रुटों पर दौड़ रही हैं, जो कि तय सीमा से भी अधिक किमी चल चुकी है। उनकी समयावधि समाप्त हो गई है। इसके बावजूद भी रोडवेज मुख्यालय की ओर से कई बार प्रस्ताव भेजने के बावजूद ऐसी बसों का कंडम घोषित नहीं किया जा रहा है। खस्ताहाल बसें आए दिन रास्ते में खराब हो जाती हैं। कई बार दुर्घटनाओं का भी अंदेशा बना रहता है।

अधिक किराया देने के बावजूद भी रोडवेज बसों मे सफर कर रहे यात्रियों को सुरक्षित सफर महफूज नहीं हो पा रहा है। यात्रियों को खस्ताहाल बसों में सफर करने से जान का जोखिम बना हुआ है। कई बार प्रस्ताव भेजने के बावजूद मुख्यालय की ओर से समयावधि व तय किमी सीमा पूरी करने के बावजूद इन बसों का संचालन हो रहा है।

रोडवेज अधिकारियों के अनुसार बारां डिपो के बेड़े में कुल 82 बसें शामिल हैं। इनमें से 57 बसें निगम व 25 अनुबंधित बसें शामिल हैं। निगम की 57 बसों में से करीब 70 फीसदी बसों की समयावधि पूरी हो गई हैं। तथा कुछ बसें कुछ माह बाद 8 वर्ष की समयावधि भी पूरी कर लेगी। यह बसें तय सीमा 8 लाख से भी अधिक किमी का सफर तय कर चुकी हैं।

बारां. वर्कशॉप में स्पेयर पार्ट्स के इंतजार में 20 दिन से मरम्मत के लिए खड़ी रोडवेज बस।

आए दिन रास्ते में बंद हो रही बसें, दो माह में 19 ब्रेक डाउन

रोडवेज सूत्रों का मानना है कि कई बसों की हालात इतनी खस्ताहाल हो रही है कि वे आए दिन रास्ते में खराब हो जाती हैं। इनके मेंटीनेंस पर भी लाखों रुपए खर्च हो रहे हैं। वर्कशॉप में कई बार स्पेयर पार्टस समय पर नहीं मिलने व डिमांड के मुकाबले कम उपलब्धता के चलते दूसरे बसों के पुरानें पार्टस लगाकर भी बसों अस्थाई व्यवस्था कर बसों का संचालन किया जा रहा है। इसके चलते प्रतिदिन रोडवेज में सफर करने वाले करीब 15 हजार यात्रियों को खस्ताहाल बसों से हादसे का अंदेशा बना रहता है। बसों के बीच रास्ते में खराब होने से नवंबर माह में 8 और अक्टूबर में 11 ब्रेकडाउन हुए हैं।

12 बसाें को कंडम घोषित करने के लिए भेजे रखे हैं प्रस्ताव

लाखों रुपए का राजस्व देने वाले रोडवेज के बारां डिपो के बेडे में जल्द ही 12 बसें और कम हो जाएंगी। यह बसें निर्धारित अवधि से भी ज्यादा चल चुकी हैं, ऐसे में इन्हें कंडम घोषित कर दिया जाएगा। इनमें से 3 बसों की स्थिति खराब होने के कारण उनका रूट पर संचालन बंद कर दिया है। सभी 12 बसों को कंडम घोषित होने के बाद रोडवेज के पास स्वयं की मात्र 45 बसें ही रह जाएंगी। ऐसे में डिपो का बस संचालन लडख़ड़ा जाएगा। बसों की संख्या कम होने से डिपो 25 अनुबंधित बसें के सहयोग से चल रहा है। पिछले माह बारां डिपो से 2 बसें मुख्यालय भेजी गई थी, जहां से दोनो बसों को कंडम घोषित कर दिया।

नॉलेज : यह है बसों को नाकारा घोषित करने का प्रावधान

नियमानुसार रोडवेज की बसों को 8 साल या 8 लाख किमी चलाया जाता है। उक्त अवधि पूरी होते ही उन्हें नकारा घोषित किया जाता है लेकिन नई बसें नहीं आने से डिपो ने उक्त बसों को 11 से साढ़े 13 लाख किमी तक चलाया जा चुका है। यह बसें वर्तमान में भी मार्गों पर चलाई जा रही है। रोडवेज के पास 2013 तक की बसें हैं। यदि मुख्यालय ने स्वयं की बसें नहीं दी तो 2021 तक रोडवेज के पास स्वयं की एक भी बस संचालन योग्य नहीं रहेगी।

2013 के बाद नहीं मिली कोई बस

रोडवेज मुख्यालय की ओर से साल 2013 के बाद से ही बारां डिपो को कोई भी नई बस नहीं दी है। प्रतिवर्ष बसें के नाकारा होने से रोडवेज के पास स्वयं की मात्र 57 बसें रह गई हैं। ऐसे में सभी मार्गों पर संचालन जारी रखने के लिए डिपो ने 25 बसों को अनुबंध पर लिया है। अनुबंधित बसों से भी रोडवेज को कोई फायदा नहीं है, लेकिन यात्रियों की सुविधा के लिए उन्हें चला रखा है। सूत्रों के अनुसार रोडवेज की 57 बसों में से 12 बसें वर्ष 2010 और 2011 से पहले की है। ऐसे में प्रबंधक संचालन ने बसों को नाकारा घोषित के लिए रोडवेज मुख्यालय को पत्र लिखा है।


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