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यूरिया के लिए नहीं लगेंगी किसानों की कतारें, पिछले साल से 15 हजार मीट्रिक टन अधिक की भेजी डिमांड, पहुंचने लगी रैक

Baran News - पिछले साल से सबक लेते हुए इस बार जिला प्रशासन ने यूरिया की किल्लत नहीं आए, इसके लिए पहले ही 15 हजार मीट्रिक टन का...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 07:05 AM IST
Baran News - rajasthan news there will not be queues of farmers for urea demand sent for 15 thousand metric tons more than last year rack started reaching
पिछले साल से सबक लेते हुए इस बार जिला प्रशासन ने यूरिया की किल्लत नहीं आए, इसके लिए पहले ही 15 हजार मीट्रिक टन का स्टॉक कर लिया है। साथ ही डिमांड भी बढ़ाकर भेजी है।

पिछले साल यूरिया की भारी किल्लत हो गई थी, लंबी-लंबी लाइनें लगी थी और कई-कई दिन तक यूरिया के लिए किसानों का नंबर नहीं आया था। पिछले साल करीब 70 हजार मीट्रिक टन यूरिया की डिमांड रही। इस बार विभाग की ओर से पिछले साल के मुकाबले 15 हजार मीट्रिक टन यूरिया की अतिरिक्त डिमांड भेजी हैं।

14 हजार टन यूरिया का एडवांस स्टॉक कर लिया गया है। इसके लिए सहकारी समितियों, प्राइवेट डीलर्स के गोदामों में यूरिया का स्टॉक रखा गया है। जिले में यूरिया के लिए 99 सहकारी समितियां व करीब 290 डीलर्स है। इस बार डिमांड भी बढ़ाकर भेजी गई है, विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस बार 85 हजार मीट्रिक टन यूरिया, 40 हजार मीट्रिक टन डीएपी और 10 हजार मीट्रिक टन एसएसपी यानी सिंगल सुपर फास्फेट की डिमांड की गई है। डीएपी, यूरिया की डिमांड दिसंबर, जनवरी में सबसे ज्यादा रहती है।

किसानों को सलाह...पेस्टीसाइड्स और रसायन का कम करें उपयोग, इनसे जॉइंट पेन, ट्यूबरोक्लॉसिस, कैंसर जैसी बीमारियांे का खतरा

उपनिदेशक अतिश कुमार शर्मा ने बताया कि विभाग की ओर से किसानों को धान, गेहूं, सब्जियों में कितना रसायन और पेस्टीसाइड डालें, कैसे फसल बाेएं आदि को लेकर जागरुक किया जा रहा है। उन्होंनें किसानों काे सलाह दी है कि कम पानी की अावश्यकता वाली फसलों बुवाई करने, रसायनिक खाद, यूरिया आदि का उपयोग कम मात्रा में करें। इनसे जमीन की ऊपजाऊ क्षमता कम होती हैं। नहरी इलाके में फसल में थोक के भाव यूरिया और दूसरे पेस्टिसाइड्स छिड़ने की वजह से नहरों, नालों और नदियों तक का पानी खराब हो रहा है। किसान खेतों में जरूरत से ज्यादा पानी छोड़ते हैं, ऐसे में पानी पाळ तोड़कर फिर से ड्रेन, नदी-नालों, तालाबों और जमीन में जाता है। ऐसे में पेयजल में भी ये घुल जाते हैं। पेस्टिसाइड्स और रसायन से जॉइंट पेन, ट्यूबरोक्लॉसिस, कैंसर जैसी घातक बीमारियां पैदा करते हैं। ऐसे में किसानों काे कृषि कार्याे के लिए जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट आदि का उपयोग पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

इसलिए कट्‌टे का वजन 5 किलो घटाया

किसान फसल में जरूरत से ज्यादा यूरिया डालते हैं, जो खेत की जमीन और लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर डालता है। किसान मात्रा के हिसाब से नहीं कट्‌टे के हिसाब से यूरिया डालते हैं। सरकार ने ही यूरिया के कट्टे का वजन 50 किलो से घटाकर 45 किलो का कर दिया है। यूरिया डालने की आदर्श स्थिति कितनी हो, इस बारे में कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि एक हैक्टेयर (सवा छह बीघा) गेहूं की बुआई के वक्त 90 किलो डीएपी और फसल में 225 किलो यूरिया काफी है। बारां की बात करें तो किसान औसतन 90 किलो डीएपी की जगह 110 किलो और यूरिया 300 किलो से भी ज्यादा डालते हैं। दलहन में केवल डीएपी ही डाली जाती है, जो भी 90 किलो काफी है। चावल में भी गेहूं के बराबर यूरिया ही काफी है।

लक्ष्य से 3 गुना अधिक हो सकती है चने की बुवाई

लक्ष्य से 3 गुना अधिक हो सकती है चने की बुवाई

कृषि विभाग के मुताबिक जिले में इस बार 1 लाख 75 हजार हैक्टेयर में गेहूं, 15 हजार हैक्टेयर में चना, 90 हजार हैक्टेयर में सरसों, 20 हजार में धनियां, 40 हजार में लहसुन की बुआई समेत कुल 3 लाख 49 हजार हैक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य रखा है। इसके मुकाबले अभी तक सिर्फ 15 हजार हैक्टेयर मे गेहूं, 48 हजार में सरसों, 4500 में धनियां, 18 हजार हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई हुई। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बारिश का सीजन निकलने के बाद भी हुई बारिश के कारण फसल बुवाई में देरी हुई है। खेतों में नमी व मौसम को देखते हुए किसानो का रुझान सरसों, गेंहू, धनियां आदि से हटकर चने की बुवाई की ओर बढ़ रहा है। क्योकि चने की फसल में कम लागत में ही किसानाें काे अच्छा मुनाफा मिलता है। इस बार चने की बुवाई लक्ष्य से तीन गुना अधिक रकबे में होने की उम्मीद है।

कृषि विभाग के मुताबिक जिले में इस बार 1 लाख 75 हजार हैक्टेयर में गेहूं, 15 हजार हैक्टेयर में चना, 90 हजार हैक्टेयर में सरसों, 20 हजार में धनियां, 40 हजार में लहसुन की बुआई समेत कुल 3 लाख 49 हजार हैक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य रखा है। इसके मुकाबले अभी तक सिर्फ 15 हजार हैक्टेयर मे गेहूं, 48 हजार में सरसों, 4500 में धनियां, 18 हजार हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई हुई। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बारिश का सीजन निकलने के बाद भी हुई बारिश के कारण फसल बुवाई में देरी हुई है। खेतों में नमी व मौसम को देखते हुए किसानो का रुझान सरसों, गेंहू, धनियां आदि से हटकर चने की बुवाई की ओर बढ़ रहा है। क्योकि चने की फसल में कम लागत में ही किसानाें काे अच्छा मुनाफा मिलता है। इस बार चने की बुवाई लक्ष्य से तीन गुना अधिक रकबे में होने की उम्मीद है।


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