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होली पर विशेष योग...गुरु-शनि के अपनी राशि में रहने से आएगी सुख-समृद्धि

एक वर्ष पहले
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जिले में होली का त्योहार हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। पानी बचाने के लिए सूखी और तिलक होली खेलने का संकल्प लें। कई संगठनों की ओर से सूखी होली खेलने का संकल्प लिया गया है। साथ ही युवा, आमजन भी पानी बचाने के लिए सूखी होली खेलेंगे।

अबकी बार 499 साल बाद ग्रहों की चाल होली पर्व के साथ देश में समृद्धि व शांति का संयोग लेकर आ रही है। हिंदी पंचांग में 9 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा सोमवार के दिन होलिका दहन किया जाएगा। दूसरे दिन मंगलवार को होली खेली जाएगी। होली के दिन गुरु व शनि का विशेष योग बन रहा है। यानी दोनों ग्रह अपनी अपनी राशि में रहेंगे। पंडित ओमप्रकाश गौतम के अनुसार होली के दिन गुरु व शनि का अपनी-अपनी राशि में आना घर-परिवार के साथ ही देश में सुख-समृद्धि एवं शांति स्थापित करने वाला संयोग है। दूसरा बड़ा संयोग सोमवार के दिन होलिका दहन होना है। इस दिन बृहस्पति व मंगल भी एक साथ रहेंगे, जो बुद्धिजीवी वर्ग के लिए अच्छा संकेत माना जा रहा है। इस संयोग में मांगलिक कार्य होंगे। सुख-समृद्धि व शांति के साथ विकास के रास्ते खुलेंगे, जिसका असर देशभर में हो सकता है।

इससे पहले 3 मार्च 1521 को रहा था शुभ फल देने वाला एेसा संयोग

पंडित गौतम ने बताया कि गुरु व शनि एक साथ सूर्य नक्षत्र में आने से शुभ फलदायक रहेंगे। होली के दिन 9 मार्च को गुरु अपनी धनु राशि में और शनि भी अपनी ही राशि मकर में रहेंगे। इससे पहले इन दोनों ग्रहों का ऐसा योग 3 मार्च 1521 को बना था, तब भी ये दोनों ग्रह अपनी अपनी राशि में ही थे। होली पर शुक्र मेष राशि में, मंगल और केतु धनु राशि में, राहु मिथुन में, सूर्य और बुध कुंभ राशि में, चंद्र सिंह में रहेगा। ग्रहों के इन योगों में होली आने से ये शुभ फल देने वाली रहेगी। यह योग देश में शांति स्थापित करवाने में सफल होगा।

सर्वार्थ सिद्धि योग में होगा होलिका दहन

पंडित गौतम ने बताया कि होली के दिन ज्यादातर भद्रा रहती है। इस बार होलिका दहन सर्वार्थ सिद्धि योग में किया जाएगा। पंचांग के अनुसार होलिका दहन के लिए गोधूलि वेला का समय यानी शाम 6 से 7 बजे तक सर्वश्रेष्ठ माना गया है। बृहस्पति और मंगल की युति बुद्धिजीवी वर्ग के लिए शुभ फलदायक मानी है।

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