कई स्कूलों में चल रहा है मनमाना पाठ्यक्रम सुनवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

Baran News - छबड़ा| शिक्षा सत्र शुरू होते ही स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। कस्बे में कई निजी स्कूल संचालक सरकार के...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:55 AM IST
Chhabra News - rajasthan news movement warning of non arbitrary course going on in many schools
छबड़ा| शिक्षा सत्र शुरू होते ही स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। कस्बे में कई निजी स्कूल संचालक सरकार के तमाम नियमों को धता बता मनमर्जी का पाठयक्रम चला रहे हैं। वहीं शिक्षा विभाग और प्रशासन सबकुछ जानते हुए भी कार्रवाई नहीं कर रहा है।

शनिवार को प्रदेश संयोजक थिंक इंडिया शिवम विजयवर्गीय, छात्रसंघ अध्यक्ष रवि लोधा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अरविंद मीणा ने कस्बे में शिक्षा के व्यापारीकरण के विरोध में एसडीएम को ज्ञापन सौंपा और स्कूल ड्रेस, किताबें और अन्य शैक्षिक सामग्रियां बाजार में सभी दुकानों पर उचित मूल्य पर उपलब्ध करवाए जाने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने निजी स्कूलों की ओर से की जा रही लूट-खसोट पर अंकुश नहीं लगाया तो छात्रों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

थिंक इंडिया के प्रदेश संयोजक विजयवर्गीय ने बताया कि कस्बे के कई निजी स्कूलों की ओर से शिक्षा विभाग के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। निजी स्कूलों ने किताबों और ड्रेस के लिए मोटे कमीशन के लालच में चहेते दुकानदारों से सांठगांठ कर रखी है। नर्सरी, एलकेजी की किताबें भी एक हजार रुपए से ऊपर में दी जा रही है। वहीं अन्य कक्षाओं की किताबें तीन-चार हजार रुपए से कम नहीं मिल रही हैं। इन किताबों में निजी स्कूलों का दुकानदार से 50 प्रतिशत से अधिक कमीशन तय है। इस खेल में मध्यमवर्गीय परिवार के वे अभिभावक पिस रहे हैं जो अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि यह शिक्षा विभाग के अधिकारियों की जानकारी में नहीं हो, लेकिन वे शिकायत न मिलने का बहाना बनाकर कार्रवाई से पल्ला झाड़ लेते हैं।

ऐसे चला रहे हैं कमीशन का खेल

शिक्षा विभाग का नियम है कि सभी स्कूलों में सरकार की ओर से अनुमोदित पाठ्यक्रम ही चलाया जाना चाहिए। यह पाठ्यक्रम भी कम से कम तीन पुस्तक विक्रेताओं के पास उपलब्ध रहे, लेकिन निजी स्कूल संचालक इन दोनों ही नियमों की अवहेलना कर रहे हैं। बड़ी कक्षाओं में तो फिर भी इस नियम की थोड़ी पालना कर लेते हैं, लेकिन कक्षा आठ तक इनकी मनमर्जी का पाठ्यक्रम चलता है। इसके अलावा एक स्कूल का पाठ्यक्रम एक ही बुक सेलर के पास मिलेगा जो उन्हें सबसे ज्यादा कमीशन देता है।

काॅलेज से महंगी कक्षा पांच तक की किताबें

बच्चांे की शुरुआती शिक्षा ही अभिभावकों को महंगी पड़ रही है। निजी स्कूलों की मोटी फीस और इसके बाद पाठ्य पुस्तकों का खर्च के तले मध्यमवर्गीय परिवार दबते जा रहे हैं। पाठ्य पुस्तक विक्रेताओं के यहां जानकारी करने पर पता चलता है कि बीए प्रथम वर्ष की पाठ्य पुस्तकों की कीमत ज्यादा से ज्यादा एक हजार रुपए है। जबकि निजी स्कूलों के एक से पांच तक कक्षा की किताबों, कॉपियों का खर्चा 1500-2500 रुपए है। अगर स्कूल बड़ा हुआ तो यह खर्चा तीन हजार रुपए तक पहुंच जाता है।

नहीं दे रहे निशुल्क पुस्तक

आरटीई कानून के तहत जिन बच्चों को निशुल्क प्रवेश दिया जाता है उन्हें पाठ्य पुस्तक भी स्कूल की ओर से ही निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। क्योंकि शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों को दी जाने वाली पुनर्भरण राशि में पाठ्य पुस्तकों की राशि भी शामिल होती है, लेकिन स्कूल संचालक अभिभावकों की जानकारी के अभाव का फायदा उठाकर पाठ्य पुस्तकों का बोझ भी उन्हीं पर डाल देते हैं।


छबड़ा. शिक्षा के व्यापारीकरण के विरोध में एसडीएम को ज्ञापन दिया गया।

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